विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

42 नरकंकालों के बाद 88 साल से दफन है रहस्य! अब उज्जैन की वैश्य टेकरी फिर उगलेगी इतिहास; ASI ने भेजा खोदाई का प्रस्ताव

Published: Sun, 06 Sep 2026 08:18 PM (IST)

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने उज्जैन की वैश्य टेकरी की फिर से खोदाई का प्रस्ताव भेजा है, जहां 1938 में बौद्धकालीन ...और पढ़ें

कुम्हार टेकरी और वैश्य टेकरी की खोदाई में मिले थे नरकंकाल।

कुम्हार टेकरी और वैश्य टेकरी की खोदाई में मिले थे नरकंकाल।

HighLights

  1. ASI ने उज्जैन की वैश्य टेकरी की खोदाई का प्रस्ताव भेजा।

  2. 1938 में 42 बौद्धकालीन नरकंकाल और सामग्री मिली थी।

  3. आधुनिक तकनीकों से अध्ययन कर इतिहास उजागर करने की मंशा।

डिजिटल डेस्क, उज्जैन। वर्ष 1938 में जब उज्जैन के उंडासा क्षेत्र की कुम्हार टेकरी और वैश्य टेकरी पर ग्वालियर स्टेट के तत्कालीन पुरातत्वविद् डा. एमबी गर्दे ने खोदाई शुरू की, तो दोनों स्थानों पर अलग-अलग अवस्थाओं में 42 नरकंकाल और प्राचीन सामग्री मिली।

बौद्धकाल के बताए जाते हैं कंकाल

सभी नरकंकाल बौद्धकाल के बताए जाते हैं। इसके साथ ही मृदभांड, पंचमार्क मुद्राएं और अन्य पात्र मिले थे। सिक्के तांबे के थे। ये सभी अवशेष कोलकाता स्थित भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण के म्यूजियम में भेजे गए थे। वहां आज भी सुरक्षित हैं।

इसके बाद से अब तक इस क्षेत्र में दोबारा खोदाई नहीं हुई, लेकिन अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के भोपाल मंडल ने इस स्थल की खोदाई का प्रस्ताव केंद्र को भेजा है। ऐसे में, इस स्थान का इतिहास फिर सामने आ सकता है।

sand utensils 854748

खोदाई से खुलेंगे राज

भोपाल मंडल के अधीक्षक पुरातत्वविद् शिवाकांत वाजपेयी ने बताया कि वैश्य टेकरी की खोदाई का प्रस्ताव केंद्रीय मुख्यालय को भेजा है। कुम्हार टेकरी भी इसके पास है। वैश्य टेकरी की खोदाई होने पर कुम्हार टेकरी से संबंधित जानकारी भी मिल सकती है। दोनों के बीच कोई संबंध है तो वह भी समझ में आएगा।

वहीं, कुम्हार टेकरी और वैश्य टेकरी के आसपास के स्थानीय लोगों का कहना है कि 1938 में खोदाई के दौरान जमीन से जहरीली गैस निकलने के कारण कई मजदूर बेहोश हो गए थे, जिसके बाद खोदाई बंद कर दी गई। अब वैश्य टेकरी के आसपास करीब 40 वर्षों से खेती की जा रही है।

skelation in ujjain 8596

बैठे हुए, उल्टे लेटे हुए कंकाल

वर्ष 2007 में इस संबंध में कार्य कर चुकी डेक्कन कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, पुणे की एसोसिएट प्रोफेसर डा. वीणा मुशरीफ त्रिपाठी ने बताया कि पुरातत्व संबंधी खोजों और कंकालों के आधार पर कहा जा सकता है कि ये लोग संभवतः अलग-अलग समुदायों से थे। कंकाल अलग-अलग स्थितियों में मिले हैं, जैसे बैठे हुए, पीठ के बल या उल्टे लेटे हुए और पैर मुड़े हुए।

खोदाई की रिपोर्ट से पता चलता है कि लोग शवों को दफनाने और संभवतः दाह-संस्कार के अलग-अलग तरीकों का पालन करते थे। इनमें बच्चे और वयस्क दोनों तथा स्त्री-पुरुषों के कंकाल मिले हैं।

skelation in ujjain 8595

बौद्ध स्मारक है वैश्य टेकरी

उज्जैन में तराना रोड पर स्थित वैश्य टेकरी बौद्ध समुदाय के लिए किसी तीर्थ स्थान से कम नहीं है। उज्जैन पर शोधपूर्ण लेखन करने वाले 90 वर्षीय वरिष्ठ लेखक रमेश दीक्षित ने अपनी पुस्तक 'उज्जयिनी : अक्षर ऐश्वर्य' में इसका उल्लेख किया है। उनके अनुसार यह टेकरी मौर्यकालीन स्तूप के भग्नावशेषों को मिट्टी से ढके हुए है। यह बौद्धकालीन पुरा-संपदा केंद्रीय पुरातत्व विभाग के सीधे नियंत्रण में है।

यह भी पढ़ें- जलती चिता के पास आपत्तिजनक वीडियो बना मुसीबत, किन्नर अघोरी को उज्जैन से निष्कासित करने की उठी मांग

फिर से अध्ययन करने की जरूरत

एन्थ्रोपोलॉजी (मनुष्य जाति का विज्ञान) के नजरिए से इस सामग्री का फिर से अध्ययन करने की बहुत ज़रूरत है। नई और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करने की भी ज़रूरत है, ताकि उन्हें कालक्रम के अनुसार व्यवस्थित किया जा सके।
- प्रोफेसर (डॉ.) वीणा मुशरीफ त्रिपाठी, डेक्कन कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, पुणे

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।