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    123 वर्ष बाद भोजशाला को अपनी मां वाग्देवी की प्रतीक्षा, प्रतिमा वापसी के प्रयास होंगे तेज

    Updated: Sat, 23 May 2026 11:06 PM (GMT+05:30)

    धार स्थित भोजशाला में निर्विघ्न पूजा-अर्चना संपन्न होने के बाद अब सबकी निगाहें मां वाग्देवी की प्रतिमा की वापसी पर टिकी हैं, जिसे 1903 में लॉर्ड कर्जन ...और पढ़ें

    123 वर्ष बाद भोजशाला को अपनी मां वाग्देवी की प्रतीक्षा।

    123 वर्ष बाद भोजशाला को अपनी मां वाग्देवी की प्रतीक्षा।

    HighLights

    1. भोजशाला में निर्विघ्न पूजा-अर्चना संपन्न हुई।

    2. मां वाग्देवी प्रतिमा वापसी के प्रयास तेज होंगे।

    3. हाई कोर्ट ने प्रतिमा वापसी के निर्देश दिए।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में शुक्रवार को दिनभर निर्विघ्न पूजा-अर्चना संपन्न होने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली। हालांकि, इस शांति के बीच भोजशाला अब भी अपनी मां वाग्देवी की प्रतीक्षा में है। श्रद्धालुओं और मंदिर पक्ष की निगाहें अब उस क्षण पर टिकी हैं, जब मां वाग्देवी पुनः अपनी धरती पर लौटेंगी।

    बता दें कि वर्ष 1903 में लॉर्ड कर्जन इस प्रतिमा को अपने साथ इंग्लैंड ले गए थे। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 15 मई के अपने निर्णय में स्पष्ट किया था कि लंदन स्थित ब्रिटिश संग्रहालय में संरक्षित मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को भारत लाने के प्रयास किए जाएं। इसके बाद मंदिर पक्ष ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर प्रतिमा की वापसी की मांग भी उठाई है।

    वर्ष 2017 में संग्रहालय ने प्रतिमा लौटाने पर सैद्धांतिक सहमति जताई थी। हालांकि, उसने यह शर्त रखी थी कि प्रतिमा को उसी स्थान पर स्थापित किया जाए, जहां से उसे ले जाया गया था। अब हाई कोर्ट द्वारा भोजशाला को मंदिर स्वरूप में मान्यता दिए जाने के बाद यह बाधा भी खत्म हो गई है।

    बता दें, वर्ष 1875 में ब्रिटिश सरकार के राजनीतिक प्रतिनिधि मेजर जनरल विलियम किंकेड ने भोजशाला परिसर की खोदाई करवाई थी। इस दौरान मुस्लिम शासकों द्वारा वहां गाड़ी गई वाग्देवी की प्रतिमा को बाहर निकाला गया।

    वर्ष 1903 में लॉर्ड कर्जन इस प्रतिमा को अपने साथ ले गए थे। धार की सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि प्रतिमा को लंदन से वापस लाने के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर विशेष प्रयास किए जाएंगे।

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    पूजा व्यवस्था की गाइडलाइन का इंतजार

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने हाई कोर्ट के निर्णय के बाद 16 मई को जारी पत्र में स्पष्ट किया था कि स्थानीय प्रशासन से चर्चा के बाद भोजशाला में पूजा-अर्चना से संबंधित नियम और व्यवस्थाएं तय की जाएंगी। हालांकि, अब तक इस संबंध में कोई औपचारिक गाइडलाइन जारी नहीं हुई है।