मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी पर किसानों का गुस्सा, बैरिकेड तोड़ भोपाल की ओर बढ़े, सीएम हाउस घेरने की चेतावनी
मध्य प्रदेश में मूंग की सरकारी खरीदी नीति के विरोध में किसान उग्र हो गए हैं। उन्होंने पुलिस बैरिकेड और ...और पढ़ें

नर्मदापुरम- बैरिकैड्स को तोड़कर भोपाल की ओर बढ़े किसान।
HighLights
किसान मूंग की 25% खरीदी नीति का विरोध कर रहे हैं।
पुलिस बैरिकेड तोड़कर किसान भोपाल की ओर बढ़े।
सीएम हाउस का घेराव करने की किसानों की चेतावनी।
भोपाल/नर्मदापुरम: मध्य प्रदेश में मूंग की सरकारी खरीदी को लेकर किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर उग्र रूप ले चुका है। उत्पादन का केवल 25 प्रतिशत मूंग खरीदने की सरकारी नीति के विरोध में सोमवार को नर्मदापुरम, हरदा और सीहोर जिलों के किसानों ने राजधानी भोपाल की ओर कूच कर दिया।
किसानों के इस 'भोपाल कूच' को रोकने के लिए प्रशासन ने जगह-जगह भारी पुलिस बल तैनात कर बैरिकेडिंग की थी और कई किसान नेताओं को अस्थायी जेलों में नजरबंद भी किया गया था। लेकिन, उग्र किसानों ने दिनभर चले संघर्ष के बाद न सिर्फ अस्थायी जेलों को तोड़ा, बल्कि पुलिस के तमाम बैरिकेड हटाकर भोपाल की ओर अपना कदम बढ़ा दिया है। किसानों ने बुधवार सुबह भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की कड़ी चेतावनी दी है।
नर्मदा पूजन के बाद शुरू हुआ 'भोपाल कूच'
संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े 13 किसान संगठनों (जिनमें क्रांतिकारी किसान संगठन, भारतीय किसान यूनियन, राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ, किसान कांग्रेस आदि शामिल हैं) के प्रतिनिधि सोमवार सुबह अलग-अलग गांवों से निकलकर नर्मदापुरम के सेठानी घाट पहुंचे। इससे पहले हरदा और भैरूंदा सहित कई जगहों पर किसान नेताओं को नजरबंद किया गया, लेकिन वे पुलिस को चकमा देकर अलग-अलग रास्तों से नर्मदापुरम पहुंच गए। सेठानी घाट पर नर्मदा पूजन और हनुमान चालीसा के पाठ के बाद किसानों ने अपना पैदल मार्च शुरू किया।
पुलिस से धक्कामुक्की, टूट गए सारे बैरिकेड
किसानों के जत्थे को रोकने के लिए प्रशासन ने झंडा चौक, फिर इंदिरा चौक और उसके बाद भोपाल तिराहे पर बैरिकेड लगाए थे। लेकिन भारी संख्या में मौजूद किसानों ने धक्कामुक्की के बीच इन सभी बैरिकेड्स को हटा दिया। नर्मदापुरम कलेक्टर सोमेश मिश्रा और पुलिस अधीक्षक साईं कृष्णा एस. थोटा ने किसानों को काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे।
पहली बैरिकेडिंग पार करने के बाद किसान नर्मदा पुल के पास ग्राम डोगरवाड़ा पहुंच गए, जहां त्रिस्तरीय (थ्री-लेयर) सुरक्षा लगाई गई थी। यहां पुलिस और किसानों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्कामुक्की हुई। संभागायुक्त श्रीकांत बनोठ के बातचीत के प्रयास भी विफल रहे और किसानों ने यहां भी बैरिकेड तोड़ दिए।
बुधनी ओवरब्रिज पर भी भारी हंगामा
किसानों का यह विशाल जत्था शाम करीब 7:15 बजे बुधनी पहुंचा। यहां भी उन्हें रोकने के लिए भारी पुलिस बल और बैरिकेड्स लगाए गए थे। करीब 15-20 मिनट तक चले भारी हंगामे और संघर्ष के बाद किसानों ने बुधनी ओवरब्रिज पर लगे बैरिकेड भी हटा दिए और अपनी मंजिल (भोपाल) की ओर आगे बढ़ गए।
क्या कहना है किसान नेताओं का?
क्रांतिकारी किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष लीलाधर राजपूत ने प्रशासन की कार्रवाई पर रोष जताते हुए कहा, "हम कई दिनों से शासन-प्रशासन के सामने अपनी उचित मांग रख रहे हैं। जब हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई, तो अंत में हमने सीएम हाउस के घेराव का आखिरी रास्ता अपनाया है। प्रशासन ने मुझे शाम छह बजे तक नजरबंद करके रखा था, ताकि हम इस मार्च में न पहुंच पाएं, लेकिन किसान अब पीछे हटने वाले नहीं हैं।"
