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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 25, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बाघों के गढ़ बांधवगढ़ में स्थित श्रीराम जानकी मंदिर, साल में एक बार ही खुलते है कपाट; सोमवार को भक्तों की उमड़ेगी भीड़

Published: Sun, 25 Aug 2024 07:33 PM (IST)

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में सैकड़ों वर्ष पुराना श्रीराम जानकी मंदिर के कपाट एक ...और पढ़ें

बाघों के गढ़ बांधवगढ़ में स्थित श्रीराम जानकी मंदिर (Image: Jagran)
बाघों के गढ़ बांधवगढ़ में स्थित श्रीराम जानकी मंदिर (Image: Jagran)

HighLights

  1. बाघों के साम्राज्य में भगवान श्रीराम कान्हा हैं और माता सीता राधारानी
  2. वर्ष में एक बार खुलते हैं बांधवगढ़ नेशनल पार्क के भीतर स्थित मंदिर के कपाट

संजय कुमार शर्मा, जेएनएन। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पूरे देश में कान्हा का पूजन होता है, लेकिन बाघों के साम्राज्य बांधवगढ़ में भगवान श्रीराम कान्हा के रूप में और माता सीता राधा रानी के रूप में पूजी जाती हैं।

मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के ताला गांव से लगभग 15 किलोमीटर दूर घने जंगल में पहाड़ के ऊपर बने कल्चुरी काल के किले के अंदर सैकड़ों वर्ष पुराना श्रीराम जानकी मंदिर है जिसके कपाट वर्ष में एक बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन खोले जाते हैं।

रीवा राज घराने के वंशज करते हैं पूजा

परंपरानुसार मंदिर में प्रति वर्ष पर्व विशेष पर रीवा राज घराने (बघेल शासक) के वंशज पूजन करने के लिए आते हैं। बांधवगढ़ नेशनल पार्क की सीमा के भीतर स्थित मंदिर तक पहुंचने श्रद्धालुओं को 14 किलोमीटर पैदल यात्रा करनी पड़ती है।

मंदिर के गर्भगृह में विराजमान श्रीराम जानकी का सम्मोहित करने वाला श्रीविग्रह भक्तों की सारी थकान दूर कर देता है। प्रति वर्ष यहां पूजन करने पहुंचने वाले बघेली शासकों के वंशज युवराज दिव्यराज सिंह ने बताया कि जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर का निर्माण पूर्ण हुआ था तभी से इस दिन विशेष यहां पूजन किया जा रहा है।

जंगल सरकार को सौंपा तो रखी शर्त

कभी बघेल शासकों की शिकारगाह रहा बांधवगढ़ का जंगल जब टाइगर रिजर्व बनाने के लिए सौंपा गया, तब महाराजा मार्तंड सिंह ने सरकार के सामने शर्त रखी कि किले में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर लगने वाले मेले की परंपरा को समाप्त नहीं किया जाएगा। यही कारण है कि हर वर्ष एक दिन के लिए यहां वन्यजीव एक्ट शिथिल हो जाता है। 1970 के दशक में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बनने के बाद इस क्षेत्र में स्वतंत्र विचरण पर विराम लगा था।

ऐतिहासिक महत्व

रीवा राज्य का इतिहास नामक पुस्तक के लेखक यादवेंद्र सिंह परिहार कहते हैं कि बांधवगढ़ में कलचुरियों का शासन 600-1200 ई.तक रहा । बघेली शासक व्याघ्रदेव के पुत्र कर्णदेव का विवाह कलचुरी शासक सोमदत्त की पुत्री पद्मकुंवरी से हुआ और दहेज में यह किला व आसपास का भूभाग मिला। बाद में बघेली शासकों ने किले की भीतर श्रीराम जानकी मंदिर का निर्माण कराया।

भगवान श्रीराम का उपहार

बाघों की घनी आबादी के लिए मशहूर बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के बीचों-बीच पहाड़ पर मौजूद बांधवगढ़ के ऐतिहासिक किले से जुड़ी एक पौराणिक गाथा है। भगवान श्रीराम ने वनवास से लौटने के बाद अपने भाई लक्षमण को ये किला उपहार में दिया था। इसीलिए इसका नाम बांधवगढ़ यानी भाई का किला रखा गया है। स्कंद पुराण और शिव संहिता में इस किले का वर्णन मिलता है।

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