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इंदौर में लोकायुक्त का सख्त एक्शन : बयान से मुकरने वाले 21 फरियादियों पर केस, भ्रष्टाचार के मामलों में नया मोड़

Published: Mon, 04 May 2026 04:01 PM (IST)

इंदौर लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार के मामलों में बयान से मुकरने वाले 21 शिकायतकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। ...और पढ़ें

भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त का सख्त एक्शन (प्रतीकात्मक चित्र)

भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त का सख्त एक्शन (प्रतीकात्मक चित्र)

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संक्षेप में पढ़ें

मुकेश मंगल, इंदौर। भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में अब तक गवाह बनने वाले फरियादी ही कई मामलों में कमजोर कड़ी साबित हो रहे थे, लेकिन अब इंदौर में इस पर बड़ा कदम उठाया गया है। लोकायुक्त पुलिस ने उन 21 शिकायतकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है, जो ट्रैप के बाद कोर्ट में अपने बयानों से मुकर गए थे। इन सभी के खिलाफ इश्तगाशा दायर कर उन्हें आरोपित बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह पहली बार है जब लोकायुक्त पुलिस ने फरियादियों को ही कानूनी कटघरे में खड़ा करने का फैसला लिया है।

ट्रैप में साथ, बाद में पाला-बदल

अक्सर देखा गया है कि शिकायतकर्ता ट्रैप के दौरान पूरी मजबूती से साथ देते हैं, लेकिन जैसे ही मामला अदालत में पहुंचता है, वे घूसखोर अफसरों-कर्मचारियों से समझौता कर लेते हैं। नतीजतन, ट्रैप, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और नोट बरामदगी जैसे मजबूत सबूत होने के बावजूद केस कमजोर पड़ जाते हैं और आरोपित बरी हो जाते हैं।

12 साल पुराने मामलों में भी कार्रवाई

लोकायुक्त पुलिस ने करीब 12 साल से लंबित ऐसे 21 मामलों की पहचान की है, जिनमें फरियादी पक्षद्रोही घोषित हुए हैं। इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 383 और आईपीसी की धारा 340-344 के तहत इश्तगाशा पेश की गई है, जिसमें तीन माह की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, झूठी गवाही और न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

बयान बदलने से बरी हुए आरोपित

इन मामलों में कई ऐसे अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हैं जिन्हें लोकायुक्त ने रंगेहाथ पकड़ा था, लेकिन फरियादियों के पलटने से वे कोर्ट से बरी हो गए। इसमें पुलिसकर्मी से लेकर पटवारी, उपयंत्री और अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल हैं।

सख्ती से बदलेगी जांच की दिशा

लोकायुक्त एसपी डॉ. राजेश सहाय के अनुसार, फरियादियों के मुकरने से केस कमजोर पड़ता है और भ्रष्टाचार के आरोपितों को फायदा मिलता है। इसी प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई मामलों में आरोपित अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर फरियादियों पर दबाव बनाते हैं या उन्हें लालच देकर समझौता कर लेते हैं।

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लोकायुक्त की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है, जो भविष्य में ऐसे मामलों की दिशा और परिणाम दोनों बदल सकता है।

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