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त्विषा केस: AIIMS की पीएम रिपोर्ट पर टिकी CBI की जांच, जेल में गिरिबाला की सुरक्षा के लिए दोषी महिला कैदी दूसरी बैरक में शिफ्ट

Published: Fri, 05 Jun 2026 07:52 PM (IST)Updated: Fri, 05 Jun 2026 11:36 PM (IST)

सीबीआई त्विषा शर्मा की संदेहास्पद मौत की जांच में दिल्ली एम्स की री-पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिससे ...और पढ़ें

त्विषा शर्मा केस में सीबीआई की जांच तेज।

त्विषा शर्मा केस में सीबीआई की जांच तेज।

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संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मॉडल एवं एक्टर त्विषा शर्मा की संदेहास्पद मौत के मामले में सीबीआई को अब दिल्ली एम्स के चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा किए गए री-पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। इस रिपोर्ट से यह साफ हो सकता है कि त्विषा ने आत्महत्या की या उसकी मौत के पीछे कोई गहरा आपराधिक षड्यंत्र छिपा है।

दरअसल, मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के विशेषज्ञों ने पिछले दिनों घटना स्थल का बारीकी से मुआयना किया था। क्राइम सीन री-क्रिएशन के दौरान विशेषज्ञों ने जो वैज्ञानिक माप, तस्वीरें और महत्वपूर्ण तकनीकी इनपुट्स जुटाए थे, उनकी प्रमाणिकता पूरी तरह से एम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर निर्भर बताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि सीबीआई की टीम त्विषा के शरीर पर मिले चोट के निशानों का मिलान डमी टेस्ट से निकले निष्कर्षों के साथ करने की तैयारी में है, ताकि मौत की असल वजह और समय का सटीक आकलन किया जा सके।

प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पर फोकस

जांच को मजबूत बनाने के लिए सीबीआई चश्मदीदों के बयानों पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है। घटना के कुछ घंटे पहले त्विषा जिस सैलून में गई, वहां के स्टाफ से लेकर वारदात के तुरंत बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाने वाले लोगों और घर के आसपास मौजूद पड़ोसियों के बयान बेहद अहम माने जा रहे हैं। इन कड़ियों को कानूनी रूप से पुख्ता करने के लिए सीबीआइ प्रमुख गवाहों के बयान अदालत के समक्ष दर्ज कराने की रणनीति बना रही है।

अंतिम चरण में पड़ताल, चार हफ्ते में चार्जशीट संभव

सूत्रों के अनुसार, त्विषा की मौत के मामले में मुख्य आरोपित पति अधिवक्ता समर्थ सिंह और सास भोपाल की सेवानिवृत्त जिला जज गिरिबाला सिंह को पांच दिन की रिमांड पर लेकर सीबीआइ पूछताछ कर चुकी है। इसके बाद सीबीआइ ने फिर से पूछताछ की जरूरत फिलहाल नहीं समझी। यह भी एक संकेत है कि सीबीआई की पड़ताल अब अंतिम चरण में है।

मामले को देखते हुए वरिष्ठ स्तर पर अधिकारियों द्वारा साक्ष्यों की कानूनी समीक्षा की जा रही है। सबकुछ तय योजना के मुताबिक रहा, तो जांच एजेंसी अगले चार सप्ताह के भीतर अदालत के सामने अपनी चार्जशीट दाखिल कर सकती है।

दोषी महिला कैदी दूसरी बैरक में शिफ्ट

उधर, भोपाल की सेंट्रल जेल में बंद गिरिबाला सिंह की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जेल प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है। अधिकारियों ने उनके द्वारा सजा सुनाई गई एक दोषी महिला कैदी को उनकी बैरक के पास से हटाकर जेल के दूसरे हिस्से में स्थानांतरित कर दिया है।

जेल सूत्रों के अनुसार, किसी भी सुरक्षा चूक या प्रशासनिक जटिलता से बचने के लिए यह कदम एहतियातन उठाया गया है। स्थानांतरित की गई कैदी कोमल पांडे को गिरिबाला सिंह की अध्यक्षता वाली अदालत ने एक मामले में दोषी ठहराया था। कोमल पांडे का नाम 2013 में कथित मेडिकल प्रवेश धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े मामलों में सामने आया था।

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