जहां कभी था दस्युओं का खौफ, वहां अब ‘लाइट-कैमरा-एक्शन’ की गूंज; 'हनुमान अंश' की सफलता ने बढ़ाया चित्रकूट की वादियों का आकर्षण
चित्रकूट, जो कभी डकैतों के आतंक के लिए जाना जाता था, अब फिल्मों की शूटिंग का केंद्र बन गया है। ...और पढ़ें

चित्रकूट में रेल पटरी के पास 'हनुमान अंश' की शूटिंग के दौरान के दृश्य।
HighLights
चित्रकूट दस्यु आतंक से मुक्त होकर फिल्म शूटिंग का केंद्र बना।
'हनुमान अंश' की अधिकांश शूटिंग चित्रकूट की मनोरम वादियों में हुई।
स्थानीय कलाकारों को बड़े पर्दे पर अभिनय का सुनहरा अवसर मिला।
शिवम कृष्ण त्रिपाठी, सतना। चित्रकूट की पहचान कभी प्रभु श्रीराम की तपोभूमि के रूप में थी, लेकिन बाद में यह धर्मनगरी दुर्दांत डकैतों के आंतक की भी गवाह बनी। यहां के जंगलों में शरण लेकर दस्युओं ने आतंक का साम्राज्य बनाए रखा। हालांकि 2018 के बाद हालात बदले और डकैतों का सफाया हुआ, तो चित्रकूट की तस्वीर भी बदल गई। अब चित्रकूट के इन्हीं जंगलों में लाइट, कैमरा व एक्शन सुनाई दे रहा है।
'हनुमान अंश' की अधिकांश शूटिंग यहीं
इन दिनों देशभर में भक्ति की अलख जगा रही फिल्म 'हनुमान अंश' की 90 प्रतिशत शूटिंग चित्रकूट की पावन धरा व आसपास के जंगल में हुई है। चित्रकूट की मनोरम घाटियां, प्राकृतिक हरियाली और सुंदरता अब पर्दे पर नजर आने लगी है। इसके साथ ही गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन पर बन रही 'राम-बोला' व अन्य कुछ फिल्मों की शूटिंग भी चित्रकूट में होने वाली है।
स्थानीय कलाकारों को भी मिली बड़े पर्दे पर पहचान
'हनुमान अंश' में चांद चोर का अभिनय करने वाले अभिषेक मिश्रा बताते हैं कि इस फिल्म के जरिए चित्रकूट के बहुत से स्थानीय कलाकारों को बड़े पर्दे पर पहचान मिली है। ये कलाकार ऐसे हैं, जिन्होंने कभी अभिनय नहीं किया था। प्रमोद वन चित्रकूट में रहने वाले बच्चों में पार्थ मिश्रा, पीहू मिश्रा, भरत सिंह, लक्ष्य, राज मौर्या के साथ स्थानीय कलाकारों में हरिओम सिंह रतलू के रोल में, अमृता सिंह ने छोटी मंगला का रोल अदा किया है।
अभिषेक मिश्रा बताते हैं कि वह बीते सात वर्षों से अभिनय की दुनिया में अपना करियर बनाने में जुटे थे। वापस चित्रकूट में रहने आ गए। एक दिन 'हनुमान अंश' का पोस्टर देखा, जिसमें फिल्म के लिए स्थानीय लोग चाहिए थे। जब सेट पर पहुंचे तो टीम को उनका अभिनय इतना पसंद आया कि चांद चोर के रोल को फिल्म में बढ़ा दिया।
