इंदौर में 'सामूहिक सजा' पर बवाल : MBA के प्रत्येक विद्यार्थी से 300 बार लिखवाया 'नहीं करेंगे नकल'; प्रोफेसर के रवैये पर सवाल
इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के आईएमएस में एमबीए परीक्षा के दौरान नकल के शक पर प्रोफेसर ने पूरी कक्षा ...और पढ़ें

एमबीए छात्रों को दी अनोखी सजा (प्रतीकात्मक चित्र)

समय कम है?
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लोकेश सोलंकी, इंदौर। एमबीए की परीक्षा के दौरान एक-दो छात्रों पर शक हुआ कि वे नकल कर रहे हैं। पर्चा खत्म हुआ तो प्रोफेसर ने पूरी कक्षा के विद्यार्थियों को रोक लिया। प्रत्येक विद्यार्थी से कहा गया कि 300-300 बार लिखकर दें कि मैं नकल नहीं करूंगा (आइ विल नॉट चिटेड अगेन)। घटना देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (IMS) की है। कुछ छात्राएं जब पर्चा खत्म होने के बाद भी घर नहीं पहुंचीं तो परिवार वालों को चिंता हुई। पूरा मामला पता चला तो परिवार वालों ने प्रोफेसर के रवैये की शिकायत इंस्टीट्यूट प्रबंधन को कर दी।
प्रोफेसर ने सभी को घर जाने से रोका
23 मार्च को आईएमएस में एमबीए (फाइनेंशियल एडमिनिस्ट्रेशन) के मार्केटिंग मैनेजमेंट विषय की आंतरिक परीक्षा हुई थी। इस दौरान पर्चा खत्म होने के बाद भी पूरी कक्षा के विद्यार्थियों को प्रो. भानुप्रताप सिंह ने बाहर जाने से रोक दिया। सभी विद्यार्थियों से कहा गया कि वे 300-300 बार लिखकर दें कि आगे से नकल नहीं करेंगे।
छात्रा के भाई ने जताई आपत्ति
विद्यार्थियों ने जब इसके बारे में सवाल किया तो कहा कि कुछ लोगों को नकल करते हुए देखा था, इसलिए पूरी कक्षा को सजा मिलेगी। इसके बाद शाम को एक छात्रा के वकील भाई ने संस्थान में इसकी शिकायत की और आपत्ति ली कि यदि कोई छात्र नकल कर रहा है तो सजा उसे मिलनी चाहिए। सभी विद्यार्थियों को इस तरह न सजा दी जा सकती है न घर जाने से रोका जाना ठीक है।
नए सामूहिक दंड की तैयारी
बताया जा रहा है कि घर पर शिकायत करने के बाद शिक्षक ने कक्षा को फिर से नई सजा देते हुए कहा कि उन्हें बताया जाए कि किसने शिकायत की है। यदि नाम नहीं पता चला तो पूरी कक्षा को 1000 पन्नों का असाइनमेंट लिखने की सजा मिलेगी।
अनोखी सजा और इस पर खड़े हुए विवाद के बाद इस मामले में प्रो. सिंह से दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन नईदुनिया ने बात करने की कोशिश की लेकिन वे उपलब्ध नहीं हुए। दूसरी ओर शिकायत करने वाले वकील अनिमेष परमार ने नईदुनिया से कहा कि मैंने आईएमएस के शिक्षक को जब शिकायत कर आपत्ति ली तो उन्होंने गलत व्यवहार किया। बल्कि बाद में अपने मोबाइल फोन पर भी मेरे फोटो के साथ स्टेटस लगा दिया। अब पूरे मामले पर मैं कानूनी नोटिस भेज रहा हूं।
नकल की कार्रवाई क्यों नहीं
एमबीए की परीक्षा में नकल करने वालों के खिलाफ अनुचित साधनों के प्रयोग के प्रकरण न बनाकर इस तरह की सजा पूरी कक्षा को देने के निर्णय पर सवाल उठ रहे हैं। इस बारे में पूछे जाने पर आईएमएस के निदेशक डॉ. दीपक श्रीवास्तव अब जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि एमबीए की आंतरिक परीक्षा के अंक भी कोर्स की फाइनल मार्कशीट में जुड़ते हैं। कुछ विद्यार्थियों ने इसमें नकल की थी।
इस पर आगे नकल नहीं करने के बारे में लिखने के लिए कक्षा से कहा गया। अब तक मुझे न तो शिक्षक ने रिपोर्ट दी है न कि प्रत्यक्ष तौर पर शिकायत मिली है। तीसरे पक्ष से ही जानकारी मिली है। मैं मामला दिखवा रहा हूं।
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