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MP में होगा जंगली भैंसों का पुनर्स्थापन, काजीरंगा से आए मेहमान, CM मोहन यादव मंगलवार को कान्हा रिजर्व के बाड़े में छोड़ेंगे

Updated: Mon, 27 Apr 2026 09:12 PM (IST)

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव असम के काजीरंगा से लाए गए चार भैंसों को कान्हा रिजर्व के बाड़े में छोड़ेंगे। यह पहल मप्र में विलुप्त हो चुकी इस प्रजाति की पुनर्स्थापना और जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण कदम है।

जंगली भैंसा (फाइल फोटो)

जंगली भैंसा (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। बाघ और तेंदुओं के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व अब एक और खास आकर्षण का गवाह बनने जा रहा है। यहां पर्यटकों को जल्द ही जंगली भैंसों का दीदार भी हो सकेगा। मध्य प्रदेश सरकार ने विलुप्त हो चुके इस प्रजाति की पुनर्स्थापना की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

चार जंगली भैंसों को छोड़ेंगे सीएम

मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सूपखार रेंज में विशेष रूप से तैयार 150 हेक्टेयर के बाड़े में काजीरंगा नेशनल पार्क से लाए गए चार जंगली भैंसों को छोड़ेंगे। करीब 2000 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर ये वन्यप्राणी कान्हा पहुंचे हैं, जहां उन्हें ‘सॉफ्ट रिलीज’ प्रक्रिया के तहत बसाया जाएगा।

जैव विविधता के लिए अहम कदम

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह पहल न केवल जंगल की जैव विविधता को समृद्ध करेगी, बल्कि आनुवांशिक विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पर्यावरणविद अभय कोचर बताते हैं कि वर्ष 1979 से पहले मध्य प्रदेश, खासकर बालाघाट क्षेत्र में जंगली भैंसों की अच्छी संख्या थी, लेकिन समय के साथ ये पूरी तरह विलुप्त हो गए। चूंकि यह प्रजाति दलदली क्षेत्रों को पसंद करती है, इसलिए कान्हा का भू-भाग इनके लिए अनुकूल माना गया है।

एक साल निगरानी, फिर खुले जंगल में प्रवेश

कान्हा प्रबंधन इन भैंसों पर लगभग एक वर्ष तक कड़ी निगरानी रखेगा। इसके बाद इन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाएगा, जहां पर्यटक भी इनके दर्शन कर सकेंगे। योजना के पहले चरण में चार भैंसों को बसाया जा रहा है, जबकि अगले पांच वर्षों में हर साल 10-10 की संख्या में कुल 50 वनभैंसों को यहां लाने की योजना है।

ऐतिहासिक सहयोग और भविष्य की योजना

इस परियोजना को सफल बनाने में असम सरकार का भी अहम सहयोग रहा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के साथ समन्वय से यह पहल साकार हुई है। पहले बैच में आए चार भैंसों में तीन मादा और एक नर शामिल हैं, जबकि मानसून से पहले आठ और भैंसों को लाने की तैयारी है।

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क्वारंटाइन से ‘सॉफ्ट रिलीज’ तक का सफर

काजीरंगा के विभिन्न हिस्सों से पकड़े गए किशोर जंगली भैंसों को पहले एक हेक्टेयर के विशेष बाड़े में क्वारंटाइन किया गया। सभी स्वास्थ्य प्रोटोकॉल पूरे करने के बाद 25 अप्रैल को इनका स्थानांतरण शुरू हुआ और 28 अप्रैल को ये कान्हा पहुंचेंगे। यहां इन्हें नियंत्रित वातावरण में ‘सॉफ्ट रिलीज’ के जरिए नए आवास में ढाला जाएगा।