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CBI हिरासत में जापान की मर्डर मिस्ट्री ‘Butter’ पढ़ रहा समर्थ; त्विषा केस के बीच क्राइम थ्रिलर ने बढ़ाई दिलचस्पी

By Prashant VyasEdited By: Ravindra Soni
Published: Thu, 28 May 2026 11:20 PM (IST)

पत्नी त्विषा शर्मा की मौत के मामले में सीबीआई हिरासत में बंद समर्थ सिंह एक जापानी क्राइम थ्रिलर उपन्यास 'बटर' ...और पढ़ें

आरोपित समर्थ सिंह।

आरोपित समर्थ सिंह।

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प्रशांत व्यास, भोपाल। रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह का बेटा और आपराधिक मामलों का वकील समर्थ सिंह इन दिनों सीबीआई की हिरासत में एक जापानी क्राइम थ्रिलर उपन्यास ‘बटर’ पढ़ रहा है। पत्नी और मॉडल-अभिनेत्री त्विषा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में दहेज हत्या के आरोपों का सामना कर रहे समर्थ का यह साहित्यिक झुकाव चर्चा का विषय है।

सलाखों के पीछे इसी किताब में डूबा

22 मई को गिरफ्तारी के बाद से समर्थ यह पुस्तक अपने साथ रखे हुए है। भोपाल के कटारा हिल्स थाने की हवालात में रहते वह उपन्यास का आधे से अधिक हिस्सा पढ़ चुका था। अब सीबीआई की हिरासत में भी शेष पन्नों में डूबा हुआ है। कोर्ट परिसर में मौजूद उसके कुछ वकील मित्र बताते हैं कि समर्थ को लंबे समय से अपराध, मनोविज्ञान और न्याय व्यवस्था से जुड़ी किताबें पढ़ने का शौक रहा है।

जापान की ‘कोंकात्सु किलर’ घटना से प्रेरित है उपन्यास

वर्ष 2017 में प्रकाशित जापानी लेखिका असाको युजुकी का चर्चित उपन्यास बटर जापान की बहुचर्चित कोंकात्सु किलर घटना से प्रेरित माना जाता है। कहानी फूड ब्लॉग और रसोइया मनाको काजी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिस पर कई संपन्न व्यापारियों की हत्या के आरोप लगते हैं। आरोप है कि वह स्वादिष्ट भोजन और भावनात्मक रिश्तों के जरिए पुरुषों को अपने प्रभाव में लेती थी।

उपन्यास में एक महिला पत्रकार जेल में बंद मनाको से संपर्क करती है और धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू होता है। इसी संवाद के जरिए अपराध, अकेलापन, समाज में महिलाओं की छवि और मानव मनोविज्ञान की जटिल परतें खुलती जाती हैं। दिलचस्प बात यह भी है कि कहानी का केंद्रीय पात्र कई सनसनीखेज आरोपों के बावजूद अंततः अदालत में निर्दोष साबित होता है।

समर्थ के मौजूदा हालात से जुड़ रही कहानी की परछाइयां

जिस समय समर्थ यह उपन्यास पढ़ रहा है, वह स्वयं एक चर्चित आपराधिक मामले में आरोपों के घेरे में है। ऐसे में अपराध और मनोवैज्ञानिक तनाव पर आधारित इस कहानी का उनके वर्तमान हालात से जुड़ना कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अपराध और जांच प्रक्रिया पर आधारित साहित्य कई बार आरोपितों या वकीलों के लिए आत्मविश्लेषण, मानसिक सहारे या परिस्थितियों को समझने का माध्यम बन जाता है। हालांकि, इस मामले में उपन्यास और वास्तविक घटनाओं के बीच समानताएं लोगों की उत्सुकता और बहस दोनों बढ़ा रही हैं।

कानूनी अखाड़े का पहलवान, लेकिन रणनीति में कर बैठा बड़ी चूक

पत्नी त्विषा की मौत मामले में समर्थ सिंह को कानूनी दांवपेंच का माहिर खिलाड़ी माना जाता रहा, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में उसकी कई रणनीतिक गलतियां सामने आईं। घटना के तुरंत बाद पुलिस से दूरी बनाकर रसूखदारों से संपर्क साधने की कोशिश की। अग्रिम जमानत हासिल करने की कवायद शुरू की, लेकिन राहत नहीं मिलने पर फरार होना। मामला भोपाल न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद जबलपुर कोर्ट में सरेंडर की कोशिश की। लगातार फरारी के कारण पुलिस द्वारा इनामी घोषित करना और फिर हंगामेदार गिरफ्तारी। यह सब ऐसे पहलु हैं, जो समर्थ से त्विषा केस में जुड़े। घटनाक्रम का असर उसकी पेशेवर छवि पर भी पड़ा। वकालत का लाइसेंस निलंबित होने के बाद कानूनी जगत में उनकी साख को बड़ा झटका लगा।

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