मऊगंज में जल जीवन मिशन में 3.85 करोड़ का खेल! परीक्षण में ढही टंकी, 740 नल कनेक्शन कागजों में; 3 इंजीनियरों और ठेकेदार पर FIR
मऊगंज में जल जीवन मिशन के 3.85 करोड़ रुपये के काम में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जिसमें EOW ...और पढ़ें

मऊगंज में पानी की टंकी जो टेस्टिंग में ही ढह गई। (फाइल फोटो)
HighLights
जल जीवन मिशन में 3.85 करोड़ के भ्रष्टाचार का खुलासा।
EOW ने तीन इंजीनियरों और ठेकेदार पर मामला दर्ज किया।
पानी भरने पर टंकी ढही, 740 नल कनेक्शन कागजों में।
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में जल जीवन मिशन के 3.85 करोड़ रुपये के काम में कथित भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) रीवा ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के तीन इंजीनियरों और ठेकेदार के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। जांच में कई गांवों में काम अधूरा मिलने के साथ ऐसे नल कनेक्शन और निर्माण भी सामने आए, जो रिकॉर्ड में पूर्ण बताए गए थे।
ईओडब्ल्यू के अनुसार वर्ष 2021-22 में जल जीवन मिशन के तहत नईगढ़ी ब्लॉक के खटखरी, करह उर्फ खैरागढ़, शिवराजपुर, जुड़मनिया और रघुनाथ समेत कई गांवों में ओवरहेड टैंक, संपवेल, पाइपलाइन और घर-घर नल कनेक्शन के काम स्वीकृत किए गए थे।
इन कार्यों के लिए मेसर्स शिवेंद्र कुमार तिवारी को सबसे कम 4.26 प्रतिशत दर पर 3 करोड़ 85 लाख 900 रुपये का कार्यादेश दिया गया। विभागीय रिकॉर्ड में काम पूरा दर्शाकर ठेकेदार को पूरी राशि का भुगतान भी कर दिया गया। शिकायत के बाद EOW और तकनीकी टीम ने जब मौके पर पहुंचकर जांच की तो रिकॉर्ड और जमीन पर काम की स्थिति में बड़ा अंतर सामने आया।
पहली बार पानी भरते ही गिर गई टंकी
जांच में खटखरी गांव में बनी करीब 30 फीट ऊंची पानी की टंकी को लेकर गंभीर तथ्य सामने आए। मार्च 2026 में टंकी में पहली बार पानी भरा गया तो वह भरभराकर गिर गई। उस समय पास में सो रहा जेसीबी चालक बाल-बाल बच गया।
ग्रामीणों ने टंकी के निर्माण में मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया। उनका दावा है कि इसमें महज आठ एमएम के सरिए का इस्तेमाल किया गया था। तकनीकी जांच में भी निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे।
740 नल कनेक्शन का दावा, घरों में टोंटियां तक नहीं
करह उर्फ खैरागढ़ में योजना के तहत पांच मोटर पंप लगाए जाने का प्रावधान था, लेकिन निरीक्षण के दौरान मौके पर केवल एक मोटर मिली। रिकॉर्ड में 740 घरेलू नल कनेक्शन का दावा किया गया था, जबकि जांच टीम को किसी भी घर में नल की टोंटी और फिटिंग नहीं मिली। यहां कंक्रीट स्टैंड पोस्ट भी नहीं बनाए गए थे।
शिवराजपुर और जुड़मनिया में ओवरहेड टैंक और संपवेल का काम अधूरा मिला। मुख्य पाइपलाइन भी आधी बिछाकर छोड़ दी गई थी। वहीं अन्य गांवों में पाइपलाइन सिर्फ गांव की सीमा तक पहुंची थी, जबकि घरों के भीतर कनेक्शन नहीं दिए गए थे।
बिना गुणवत्ता जांच कर दिया पूरा भुगतान
EOW की जांच में आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने गुणवत्ता परीक्षण और कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र के बिना ही भुगतान कर दिया। जांच एजेंसी ने इसे शासकीय राशि के दुरुपयोग और आपराधिक साजिश से जोड़ते हुए मामला दर्ज किया है।
इस मामले में तत्कालीन कार्यपालन यंत्री जेपी द्विवेदी, तत्कालीन सहायक यंत्री संजय पांडेय और एपी तिवारी तथा ठेकेदार शिवेंद्र कुमार तिवारी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
पहले भी विवादों में रही नल-जल योजना
मऊगंज जिले में जल जीवन मिशन की नल-जल योजना पहले भी सवालों के घेरे में रही है। मुख्यमंत्री के समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम में गेरुआरी सेगरान पंचायत में फर्जी हैंडओवर और फर्जी हस्ताक्षर का मामला सामने आया था। इसके बाद प्रदेश की करीब आठ हजार पंचायतों में जांच के आदेश दिए गए थे।
अब नईगढ़ी ब्लॉक में करोड़ों रुपये के कार्यों में सामने आई कथित गड़बड़ियों ने योजना के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
