बाघों की दहाड़ से चीतों की रफ्तार तक... शिवपुरी-कूनो का यह टूर बना देगा आपकी छुट्टियां यादगार
माधव टाइगर रिजर्व से कूनो नेशनल पार्क तक बना वन्यजीव पर्यटन का ऐसा गलियारा, जहां दो दिन में बाघ और ...और पढ़ें

कूनो में चीते।
HighLights
माधव टाइगर रिजर्व में बाघों की रोमांचक जंगल सफारी का अनुभव।
कूनो नेशनल पार्क में चीतों के संरक्षण प्रयासों का साक्षी बनें।
शिवपुरी-श्योपुर में ऐतिहासिक स्थल और स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लें।
भरत शर्मा, शिवपुरी। कल्पना कीजिए, सुबह की शुरुआत घने जंगल के बीच होती है। चारों ओर पहाड़ियों की हरियाली, झीलों के किनारे पक्षियों का कलरव और सफारी के दौरान यकायक सामने आ जाता है जंगल का धुरंधर बाघ। उसकी एक झलक के लिए थमी पर्यटकों की निगाहें और कैमरों में उस पल को कैद करने की उत्सुकता।
यह रोमांच है मध्य प्रदेश के माधव टाइगर रिजर्व का। अब इसी रोमांच को आगे बढ़ाने के लिए कुछ ही घंटों की यात्रा पर कूनो नेशनल पार्क भी है, जहां जंगल की दुनिया का एक और आकर्षण आपका इंतजार कर रहा है। बाघों की धरती से चीतों के संसार तक का यह सफर वन्यजीव प्रेमियों के लिए यादगार अनुभव बन सकता है।
पहला दिन : बाघों के संसार में रोमांचक सफर
अपनी यात्रा की शुरुआत शिवपुरी से कीजिए। माधव टाइगर रिजर्व पहुंचते ही विंध्य की पहाड़ियों और उनके बीच फैली हरियाली का प्राकृतिक सौंदर्य आपको आकर्षित करेगा। जंगल सफारी के दौरान हर मोड़ पर एक नया दृश्य और हर आहट के साथ वन्यजीवों की मौजूदगी का अहसास रोमांच बढ़ाता है। कहीं चिंकारा हिरणों के झुंड खुले मैदान में अठखेलियां करते दिखेंगे तो कहीं पक्षियों की अलग-अलग प्रजातियां आपका ध्यान खींचेंगी, लेकिन निगाहें उस खास पल की तलाश में रहेंगी, जब जंगल का धुरंधर बाघ सामने आ जाए। उसकी एक झलक, उसकी चाल और जंगल में उसकी बादशाहत को करीब से महसूस करना इस सफर का सबसे रोमांचक अनुभव हो सकता है।
सफारी के बाद सांख्य सागर झील की ओर रुख कीजिए। यहां मगरमच्छों को पानी में आराम करते देखना और प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट सुनना प्रकृति का एक अलग संसार सामने लाता है। पेंटेड स्टार्क, सनबर्ड और बगुलों की विभिन्न प्रजातियां इस क्षेत्र की जैव विविधता को खास बनाती हैं। जंगल के रोमांच के बाद झील के किनारे कुछ सुकून भरे पल बिताना यात्रा को और खूबसूरत बना देता है।
दूसरा दिन : कूनो में चीतों के इतिहास से रूबरू
अगले दिन शिवपुरी से श्योपुर की ओर बढ़िए। कूनो नेशनल पार्क पहुंचकर आपको वन्यजीव संरक्षण के इतिहास का ऐसा अध्याय देखने का अवसर मिलेगा, जो देश के लिए गौरव का विषय है। कभी देश से विलुप्त हो चुके चीतों को फिर भारतीय जंगलों में बसाने की पहल ने कूनो को वैश्विक पहचान दिलाई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर वर्ष 2022 में नामीबिया से चीतों को लाया गया। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते यहां पहुंचे।
आज कूनो में चीतों की संख्या 50 से ऊपर पहुंच चुकी है। इनमें 41 चीते अपने देश की धरती पर जन्मे हैं। उनके कुनबे में जन्मे शावकों को देखना इस संरक्षण प्रयास की सफलता और भविष्य की उम्मीदों से जुड़ने जैसा अनुभव है। यहां सफारी के दौरान खुले जंगल, घास के मैदान और प्राकृतिक परिवेश में चीतों को देखने की उत्सुकता बनी रहती है।
उनकी फुर्ती, तेज चाल और विशिष्ट बनावट उन्हें दूसरे वन्यजीवों से अलग बनाती है। कभी दूर दिखाई देती उनकी आकृति तो कभी जंगल में उनकी गतिविधियां पर्यटकों के लिए रोमांच का कारण बनती हैं। यह अनुभव वन्यजीवों को देखने तक सीमित नहीं रहता, प्रकृति संरक्षण के एक ऐतिहासिक प्रयास का साक्षी बनने का अवसर भी देता है।

जंगल से आगे भी बहुत कुछ है देखने को
इस यात्रा को दो दिनों तक सीमित रखने की जरूरत नहीं है। शिवपुरी में सुल्तानगढ़ और पवा जलप्रपात की खूबसूरती, जार्ज कैसल, माधव विलास पैलेस और संगमरमर से बनी सिंधिया कालीन छतरियां इतिहास और स्थापत्य से रूबरू कराती हैं। नल-दमयंती की पौराणिक कथा से जुड़ा नरवर किला भी देखा जा सकता है। श्योपुर में पालपुर किला और आसपास का प्राकृतिक क्षेत्र यात्रा में एक नया रंग भरते हैं। जंगल के बीच रात बिताने का अनुभव लेना चाहें तो कूनो फारेस्ट फेस्टिवल के दौरान तैयार होने वाली टेंट सिटी भी विकल्प है। नवंबर से जनवरी 2027 तक यहां ठहरने की सुविधा का आनंद लिया जा सकता है।
तीन क्षेत्रों के स्वाद का संगम
शिवपुरी और श्योपुर की यात्रा में खानपान भी एक खास अनुभव है। शिवपुरी में दाल-बाटी-चूरमा, बाजरे की रोटी और बुंदेलखंडी कढ़ी का स्वाद मिलेगा। मीठे में गुड़ और महुआ के पुए चख सकते हैं। श्योपुर पहुंचने पर राजस्थानी जायके के मोटे टिक्कड़ और दाल-बाटी आपका स्वागत करेंगे। इस तरह मध्य प्रदेश, राजस्थान और बुंदेलखंड के स्वाद भी इस यात्रा की यादों का हिस्सा बन जाएंगे।
सफारी की तैयारी और बुकिंग
माधव टाइगर रिजर्व और कूनो नेशनल पार्क में अक्टूबर से जंगल सफारी शुरू हो चुकी है। दोनों स्थानों की आधिकारिक वेबसाइट पर आनलाइन बुकिंग कराई जा सकती है। माधव टाइगर रिजर्व में सफारी वाहन के साथ निजी वाहन से भी भ्रमण का विकल्प उपलब्ध है, जबकि कूनो में सफारी वाहन की बुकिंग करानी होती है।
इस तरह पहुंचें और यहां ठहरें
हवाई मार्ग से आप ग्वालियर अथवा झांसी पहुंच सकते हैं। जहां से बस या टैक्सी से शिवपुरी सहज पहुंचा जा सकता है। कहीं से भी सड़क और रेल मार्ग के जरिये भी शिवपुरी पहुंचा जा सकता है। माधव टाइगर रिजर्व यहां से सात-आठ किलोमीटर की दूरी पर है, जहां के लिए रेलवे स्टेशन व बस स्टैंड से साधन उपलब्ध रहते हैं। निजी वाहन से भी पहुंचा जा सकता है।
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शिवपुरी में ठहरने के लिए माधव टाइगर रिजर्व के पास ही होम स्टे संचालित हैं। एमपी टूरिजस्ट का टूरिस्ट विलेज होटल है। जहां शानदार प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद झील किनारे लिया जा सकता है। थ्री स्टार कैटेगरी के बजट क्लास होटल और लाज भी हैं। कूनो में पालपुर रिसार्ट सहित हेरिटेज होटल उपलब्ध हैं। जंगल के बीच रात का आनंद लेना है तो कूनो टेंट सिटी शानदार विकल्प हो सकता है। कूनो फारेस्ट फेस्टिवल के दौरान विशेष टेंट सिटी तैयार की जाती है। नवंबर से जनवरी 2027 तक टेंट सिटी में ठहरकर जंगल लाइफ का आनंद लिया जा सकता है।
माधव नेशनल पार्क में बाघों और कूनो में चीतों को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं और जंगल सफारी करते हैं। पहाड़ियों के बीच झीलों की खूबसूरती शानदार लगती है। माधव टाइगर रिजर्व घूमने के बाद पर्यटक कूनो में चीतों का दीदार कर सकते हैं। एक अच्छा पर्यटन कारिडोर माधव टाइगर रिजर्व और कूनो का बन रहा है। यहां टिकट भी आसानी से मिल जाता है।
- उत्तम शर्मा, सीसीएफ एवं संचालक नेशनल पार्क
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