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सांसद-विधायकों के केस वापस लेने का फैसला अब हाई कोर्ट करेगा, विशेष अदालत की भूमिका पर स्थिति साफ

Published: Fri, 06 Nov 2026 04:02 PM (IST)

मध्य प्रदेश में सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मुकदमों को वापस लेने के लिए अब हाई कोर्ट की अनुमति ...और पढ़ें

मप्र हाई कोर्ट भवन। (फाइल फोटो)

मप्र हाई कोर्ट भवन। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. सांसदों-विधायकों के केस वापसी को हाई कोर्ट की अनुमति जरूरी।

  2. सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों पर युगलपीठ ने स्थिति स्पष्ट की।

  3. एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट में 17 आवेदन वापसी के लंबित।

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश में सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मुकदमों को वापस लेने के मामलों में अब हाई कोर्ट की अनुमति जरूरी होगी। एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में लंबित ऐसे प्रकरणों में अभियोजन वापसी के लिए दिए गए आवेदनों पर हाई कोर्ट ही विचार करेगा। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के आधार पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की युगलपीठ ने यह स्थिति स्पष्ट की है।

मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित की है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिसंबर 2025 में जारी दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आपराधिक मामलों में अभियोजन वापसी की अनुमति देने के अधिकार क्षेत्र पर स्थिति साफ की।

17 मामलों में अभियोजन वापसी के आवेदन लंबित

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता बीडी सिंह उपस्थित हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि एमपी-एमएलए विशेष अदालत में लंबित 17 प्रकरणों में अभियोजन वापस लेने की अनुमति के लिए आवेदन प्रस्तुत किए गए हैं। इन पर सुनवाई होना बाकी है। इसके अलावा एक अन्य मामले में अभियोजन वापस लिए जाने की जानकारी भी कोर्ट के समक्ष रखी गई।

धारा 321 के तहत अधिकार को लेकर उठा था सवाल

दरअसल, पिछली सुनवाई में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 321 के तहत अभियोजन वापसी की अनुमति देने के अधिकार को लेकर सवाल उठा था। यह स्पष्ट किया जाना था कि क्या एमपी-एमएलए विशेष अदालत अपने स्तर पर ऐसे मामलों में अभियोजन वापस लेने की अनुमति दे सकती है या इसके लिए हाई कोर्ट की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी।

शासन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के दिसंबर 2025 के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए बताया गया कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों में अभियोजन वापसी के आवेदनों की जांच और उन पर अनुमति देने का अधिकार हाई कोर्ट के पास है।

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जनप्रतिनिधियों के आपराधिक मामलों की निगरानी कर रहा हाई कोर्ट

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की प्रभावी निगरानी के लिए सभी हाई कोर्ट को जनहित याचिकाओं के माध्यम से इन प्रकरणों पर नजर रखने के निर्देश दिए थे। इसी व्यवस्था के तहत मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में भी संज्ञान याचिका पर सुनवाई चल रही है।

अब 16 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में अभियोजन वापसी के लंबित आवेदनों और संबंधित मामलों की स्थिति पर आगे विचार किया जाएगा।

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