चीता प्रोजेक्ट के 4 साल होते ही आई खुशखबरी... कूनो में जन्मी चीता ने दूसरी बार दिया चार शावकों को जन्म; देश में अब 56 चीते
श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में भारत में जन्मी मादा चीता केजीपी-12 ने चार शावकों को जन्म दिया है, जिससे ...और पढ़ें
HighLights
भारत में जन्मी चीता केजीपी-12 ने चार शावक जन्मे।
इसके साथ ही देश में अब कुल 56 चीते हो गए हैं।
यह चीता पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट की बड़ी सफलता है।
डिजिटल डेस्क, श्योपुर। भारत में चीता पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट के 17 सितंबर को चार साल पूरे होने के एक दिन बाद ही मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से बड़ी खुशखबरी सामने आई है। यहां भारत में जन्मी मादा चीता केजीपी-12 ने चार शावकों को जन्म दिया है। इस नए जन्म के साथ देश में चीतों की कुल संख्या 56 हो गई है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने साझा की जानकारी
केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 'एक्स' पर उनके फोटो-वीडियो पोस्ट कर लिखा कि चार साल, चार नई जिंदगियां - प्रोजेक्ट चीता के लिए यह उम्मीद और सफलता का प्रतीक है।
बता दें, 17 सितंबर, 2022 को नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो में छोड़े जाने के बाद से अब भारत में चीता व शावकों की कुल संख्या 56 हो गई है। इनमें तीन चीते मंदसौर के गांधीसागर अभयारण्य में हैं। यहां जन्मे शावकों की संख्या 36 हो गई है।
विगत अप्रैल में पहली बार बनी थी मां
दक्षिण अफ्रीका से लाई गई गामिनी चीता से जन्मी KGP-12 इससे पहले इसी वर्ष 11 अप्रैल को भी चार शावकों को जन्म दे चुकी है। यह इस प्रोजेक्ट के इतिहास में पहला अवसर था, जब भारत में जन्मी और जंगल में पली-बढ़ी चीता ने खुले जंगल में शावकों को जन्म दिया था। हालांकि 12 मई को चारों शावक मृत मिले थे। उनके शव क्षत-विक्षत मिलने के कारण तेंदुए के हमले में इनकी मौत की आशंका जताई गई थी।
जंगल के इकोसिस्टम में ढले चीते
इसके करीब चार महीने बाद ही केजीपी-12 का प्रजनन जंगल के इकोसिस्टम में चीतों के ढलने का मजबूत संकेत है। इससे पहले आशा चीता द्वारा भारत में जन्मी पहली मादा चीता मुखी भी 20 नवंबर, 2025 को पांच शावकों को जन्म दे चुकी है। मुखी और केजीपी-12 दोनों भारत की दूसरी पीढ़ी की माताएं हैं। मुखी नामीबियाई और केजीपी-12 दक्षिण अफ्रीकी चीता वंश से है।
मां से जोड़कर रखा जाता है शावकों का नाम
चीता प्रोजेक्ट में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों के अलावा मुखी को छोड़कर किसी का विशेष भारतीय नामकरण नहीं किया गया है। ट्रैकिंग के लिए शावकों का नाम उनकी मां और संख्या के आधार पर रखा जाता है। उदाहरण के लिए केजीपी-12 में के- कूनो, जी-गामिनी, पी- प्रोगेनी या पप मतलब संतान या शावक के साथ संख्या 12 को जोड़ा गया है। यानी कूनो में गामिनी की वंशावली की 12वीं संतान।
मां व चारों शावक स्वस्थ मिले हैं। यह बाड़ा क्षेत्र में जन्मे हैं, इसलिए पूरी तरह निगरानी में हैं। भारत में जन्मे चीतों द्वारा लगातार सफल प्रजनन प्रोजेक्ट की बड़ी सफलता है।
- उत्तम शर्मा, मुख्य वन संरक्षक, कूनो नेशनल पार्क, श्योपुर
