कान्हा टाइगर रिजर्व में आठ बाघों की मौत पर हाई कोर्ट सख्त, NTCA से दस साल में जारी फंड का मांगा हिसाब
कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत और संरक्षण पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ...और पढ़ें

मप्र हाईकोर्ट भवन। (फाइल फोटो)
HighLights
कान्हा बाघों की मौत, संरक्षण पर हाई कोर्ट सख्त
NTCA से मांगा 10 साल के फंड का वर्षवार ब्योरा
याचिका में 8 बाघों की मौत, CDV संक्रमण का मुद्दा
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत और संरक्षण व्यवस्था को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने टाइगर रिजर्व को पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं कराए जाने के मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) से पिछले 10 वर्षों में मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व के लिए जारी किए गए फंड का वर्षवार ब्योरा पेश करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिए। कोर्ट ने यह जानकारी मांगी है कि केंद्र की ओर से पिछले एक दशक में प्रदेश के टाइगर रिजर्व को कितनी राशि जारी की गई और उसका वर्षवार विवरण क्या है।
मुंबई के वकील ने लगाई है याचिका
मामला मुंबई के चेंबूर निवासी अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में कान्हा टाइगर रिजर्व में अप्रैल और मई के दौरान आठ बाघों की मौत का मुद्दा उठाया गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया कि मौत से पहले बाघों की शारीरिक स्थिति में स्पष्ट गिरावट देखी गई थी। इन मौतों के पीछे कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) संक्रमण की आशंका जताते हुए बाघों की सुरक्षा के लिए प्रभावी निगरानी, रोकथाम और उपचारात्मक उपाय लागू करने की मांग की गई है।
कुत्तों के वैक्सीनेशन और क्वारंटाइन के दिए थे निर्देश
मामले की पिछली सुनवाइयों में हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को बाघों की सुरक्षा के लिए आवश्यक निवारक और उपचारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। अदालत ने CDV संक्रमण की आशंका को देखते हुए टाइगर रिजर्व से लगे क्षेत्रों में कुत्तों को क्वारंटाइन करने और उनका वैक्सीनेशन कराने के निर्देश भी दिए थे।
सरकार की ओर से पिछली सुनवाई में बताया गया था कि वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कान्हा नेशनल पार्क के सीमावर्ती क्षेत्रों में करीब दो हजार कुत्तों का टीकाकरण कराया जा चुका है।
फंड और खाली पदों का मुद्दा भी उठा
सुनवाई के दौरान टाइगर रिजर्व के लिए केंद्र सरकार से पर्याप्त फंड नहीं मिलने का मुद्दा भी अदालत के सामने रखा गया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश के बावजूद टाइगर रिजर्व में रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं किए जाने की बात भी उठी।
हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व में भी CDV संक्रमण की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे और केंद्र व राज्य सरकार से जवाब मांगा था।
अब सामने आएगा 10 साल का फंड रिकॉर्ड
बुधवार की सुनवाई में अदालत ने फंड से जुड़े पहलू को गंभीरता से लिया। युगलपीठ ने NTCA को निर्देश दिया कि पिछले 10 वर्षों में मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व के लिए जारी किए गए फंड का वर्षवार पूरा डाटा अदालत में पेश किया जाए।
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुमान सिंह और अधिवक्ता प्रतीक रूसिया ने पैरवी की। अब अगली सुनवाई में फंड से जुड़े आंकड़ों के आधार पर टाइगर रिजर्व के संरक्षण और व्यवस्थाओं को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
