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श्योपुर में गोली मारकर चीता शावक का शिकार, शरीर में मिले पांच छर्रे; बड़ा सवाल- सैटेलाइट कॉलर, ट्रैकिंग टीम के बावजूद कैसे पहुंचे शिकारी?

Published: Tue, 27 Oct 2026 06:58 PM (IST)Updated: Tue, 27 Oct 2026 10:25 PM (IST)

कूनो नेशनल पार्क से बाहर मिले मादा चीता निर्वा के 19 माह के शावक की गोली लगने से मौत हो ...और पढ़ें

कूनो नेशनल पार्क। (फाइल फोटो)

कूनो नेशनल पार्क। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. चार वर्ष में चीता के शिकार का पहला मामला।

  2. शरीर में पांच छर्रे मिले, फेफड़े के पास गंभीर चोट।

  3. चीता परियोजना की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल।

डिजिटल डेस्क, श्योपुर। कूनो नेशनल पार्क से बाहर घायलावस्था में मिले मादा चीता निर्वा के 19 माह के शावक की मौत हो गई। उसको गोली मारी गई थी। शावक के शरीर में पांच छर्रे मिले। इसमें एक छर्रा फेफड़े के पास मिला। फेफड़े के आसपास के ऊतकों के गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने से चीता शावक की मौत हुई।

जांच के लिए एसटीएफ गठित

ऑपरेशन कर छर्रा निकाले जाने के प्रयास के दौरान उसकी मौत हुई। चीता परियोजना शुरू होने के चार वर्षों में इस तरह की यह पहली घटना है। इस घटना ने चीता निगरानी तंत्र पर सवाल उठाए हैं। इस मामले की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स(एसटीएफ) गठित किया गया है। 21 सितंबर से अब तक तीन चीतों को मिलाकर पिछले एक साल साल में 14 चीतों की मौत हुई है।

एक्स-रे और CT स्कैन में मिले गोली के छर्रे

सोमवार को कूनो पार्क के बाहर विजयपुर वन परिक्षेत्र के नितनवांस बीट में यह शावक गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला था। मंगलवार सुबह ऑपरेशन के दौरान उसने दम तोड़ दिया। पीसीसीएफ, वाइल्ड लाइफ डा समीता राजोरा ने बताया कि घायल अवस्था में मिलने पर किए गए एक्स-रे में उसके शरीर के भीतर अलग-अलग जगहों पर कई बाहरी वस्तुएं (फारेन बाडी) पाई गईं और उसी के अनुसार उपचार शुरू किया गया।

विशेषज्ञों से परामर्श के बाद, उसे विस्तृत जांच और गहन उपचार के लिए नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर के सर्जरी एवं रेडियोलाजी विभाग में शिफ्ट किया गया। बाद में किए गए सीटी स्कैन में पता चला कि कई बाहरी वस्तुओं ने उसके आंतरिक अंगों, मांसपेशी-हड्डी तंत्र और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाया है। आपातकालीन सर्जरी की गई, जिसके दौरान उसके शरीर से पांच छर्रे (फायरआर्म पेलेट्स) निकाले गए।

घटनास्थल पर पहुंचीं टास्क फोर्स और डॉग स्क्वॉड की टीमें

शावक की मौत के बाद वन विभाग ने शिकारियों तक पहुंचने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। टास्कफोर्स, डीएफओ और श्वान दस्ते की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं और साक्ष्य जुटाए। जांच दल आसपास के क्षेत्र में शिकारियों की गतिविधियों और घटना से जुड़े संभावित सुराग की पड़ताल कर रहा है।

सैटेलाइट कॉलर और ट्रैकिंग के बावजूद कैसे नहीं चला पता?

घटना ने कूनो और आसपास के वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चीते की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ट्रैकिंग टीम और सैटेलाइट कॉलर आइडी का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि निगरानी के बावजूद शावक के घायल होने की जानकारी समय रहते क्यों नहीं मिल सकी और शिकारियों ने वन क्षेत्र में घुसकर गोली कैसे चला दी। इससे पहले इस क्षेत्र में छह तेंदुओं के शिकार की घटना सामने आई थी, जिसमें पर्दाफाश हुआ था कि यहां बड़े स्तर पर शिकारी सक्रिय हैं।

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चीता प्रोजेक्ट को बड़ा झटका

17 सितंबर 2022 को कूनो में चीते छोड़े जाने के बाद से यहां चीतों की मौत व शावकों के जन्म का सिलसिला चलाता रहा है। नामीबिया से आठ, दक्षिण अफ्रीका से 12 और बोत्सवाना से नौ चीतों सहित कुल 29 चीते लाए गए, जबकि वर्तमान में भारत में शावकों सहित चीतों की संख्या 58 है। यह पहली मौत है जिसकी शिकार को लेकर आधिकारिक पुष्टि की गई है, इससे पहले चीतों की मौत बीमारी या हादसे के चलते ही हुई है। ऐसे में चीतों पर शिकारियों की नजर गंभीर खतरा है, क्योंकि आबादी बढ़ने के साथ ही चीतों का विचरण कूनो से बाहर निकलकर श्योपुर-शिवपुरी, मुरैना ग्वालियर के अलावा राजस्थान के जिलों तक में हो रहा है। शिकार की घटना चीता प्रोजेक्ट के लिए बड़ा झटका है।

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