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इंदौर के 6 बड़े अस्पतालों के पानी में मिले मल-मूत्र वाले कीटाणु, NABL की जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

Updated: Sat, 22 Aug 2026 10:48 AM (IST)

इंदौर के नौ प्रमुख सरकारी अस्पतालों में से छह के पीने के पानी में ई-कोलाई और कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए ...और पढ़ें

इंदौर के अस्पतालों के पानी में मिले खतरनाक बैक्टीरिया (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

इंदौर के अस्पतालों के पानी में मिले खतरनाक बैक्टीरिया (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

HighLights

  1. छह इंदौर अस्पतालों के पानी में ई-कोलाई, कॉलिफॉर्म मिले।

  2. दूषित पानी नवजात, आईसीयू मरीजों के लिए जानलेवा खतरा।

  3. कूलरों की गंदगी, खराब सिस्टम प्रदूषण का मुख्य कारण।

डिजिटल डेस्क, इंदौर। मध्य प्रदेश के इदौर शहर में स्थित नौ प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर एक विस्तृत पड़ताल की गई। NABL) द्वारा प्रमाणित प्रयोगशाला में कराए गए पानी की जांच के नतीजों में बड़ा खुलासा हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, छह अस्पतालों के पेयजल नमूनों में मानव और पशुओं के मल-मूत्र में पाए जाने वाले खतरनाक जीवाणु ई-कोलाई और कॉलिफॉर्म पाए गए हैं।

इन अस्पतालों के पानी में पाए गए खतरनाक जीवाणु

एमवाय अस्पताल, पीसी सेठी, चाचा नेहरू (बाल चिकित्सालय), सुपर स्पेशिएलिटी, मेंटल हॉस्पिटल तथा जिला अस्पताल के पीने के पानी में गंभीर स्तर का जैविक प्रदूषण दर्ज हुआ है। 'संवेदना एनजीओ' द्वारा संचालित 1000 लीटर क्षमता वाले शोधन तंत्र के बावजूद नमूनों में ई-कोलाई की पुष्टि हुई है।

कूलरों के पास गंदगी और आपातकालीन इकाइयों में प्रणालियों का बंद होना प्रमुख समस्या पाई गई।

चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में नवजात बच्चों के इलाज वाले इस संस्थान में वाटर कूलर के आसपास अस्वच्छता पाई गई और नमूनों में संक्रमण फैला पाया गया।

वहीं, मेंटल हॉस्पिटल व जिला अस्पताल के वाटर कूलर खराब होने के कारण मटकों या लोटों के जरिए असुरक्षित पानी बांटा जा रहा है, जिससे संक्रमण का जोखिम बना हुआ है। पूरे अध्ययन के दौरान केवल एमटीएच, बाणगंगा और एमआरटीबी अस्पताल का पानी ही मानव उपभोग के अनुकूल पाया गया।

शरीर के लिए खतरनाक है ई-कोलाई और कॉलिफॉर्म

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ई-कोलाई व कॉलिफॉर्म युक्त पानी से नवजात शिशुओं, आईसीयू में भर्ती मरीजों और ऑपरेशन कराने वाले व्यक्तियों में जानलेवा आंतरिक संक्रमण फैल सकता है।

क्या बोले अधिकारी?

मामले पर एमजीएम मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारी डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि अस्पताल संक्रमण नियंत्रण समिति (HICC) द्वारा नियमित अंतराल पर पानी के नमूनों का परीक्षण कराया जाता है। किसी भी प्रकार की कमी सामने आने पर संबंधित अस्पताल प्रबंधकों को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए जाते हैं।