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    ग्वालियर से नागपुर 10 घंटे में : 40 हजार करोड़ का सिक्स लेन कॉरिडोर आकार लेने को तैयार

    Updated: Thu, 19 Feb 2026 07:54 PM (IST)

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की घोषणा के बाद ग्वालियर से नागपुर तक 569 किमी लंबे छह लेन मेगा हाईवे कॉरिडोर पर काम तेज हो गया है। यह परियोजना लगभग 40 हज ...और पढ़ें

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    डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की घोषणा के बाद ग्वालियर से बैतूल होते हुए नागपुर तक प्रस्तावित मेगा हाईवे कॉरिडोर पर काम तेज हो गया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    फिलहाल राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के माध्यम से सिवनी के पास लखनादौन और खवासा के बीच मौजूदा सड़क पर चिन्हित ब्लैक स्पॉट खत्म करने, अंडरपास और जरूरी पुलों के निर्माण के लिए कंसल्टेंट एजेंसी चयन की प्रक्रिया जारी है।

    569 किमी लंबा सिक्स लेन कॉरिडोर

    प्रस्तावित 569 किलोमीटर लंबा यह छह लेन कॉरिडोर मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, अशोकनगर, विदिशा, भोपाल, रायसेन, नर्मदापुरम और बैतूल से गुजरते हुए नागपुर तक पहुंचेगा। इसके निर्माण के बाद ग्वालियर से नागपुर की दूरी लगभग 10 घंटे में तय की जा सकेगी, जिससे यात्रियों और माल परिवहन दोनों को बड़ी राहत मिलेगी।

    न्यू अलाइनमेंट या चौड़ीकरण?

    करीब 40 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को ग्रीनफील्ड (नए अलाइनमेंट) के रूप में विकसित किया जाएगा या मौजूदा मार्ग का चौड़ीकरण होगा—इस पर मंत्रालय स्तर पर मंथन जारी है। हालांकि लागत और लंबाई को देखते हुए इसे नए अलाइनमेंट पर विकसित किए जाने की संभावना अधिक मानी जा रही है।

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    दिल्ली-नागपुर कॉरिडोर से कनेक्टिविटी

    संभावना यह भी जताई जा रही है कि इस कॉरिडोर को आगरा-ग्वालियर प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जाएगा। ऐसा होने पर यह मार्ग सीधे दिल्ली-नागपुर कॉरिडोर का रूप ले लेगा। इससे उत्तर भारत से महाराष्ट्र और दक्षिण भारत तक माल परिवहन की रफ्तार तेज होगी।

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    एक्सप्रेस-वे के किनारे लॉजिस्टिक पार्क विकसित करने की भी योजना है, जिससे दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश से आने वाला माल ग्वालियर के रास्ते महाराष्ट्र तक सुगमता से पहुंच सकेगा।

    यह कॉरिडोर मध्य प्रदेश को उत्तर और दक्षिण भारत के बीच एक मजबूत परिवहन सेतु के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।