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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 18, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    माय सिटी माय प्राइडः नई पीढ़ी के भविष्य को 'उड़ान' देने की कोशिश

    By Nandlal SharmaEdited By:
    Updated: Tue, 18 Sep 2018 06:00 AM (IST)

    खुद सबकुछ डिजाइन करके 2009 में सोनिया हजेला ने 45 बच्चों के साथ प्री-प्राइमरी स्कूल की शुरुआत की थी। ...और पढ़ें

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    18 साल तक अलग-अलग स्कूलों में काम करने के बाद यह अहसास हुआ कि बड़ी कक्षाओं के विद्यार्थियों में जिस तरह की कम्युनिकेशन स्किल्स, व्यक्तित्व और आत्मविश्वास होना चाहिए, वह नहीं है, क्योंकि उन्हें छोटी कक्षाओं में जिस तरह की शिक्षा मिलनी चाहिए, वैसी नहीं मिल पा रही है। सिर्फ किताबी ज्ञान से कुछ नहीं होता, क्योंकि आज जो पढ़ा रहे हैं वह 10-15 साल बाद कितना महत्व का रह जाएगा, यह देखकर आज तैयारी करनी होगी। ज्यादा फीस लेने वाले बड़े स्कूल भी बच्चों की स्किल्स पर ध्यान नहीं देते हैं।

    इसी सोच के साथ खुद सबकुछ डिजाइन करके 2009 में सोनिया हजेला ने 45 बच्चों के साथ उड़ान प्री-प्राइमरी स्कूल की शुरुआत की थी। हर साल एक-एक करके कक्षाएं बढ़ानी शुरू की और आज वही स्कूल सातवीं तक के 300 से अधिक बच्चों को नाम मात्र के शुल्क पर पर शिक्षा प्रदान कर रहा है। स्कूल की 35 फ्रेंचाइजी भी हैं।

    उड़ान की डायरेक्टर सोनिया बताती हैं कि फीस कम रखने का मकसद यही था कि शिक्षा की पहुंच निचले तबके के लोगों तक भी हो। सस्ता होने का मतलब हमेशा खराब होना नहीं होता है। हालांकि हमें पालकों को शुरू में यही समझाने में काफी समय लग गया। फीस कम होने के बाद भी बच्चों को क्वालिटी शिक्षा देने में किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाता।

    अन्य स्कूलों में स्टाफ के बच्चों को कुछ प्रतिशत फीस में रियायत दी जाती है, लेकिन हमारे यहां स्टाफ के बच्चों की पूरी फीस माफ की गयी है। सोनिया अपने यहां और आसपास काम करने वालों, सब्जीवालों आदि के परिवार की देखरेख भी करती हैं। साल में तीन बार इन्हें गेहूं उपलब्ध करवाती हैं। जरूरतमंदों को समय-समय पर कपड़े, स्वेटर आदि भी उपलब्ध कराए जाते हैं।

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    हाल ही में स्कूल के बच्चों से ईको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियों का निर्माण कराया गया। इनकी प्रदर्शनी लगाकर बिक्री की गई। इससे 21 हजार रुपए की आमदनी हुई, जिसे आदिवासी लड़कियों की शिक्षा के लिए दिया गया। सोनिया कहती हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में काम करना चुना ही इसलिए कि नई पीढ़ी के बेहतर भविष्य में जितना हो सके, योगदान दे सकूं। पैसा कमाने के उद्देश्य से तो दूसरे भी कई काम किए जा सकते हैं।

    - सोनिया हजेला, डायरेक्टर, उड़ान