करंट से साथी की मौत, 48 घंटे तक जंगल में अकेला भटकता रहा हाथी ‘भरत’; चार हाथियों ने ऐसे रचा रेस्क्यू ऑपरेशन
मलकपुर में साथी हथिनी की करंट लगने से मौत के बाद 48 घंटे तक जंगल में भटक रहे हाथी 'भरत' ...और पढ़ें

मौके पर मौजूद डीएफओ एवं स्थानीय लोग। (सौजन्य इंटरनेट मीडिया)
HighLights
साथी हथिनी की करंट लगने से मौत के बाद भरत 48 घंटे भटका।
वन विभाग ने कुमकी हाथियों की मदद से भरत को सुरक्षित रेस्क्यू किया।
हाथी भरत को बेहोश कर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व भेजा गया।
डिजिटल डेस्क, रीवा। मलकपुर में करंट लगने से साथी हथिनी की मौत के बाद जंगल में भटक रहे हाथी ‘भरत’ का 48 घंटे बाद रेस्क्यू कर लिया गया। भरत को पकड़ने के लिए वन विभाग ने कुमकी हाथियों की मदद ली। चार पालतू हाथी—रामा, सूर्या, चित्रा और बापू—भरत को सुरक्षित पकड़ने के अभियान का अहम हिस्सा बने।
साथी की मौत के बाद भरत दो दिन तक जंगल में अकेला घूमता रहा। कभी वह खेतों के आसपास नजर आया तो कभी पहाड़ी इलाके में चला गया। वन विभाग की टीम ड्रोन और रेडियो कॉलर की मदद से लगातार उसकी लोकेशन पर नजर बनाए हुए थी।
कुमकी हाथियों को देखकर भरत खुद पहुंचा पास
सोमवार देर रात वन विभाग की टीम ने रामा, सूर्या, चित्रा और बापू को जंगल के एक हिस्से में खड़ा किया। कुछ देर बाद भरत की नजर इन हाथियों पर पड़ी। वह तेजी से उनकी ओर बढ़ा और उनके पास पहुंचकर सूंड से सूंड मिलाने लगा।
वनकर्मियों ने भरत के कुमकी हाथियों के करीब आने के इसी दौरान उसे नियंत्रित करने की रणनीति अपनाई। सावधानी से उसे हल्का ट्रैंकुलाइजर (डॉट) दिया गया। कुछ ही मिनट में भरत बेहोश हो गया।
इसके बाद कुमकी हाथियों की मदद से उसे सुरक्षित घेरे में लिया गया। पूरी कार्रवाई के दौरान डीएफओ लोकेंद्र निरापुरे समेत रीवा, मऊगंज और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारी, वन्यजीव चिकित्सकों की टीम और बड़ी संख्या में वनकर्मी मौके पर मौजूद रहे।
रातभर चला ऑपरेशन, सुबह बांधवगढ़ रवाना
भरत को सुरक्षित नियंत्रित करने के बाद वन विभाग ने उसे ट्रक में लोड किया। रातभर चली कार्रवाई के बाद अलसुबह उसे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के लिए रवाना किया गया। यहां उसे बाड़े में रखकर स्वास्थ्य और व्यवहार की निगरानी की जाएगी।
250 किमी से ज्यादा का सफर तय कर चुका था भरत
बताया गया है कि भरत और उसकी साथी हथिनी वर्ष 2018 में छत्तीसगढ़ से आए हाथियों के झुंड का हिस्सा थे। दोनों बांधवगढ़ से निकलकर रीवा और मऊगंज होते हुए उत्तर प्रदेश के मीरजापुर और प्रयागराज तक 250 किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर चुके थे।
वापसी के दौरान मलकपुर में खेत के पास लगे खुले बिजली तार की चपेट में आने से हथिनी की मौत हो गई थी। साथी को खोने के बाद भरत उसी इलाके के आसपास भटक रहा था। आखिरकार वन विभाग ने कुमकी हाथियों की मदद से उसे सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।
