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'निर्मला सप्रे की विधायकी पर दो महीने में करें फैसला', सुप्रीम कोर्ट का MP विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश; उमंग सिंघार ने लगाई थी याचिका

Published: Wed, 04 Nov 2026 05:12 PM (GMT+05:30)Updated: Wed, 04 Nov 2026 08:05 PM (GMT+05:30)

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल मामले पर दो महीने में निर्णय लेने ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने दलबदल मामले में निर्मला सप्रे की विधायकी को लेकर दिया अहम आदेश।

सुप्रीम कोर्ट ने दलबदल मामले में निर्मला सप्रे की विधायकी को लेकर दिया अहम आदेश।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट का एमपी स्पीकर को दो माह में निर्णय का निर्देश।

  2. विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल मामले पर सुनवाई का आदेश।

  3. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दायर की थी दलबदल याचिका।

राज्य ब्यूरो, भोपाल। सागर जिले के बीना विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्मला सप्रे को लेकर दलबदल से संबंधित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को दो महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि 10वीं अनुसूची (दलबदल कानून) से जुड़े मामलों का शीघ्र निराकरण किया जाना चाहिए, भले ही हाई कोर्ट ने मामले में तात्कालिकता न मानी हो।

कांग्रेस का आरोप है कि वर्ष 2023 में पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने का बाद निर्मला सप्रे भाजपा में शामिल हो गईं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर याचिका दायर की।

उमंग सिंघार ने बताया कि जनता ने निर्मला सप्रे को कांग्रेस के टिकट पर चुना गया था। जनादेश के साथ विश्वासघात करने वालों को दलबदल कानून के तहत जवाबदेह बनाना आवश्यक है। नियमानुसार दलबदल से संबंधित मामलों में आवेदन प्राप्त होने पर 90 दिन में निर्णय लेना चाहिए, लेकिन इसमें विलंब होता रहा। हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के बाद यह विषय जबलपुर की मुख्य पीठ पहुंचा।

यहां तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने विधानसभा अध्यक्ष को मामले का शीघ्र निपटारा करने या कोई विशेष निर्देश जारी करने से इन्कार करते हुए याचिका निरस्त कर दी। इसका आधार विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष दलबदल कानून के तहत दायर आवेदन पर सुनवाई जारी होने और संबंधित पक्षों का बयान दर्ज होना रहा।

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इस निर्णय के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने दोनों पक्षों को अपनी बात कहने का अवसर भी दिया। तब से ही मामला जहां का तहां है। उमंग सिंघार ने विश्वास जताया कि विधानसभा अध्यक्ष इस मामले में निर्धारित समय-सीमा के भीतर निष्पक्ष, न्यायसंगत और संवैधानिक प्रविधानों के अनुरूप निर्णय लेंगे। उमंग सिंघार का पक्ष सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने रखा।

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