UP में पंखे से एक्सप्रेस-वे पर पैचवर्क सुखाने वाली कंपनी ने MP में अफसरों को दी थी रिश्वत; CBI ने दायर की चार्जशीट
PNC इन्फ्राटेक लिमिटेड मध्य प्रदेश में एक बड़े रिश्वत कांड में फंसी है, जहां सीबीआई ने कंपनी अधिकारियों और NHAI ...और पढ़ें

एक्सप्रेस-वे पर पैचवर्क को पंखे से सुखाया। (सौजन्य- इंटरनेट मीडिया)
HighLights
PNC इन्फ्राटेक मध्य प्रदेश में रिश्वत कांड में फंसी।
कंपनी व NHAI अधिकारियों पर आरोप पत्र दायर।
झाँसी-खजुराहो हाईवे परियोजना में NOC के लिए रिश्वत।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे के निर्माण में गड़बड़ियों के आरोपों से घिरी पीएनसी इन्फ्राटेक लिमिटेड मध्यप्रदेश में भी बड़े रिश्वत कांड में फंसी हुई है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भोपाल की विशेष अदालत में इस साल 22 फरवरी को कंपनी के अधिकारियों के विरुद्ध आरोप पत्र दायर किया था। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को प्रस्तावित है।
दो साल पहले दर्ज किया था केस
दरअसल, सीबीआई ने आठ जून 2024 को इस संबंध में मामला दर्ज किया था। इसके बाद एनएचएआई के परियोजना निदेशक पुरुषोत्तम लाल चौधरी और एनएचएआई सलाहकार शरद प्रकाश वर्मा को दस लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद पीएनसी इन्फ्राटेक के अधिकारियों बृजेश मिश्रा, शुभम जैन, अनिल जैन, सत्यनारायण अंगुलुरी और प्रेम कुमार सिन्हा समेत अन्य आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। सात आरोपितों को विशेष अदालत ने सीबीआई हिरासत में भेजा था।
घूसखोरी का लंबा खेल
सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, झांसी-खजुराहो हाइवे परियोजना में पीएनसी से जुड़ी कंपनियों की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी के हस्तांतरण की अनापत्ति जल्द हासिल करने और परियोजना से संबंधित अन्य सुविधाएं लेने के लिए एनएचएआई अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देने की साजिश रची गई थी। एनएचएआई के परियोजना निदेशक पुरुषोत्तम लाल चौधरी को दस लाख रुपये, एनएचएआई के सलाहकार शरद प्रकाश वर्मा को एक लाख रुपये और परियोजना के रेजिडेंट इंजीनियर प्रेम कुमार सिन्हा को 50 हजार रुपये देने की योजना थी।
होटल में मिला था 16 लाख का चेक
सीबीआई को एक होटल से 16 लाख रुपये का चेक भी मिला था। इसपर पीएनसी के शुभम जैन और बृजेश मिश्रा के हस्ताक्षर थे और रकम का इस्तेमाल पुरुषोत्तम लाल चौधरी तथा सत्यनारायण तक पहुंचाने के लिए किया जाना था। बैंक बंद होने के कारण चेक भुनाया नहीं जा सका।
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164 फोन कॉल की तैयार की गई ट्रांसक्रिप्ट
सीबीआई ने न्यायालय की अनुमति के बाद मार्च से जून 2024 के बीच नौ मोबाइल नंबरों की निगरानी की थी। जांच एजेंसी ने इन नंबरों के बीच हुई 164 कॉल की ट्रांसक्रिप्ट तैयार की। चार्जशीट में दावा किया गया है कि इन बातचीत में रिश्वत की रकम की मांग, उसकी व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों तक रकम पहुंचाने से जुड़ी बातें सामने आईं।
