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    MP में वाहन रजिस्ट्रेशन में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर : 1.71 लाख गाड़ियां सिर्फ 1342 मोबाइल नंबरों पर रजिस्टर्ड

    Updated: Sun, 25 Jan 2026 03:27 PM (IST)

    मध्य प्रदेश परिवहन विभाग ने वाहन पंजीकरण में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। डीलरों ने हजारों वाहनों को मालिकों की जानकारी के बिना चुनिंदा या फर्जी ...और पढ़ें

    वाहन रजिस्ट्रेशन में फर्जीवाड़ा (प्रतीकात्मक तस्वीर)

    वाहन रजिस्ट्रेशन में फर्जीवाड़ा (प्रतीकात्मक तस्वीर)

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    डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश परिवहन विभाग ने वाहन पंजीकरण प्रक्रिया में बड़ी अनियमितता का खुलासा किया है। विभाग की तकनीकी जांच में सामने आया है कि कई ऑटोमोबाइल डीलर्स ने वाहन मालिकों की जानकारी के बिना हजारों वाहनों को चुनिंदा और फर्जी मोबाइल नंबरों पर रजिस्टर कर दिया। इसे सुरक्षा और पारदर्शिता के लिहाज से गंभीर चूक मानते हुए विभाग ने सख्त रुख अपनाया है।

    परिवहन विभाग के अनुसार, 1 जनवरी 2025 के बाद पंजीकृत 1,71,413 वाहनों का रजिस्ट्रेशन महज 1,342 मोबाइल नंबरों के आधार पर कर दिया गया। इस खुलासे के बाद विभाग ने सभी डीलर्स को 31 जनवरी तक वाहन मालिकों के सही मोबाइल नंबर अपडेट करने के निर्देश दिए हैं।

    वाहन मालिकों को भुगतना पड़ रहा खामियाजा

    परिवहन आयुक्त कार्यालय ने बताया कि इस गड़बड़ी के पीछे डीलर्स की लापरवाही और तय प्रक्रियाओं की अनदेखी प्रमुख कारण है। इसका सीधा नुकसान वाहन मालिकों को हो रहा है। गलत मोबाइल नंबर दर्ज होने के कारण उन्हें न तो ई-चालान की सूचना मिल पा रही है और न ही वे परिवहन विभाग की ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठा पा रहे हैं।

    डीलर्स को सात दिन का अल्टीमेटम

    परिवहन विभाग ने सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) को संबंधित डीलर्स की सूची सौंप दी है और सुधार के लिए सात दिन का अल्टीमेटम जारी किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि 31 जनवरी 2026 तक यदि डेटा दुरुस्त नहीं किया गया तो संबंधित डीलर्स के खिलाफ वैधानिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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    साथ ही, जिन वाहनों का रिकॉर्ड अपडेट नहीं होगा, उन्हें प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) जारी नहीं किया जाएगा और उनसे जुड़ी सभी डिजिटल सेवाएं तत्काल प्रभाव से ब्लॉक कर दी जाएंगी।

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    ओटीपी से बचने के लिए अपनाया गलत तरीका

    परिवहन विभाग के मुताबिक, वर्तमान में वाहन पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है, जिसमें ओटीपी सत्यापन अनिवार्य होता है। कई बार सर्वर डाउन होने, या ग्राहक के मोबाइल नंबर का आधार से लिंक न होने पर ओटीपी नहीं आ पाता।
    ऐसी स्थिति में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को जल्दी पूरा करने और अपने टारगेट व कमीशन सुरक्षित करने के लिए डीलर्स ने शोरूम के किसी एक कर्मचारी या अपने ही मोबाइल नंबर का बार-बार इस्तेमाल कर लिया।

    बल्क डिलीवरी में कॉपी-पेस्ट का खेल

    कई शोरूम में एक साथ 50 से 100 वाहनों की डिलीवरी होती है। काम का दबाव कम करने के लिए ऑपरेटर हर ग्राहक का वास्तविक मोबाइल नंबर सत्यापित करने के बजाय कॉपी-पेस्ट तकनीक अपनाते रहे। इससे कागजों में प्रक्रिया पूरी हो गई, लेकिन सरकारी डेटाबेस में गलत जानकारी दर्ज होती चली गई।

    ऐसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा

    • परिवहन विभाग ने अपने सॉफ्टवेयर डेटाबेस पर ‘डुप्लीकेट मोबाइल मैपिंग’ कमांड रन की।
    • इसके जरिए उन मोबाइल नंबरों को अलग किया गया, जिनका इस्तेमाल तय सीमा से ज्यादा बार हुआ था।
    • नतीजे चौंकाने वाले रहे। एक ही मोबाइल नंबर पर सैकड़ों वाहन पंजीकृत पाए गए। 
    • सॉफ्टवेयर ने यह भी ट्रैक कर लिया कि ये फर्जी एंट्रियां किस डीलर आईडी से की गई हैं। 
    • इससे सबसे ज्यादा गड़बड़ी करने वाले शोरूम और एजेंसियों की पहचान आसान हो गई।