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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 28, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    फोरमः इंदौर की बेहतरी के 11 सामाधान

    By Gaurav TiwariEdited By:
    Updated: Fri, 28 Sep 2018 07:47 AM (IST)

    इनमें से 11 प्रमुख समस्याएं चिन्हित कर उनके सामधान पर चर्चा की गई। शहर की बेहतरी के लिए समाज, कंपनियों की सीएसआर गतिविधियों के साथ ही शासकीय एजेंसियों ...और पढ़ें

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    इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर की प्रगति के लिए शुरू किए गए ‘माय सिटी माय प्राइड’ अभियान के तहत 86 दिनों तक विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने विचार विमर्श किया। इस दौरान 35 से ज्यादा ऐसी समस्याएं निकलकर सामने आई जिनका समाधान शहर की प्रगति के लिए जरुरी है। इनमें से 11 प्रमुख समस्याएं चिन्हित कर उनके सामधान पर चर्चा की गई। शहर की बेहतरी के लिए समाज, कंपनियों की सीएसआर गतिविधियों के साथ ही शासकीय एजेंसियों के माध्यम से इनके समाधान करने का निश्चय किया गया।

    ये 11 मुद्दे और उनके सामाधान

    1.उपकरणों का आभाव
    शहर की शासकीय डिस्पेंसरियों में उपकरण का अभाव है। स्टॉफ पर्याप्त नहीं होता है। इसलिए सामान्य इलाज भी नहीं मिल पाता।सहायता संस्था सहित अन्य एजेंसियों की सहायता से लोगों को नाममात्र के शुल्क पर मेडिकल उपकरण मुहैया करवाना। शासकीय एजेंसियों से चर्चा कर जहां स्टॉफ की कमी है वहां इसकी पूर्ति के लिए प्रयास।

    2. गरीबों के लिए सस्ता इलाज
    चेरिटेबल अस्पतालों की शहर में सबसे ज्यादा जरूरत है। इलाज के महंगे होने से यह आम आदमी की क्षमता से बाहर हो रहा है। ऐसे में चेरिटेबल अस्पताल मददगार साबित हो सकते हैं। वर्तमान में चल रहे कुछ अस्पतालों को और सुविधा संपन्ना बनाया जाना चाहिए।
    कंपनियों के सीएसआर से चेरिटेबल अस्पतालों को और सुविधा संपन्ना बनाने के लिए जरूरी संसाधन मुहैया करवाए जाएंगे। इनमें एमआरआई, डायलिसिस और सिटी स्कैन जैसी सुविधाएं नाम मात्र के शुल्क पर आम आदमी के लिए उपलब्ध करवाई जाएंगी।

    3. घरेलू कचरे से घरों में खाद बनाना
    सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में थ्री आर के तहत अब घरों में निकलने वाले कचरे का निस्तारण घरो में ही करने की दिशा में काम किया जाना बेहद जरूरी है।
    नगर निगम के साथ मिलकर घरेलू कचरे से घरों में ही खाद निर्माण कर उसका उपयोग घरों के बगीचों या कॉलोनी के बगीचों में इसके इस्तेमाल के लिए प्रेरित करना।

    4. पेड़ करेंगे आबोहवा को साफ
    ओपन स्पेस की शहर में सबसे ज्यादा कमी है। मास्टर प्लान में प्रावधान होने के बाद भी ग्रीन बेल्ट और पार्क आदि विकसित नहीं किए जा सके हैं। कॉलोनियों में काफी खाली जमीन भी है लेकिन वहां पेडों का अभाव है।
    नगर निगम की महापौर मालिनी गौड, इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शंकर लालवानी और एनजीओ की मदद से पौधे लगवाए जाएंगे। साथ ही इन जगहों को पार्कों में तब्दील करने के प्रयास करेंगे।

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    5. पढ़ेगा बचपन, बढ़ेगा बचपन
    शहर के शासकीय स्कूलों में सुविधाओं का अभाव है। जिन स्कूलो में शासन ने भवन बना दिए हैं वहां अन्य सुविधाएं मौजूद नहीं है। इससे विद्यार्थियों को उचित माहौल नहीं मिल पाता।
    विमानपत्तन प्राधिकरण और अन्य संस्थाओं की सहायता से स्कूलों के उन्नायन का प्रयास किया जाएगा। इनके सीएसआर फंड से सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूम, कम्प्यूटर लैब, नया फर्नीचर आदि सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।

    6. छात्रों की होगी काउंसलिंग
    शासकीय स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थी काउंसलिंग की कमी का सामना कर रहे हैं। उन्हें क्या करना है, किस विषय को चुनना है जैसे सवालों के जवाब किसी के पास नहीं होते। निजी काउंसलिंग की फीस इतनी ज्यादा होती है कि निम्न मध्यम वर्ग या गरीब वर्ग वहन नहीं कर पाते हैं।
    निजी काउंसलरों और अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी स्कूलों में समय-समय पर काउंसलिंग सेशन किए जाएं।

    7. ट्रेनिंग से मिलेगा रोजगार
    शहर की अर्थव्यवस्था को बेहतर करने में मददगार उद्योग शहर के बेरोजगारी संकट को भी दूर कर सकते हैं। फिलहाल, इंदौर के आसपास पीथमपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को बेहतर ट्रेनिंग के अभाव में अधिक अवसर नहीं मिल पाते है।
    एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्री, लघु उद्योग भारती संस्था के साथ मिलकर इंजीनियरिंग कॉलेजों में ट्रेनिंग प्रोग्राम करने के साथ ही लघु और मध्यम उद्योगों में स्थानीय युवाओं को रोजगार दिलाने में मदद की जाएगी।

    8. बच्चों को मिलेगी सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग
    बच्चों को सही मार्गदर्शन की जरूरत है, ताकि वे हो रहे किसी अपराध को अपने माता-पिता के साथ शेयर कर सकें। गुड टच, बेड टच को लेकर जागरूक किया जाना जरूरी है।
    ज्वाला और चाइल्ड हेल्पलाइन जैसे संस्थानों के साथ मिलकर शहर के स्कूलों में कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इसमें उन्हें सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

    9. इंड्रस्ट्रियल एरिया में बढ़ेंगी सुविधाएं
    लघु और मध्यम उद्योग सांवेर रोड और तीन इमली-पालदा क्षेत्र में है। सालों से इस क्षेत्र की समस्याएं जस की तस है। पानी और कहीं-कहीं सडकों की परेशानी से ये क्षेत्र जूझ रहे हैं।
    सरकार के साथ-साथ स्थानीय एजेंसियां, नगर निगम, इंविप्रा इन समस्याओं के समाधान में मदद करेंगी।

    10. सुरक्षा का इंतजाम
    सुरक्षा के लिहाज से शहर की टाउनशिप और कॉलोनियों में पुख्ता इंतजाम के प्रयास बगैर शासकीय एजेंसियों पर निर्भर रहे किए जा सकते हैं। इससे यहां सेफ्टी की सही व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
    पुलिस के साथ मिलकर सुरक्षा की गाइड लाइन बनाई जाएगी ताकि, टाउनाशिप की सुरक्षा के लिए मानक तय किए जा सके।

    11. साइबर सेफ्टी पर ट्रेनिंग
    साइबर क्राइम सबसे बड़ी चुनौती है। लोग गेजेट्स का इस्तेमाल तो करते हैं लेकिन ज्यादातर लोग सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हैं और अपराधियों के चंगुल में फंस जाते हैं।
    साइबर एक्सपर्ट, पुलिस अधिकारी, पूर्व पुलिस अधिकारी स्कूल-कॉलेजों में पहुंचकर लाइव डेमो के माध्यम से सुरक्षित ट्रांजिक्शन, सोशल मीडिया का सुरक्षित इस्तेमाल कैसे किया जाए की जानकारी देंगे।