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दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन को HC में चुनौती, हलफनामे में 35 साल पुराने केस की जानकारी छुपाने का आरोप

Published: Tue, 22 Sep 2026 08:30 PM (IST)

दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप है ...और पढ़ें

विधायक घनश्याम सिंह। (फाइल फोटो)

विधायक घनश्याम सिंह। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन को हाई कोर्ट में चुनौती मिली।

  2. चुनावी शपथपत्र में 1991 के आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई गई।

  3. भाजपा नेता दीपक बेलपत्री ने याचिका दायर कर आरोप लगाए।

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। भाजपा नेता और अधिवक्ता दीपक बेलपत्री ने याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि जुलाई 2026 में हुए दतिया विधानसभा उपचुनाव के दौरान दाखिल चुनावी शपथपत्र में वर्ष 1991 में दर्ज एक आपराधिक प्रकरण की जानकारी का उल्लेख नहीं किया गया।

याचिका के अनुसार, वर्ष 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में हुए विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम के दौरान अलग-अलग स्थानों पर एफआईआर दर्ज की गई थीं। याचिकाकर्ता का दावा है कि इनमें से एक प्रकरण में करीब 22 लोगों के नाम दर्ज थे और घनश्याम सिंह का नाम भी उसमें शामिल था।

शपथपत्र में दो लंबित केस घोषित करने का दावा

याचिकाकर्ता ने 1991 के कथित प्रकरण को चुनावी शपथपत्र में शामिल नहीं किए जाने को निर्वाचन से जुड़ा महत्वपूर्ण तथ्य बताया है। हालांकि उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार, घनश्याम सिंह ने उपचुनाव के दौरान दाखिल शपथपत्र में दो लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी घोषित की थी। इनमें कोतवाली दतिया से संबंधित प्रकरण भी शामिल हैं।

अब न्यायालय के समक्ष मुख्य सवाल यह होगा कि वर्ष 1991 के कथित प्रकरण की जानकारी चुनावी शपथपत्र में देना कानूनी रूप से आवश्यक था या नहीं। साथ ही, यदि इसका उल्लेख जरूरी था तो इसका निर्वाचन की वैधता पर क्या प्रभाव पड़ता है, यह भी न्यायिक प्रक्रिया में तय होगा।

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30 जुलाई को हुआ था मतदान, 3 अगस्त को आया परिणाम

दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई 2026 को मतदान हुआ था, जबकि 3 अगस्त को परिणाम घोषित किए गए। परिणाम में कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों के अंतर से हराया था।

अब उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई होगी। मामले में अदालत के समक्ष रखे गए दस्तावेजों और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

वर्ष 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद आंदोलन और प्रदर्शन हुए थे। इस मामले में कोई केस दर्ज होने या कोर्ट में चालान पेश किए जाने जैसी जानकारी कभी सामने नहीं आई। यदि इस मामले में पुलिस चालान पेश करती या केस दर्ज किया होता तो  संज्ञान में आता। ऐसे में इसका शपथ पत्र में उल्लेख करना आवश्यक नहीं था।
- घनश्याम सिंह, कांग्रेस विधायक।