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2003 में चुका दिया था कर्ज, बैंक ने खो दिए प्रॉपर्टी के असली दस्तावेज; बॉम्बे HC ने 5000 रुपये प्रतिदिन का लगाया जुर्माना

Published: Mon, 07 Sep 2026 04:23 PM (IST)

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एसबीआई को एक फर्म के प्रॉपर्टी के मूल दस्तावेज खोने पर प्रतिदिन 5,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

प्रॉपर्टी के दस्तावेज खोने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बैंक पर लगाया भारी जुर्माना

प्रॉपर्टी के दस्तावेज खोने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बैंक पर लगाया भारी जुर्माना

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डिजिटल डेस्क, मुंबई। अगर आपका बैंक लोन चुकाने के बाद भी आपकी प्रॉपर्टी के ओरिजिनल कागजात खो देता है, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने इन वोग क्रिएशन्स बनाम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI को पीड़ित फर्म को रोजाना 5,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

इन वोग क्रिएशन्स नाम की फर्म ने 1979 में SBI की दादर कमर्शियल ब्रांच से लोन लिया था। इसके लिए फर्म ने मुंबई के प्रभादेवी स्थित दो कमर्शियल यूनिट्स और पनवेल के एक प्लॉट के ओरिजिनल लीज डीड, शेयर सर्टिफिकेट्स व एग्रीमेंट्स बैंक के पास गिरवी रखे थे।

फर्म ने 28 अगस्त, 2003 को पूरा कर्ज चुका दिया, जिसके बाद SBI ने नो ड्यूज सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया। हालांकि, बैंक ने फर्म को उसके ओरिजिनल कागजात वापस नहीं किए।

जब फर्म अपनी प्रॉपर्टी बेचने निकली और कागजात मांगे, तब SBI ने स्वीकार किया कि कस्टडी से ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स खो चुके हैं। बैंक ने दलील दी कि लोन 2003 में चुकता हुआ था और फर्म ने 15 साल बाद कागजात मांगे, इस बीच ब्रांच भी शिफ्ट हो चुकी थी।

1 लाख का मुआवजा ठुकराया

मामला पहले बैंकिंग लोकपाल के पास गया, जिसने SBI को 1 लाख रुपये मुआवजे का सुझाव दिया। बैंक ने यह रकम फर्म के खाते में ट्रांसफर भी कर दी, लेकिन फर्म ने इसे पर्याप्त न मानते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

फर्म का कहना था कि ओरिजिनल कागजात न होने से स्टैंप ड्यूटी और मालिकाना हक साबित करने में भारी समस्या आ रही थी, जिससे वे प्रॉपर्टी नहीं बेच पा रहे थे।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और निर्देश

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायाधीश गौतम ए. अंखाद की डिवीज़न बेंच ने SBI की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि कर्ज चुकता होने के बाद बैंक के पास किसी के कागजात रखने का कोई हक नहीं है।

ब्रांच बदलना या स्टाफ ट्रांसफर होना बैंक का अंदरूनी मामला है, इसका खामियाजा ग्राहक नहीं भुगतेगा।

कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक के 13 सितंबर, 2023 के उस सर्कुलर का हवाला दिया, जिसके तहत लोन चुकता होने के 30 दिनों के भीतर कागजात न लौटाने पर बैंक को 5,000 रुपये प्रति दिन का जुर्माना देना होता है।

कोर्ट का फैसला

5,000 रुपये दैनिक जुर्माना: यह मुआवजा 1 दिसंबर, 2023 से तब तक लागू रहेगा, जब तक बैंक सभी सर्टिफाइड कॉपी, हलफनामे और इंडेम्निटी बॉन्ड तैयार करके फर्म को नहीं सौंप देता।

पूर्व में दी गई राशि का समायोजन: लोकपाल के आदेश पर बैंक द्वारा जमा किए गए 1 लाख रुपये को कुल मुआवजे की राशि में एडजस्ट किया जाएगा।

12 हफ्ते की समय सीमा: SBI को यह पूरी प्रक्रिया और कागजात दोबारा तैयार करने का काम 12 हफ्तों के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया है।