क्रूज हादसा : रेस्क्यू टीम नदारद, नाम की लाइफ जैकेट और सिस्टम फेल... बरगी में हो रही थी सुरक्षा नियमों की खुली अनदेखी
वाटर स्पोर्ट्स गतिविधि के दौरान एक रेस्क्यू टीम अलर्ट मोड में हर वक्त तैनात होती है, जो बरगी में नहीं थी। हादसे की नाकामी छुपाने में जुटे पर्यटन विभाग के अधिकारी।

बरगी क्रूज हादसा।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
पंकज तिवारी, जबलपुर। बरगी में 30 अप्रैल को हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने मप्र पर्यटन निगम की मध्य प्रदेश पर्यटन निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वाटर स्पोर्ट्स और क्रूज संचालन के दौरान जिन सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है, उनका खुलेआम उल्लंघन हो रहा था। क्रूज हादसे में भी यह सामने आया कि अधिकांश पर्यटक को लाइफ जैकेट नहीं मिली। क्रूज में लाइफ सेवर भी पर्याप्त नहीं थे। सिर्फ यहीं नहीं, कम्युनिकेशन सिस्टम भी फेल नजर आया। ऐसी कई खामियां प्रारंभिक स्तर पर दिखीं, जिस वजह से क्रूज में फंसे पर्यटकों को समय पर नहीं बचाया जा सका।
गाइडलाइन का पालन नहीं
क्रूज संचालन की गाइडलाइन में साफ है कि वाटर स्पोर्ट्स गतिविधि के दौरान एक रेस्क्यू टीम अलर्ट मोड में हर वक्त तैनात रहेगी, जो बरगी में कहीं नहीं थी। वीडियो फुटेज में साफ दिखाई देता है कि जब नाव में पानी भरने लगा, तब घबराए पर्यटकों को आनन-फानन में जैकेट बांटी जा रही थी। कई जैकेट सीलबंद थीं और यात्रियों के साइज के अनुसार भी नहीं थीं। दिल्ली से आई एक महिला अपने मासूम बेटे को सीने से चिपकाए रही, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा के अभाव में दोनों की जान नहीं बच सकी।
ये हैं एनआईडब्ल्यूएस के मापदंड
आपरेटर की योग्यता, लाइफ सेविंग टेक्निक्स- वाटर स्पोर्ट्स सेंटर के सभी कर्मचारी जो सीधे संचालन में शामिल हैं, उनके पास एनआईडब्ल्यूएस से लाइफ सेविंग टेक्निक्स सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है। जो कर्मचारी सीधे शामिल नहीं हैं (जैसे वेटर, रिसेप्शनिस्ट, सफाई कर्मचारी), उनके लिए फर्स्ट एड और सीपीआर ट्रेनिंग होना वांछनीय है, ताकि आपात स्थिति में मदद कर सकें।
हकीकत- मप्र पर्यटन निगम में जल क्रीड़ा सलाहकार राजेंद्र निगम के अनुसार वाटर स्पोटर्स से जुड़े कर्मचारियों के पास पर्याप्त अनुभव और प्रमाण पत्र है। जबकि क्रूज में सवार लोगों के हिसाब से मौके पर स्टाफ और फर्स्ट एड उपलब्ध नहीं था।
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पावरबोट हैंडलिंग (पीबीएच)- सभी पावरबोट/वाटर स्कूटर/जेट स्की ड्राइवर के पास एनआईडब्ल्यूएस का पीबीएच सर्टिफिकेट या अंतरराष्ट्रीय संस्था जैसे आरवायए (रायल ऐचिंग एसोसिएशन) का प्रमाणपत्र होना चाहिए।
सर्टिफिकेट की वैधता- सभी सर्टिफिकेट दो साल के लिए मान्य होते हैं उसके बाद इन्हें रिन्यू कराना जरूरी है
हकीकत- वाटर स्पोर्ट्स में लगे अधिकांश कर्मचारियों के पास वैध प्रमाण पत्र नहीं है। कई के प्रमाण पत्र को रिन्यू नहीं कराया गया है।
नजर से बाहर नहीं- कोई भी बोट रेस्क्यू टीम की नजर से बाहर नहीं जानी चाहिए।
हकीकत- वोट संचालन स्थल के पास कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन रेस्क्यू टीम की तरह अलर्ट नहीं थे।
रेस्क्यू इंतजाम- पूरे आपरेशन के दौरान एक रेस्क्यू वोट हमेशा तैयार रहनी चाहिए। इसमें कम से कम 10 एचपी इंजन (ओबीएम) होना चाहिए। एक लुकआउट (निगरानी करने वाला) हमेशा स्टेंडबाय पर होना चाहिए। रेस्क्यू टीम को किसी अन्य काम में नहीं लगाया जाना चाहिए।
हकीकत- वाटर स्पोर्ट्स में लगे सभी कर्मचारी कार्य करते हैं, लेकिन रेस्क्यू टीम अलर्ट मोड में नहीं थी। न ही वोट पर विशेष तरह से किसी ने निगरानी रखी हुई थी।
संचालन समय- क्रूज संचालन केवल दिन के समय (दिन की रोशनी) में ही की जानी चाहिए
हकीकत- क्रूज जब हादसे का शिकार हुआ उस वक्त कई पर्यटकों ने अपने स्वजन को फोन लगाया था, जिसके अनुसार 6.07 बजे तक वोट में पानी भरना शुरू हो गया था।
संचालन के निर्देश- हर यात्री के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य। जैकेट सही साइज की हो। शरीर पर टाइट फिट हो। सभी बेल्ट/क्लिप बंद हों।
हकीकत- हर यात्री ने लाइफ जैकेट नहीं पहना हुआ था। हादसे के समय, कुछ लाइफ जैकेट सील पैक थी, जिन्हें आनन-फानन में खोलकर दिया गया। इसके अलावा लोगों के साइज के हिसाब से भी लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं थी।
