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2016 में रेप-मर्डर केस में मिली थी मौत की सजा, बॉम्बे HC ने व्यक्ति को कर दिया बरी

Published: Tue, 08 Sep 2026 11:35 AM (IST)

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2016 के फिजियोथेरेपिस्ट रेप और मर्डर केस में मौत की सजा पाए देबाशीष धारा को बरी कर दिया है।

रेप-मर्डर केस में मौत की सजा पाए व्यक्ति को बॉम्बे HC ने किया बरी। (फाइल फोटो।)

रेप-मर्डर केस में मौत की सजा पाए व्यक्ति को बॉम्बे HC ने किया बरी। (फाइल फोटो।)

HighLights

  1. बॉम्बे हाई कोर्ट ने मौत की सजा रद्द की।

  2. 2016 के रेप और मर्डर केस में बरी।

  3. देबाशीष धारा को तुरंत रिहा करने का आदेश।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को एक व्यक्ति (जो उस समय 29 साल का था) को दिसंबर 2016 में 24 साल की फिजियोथेरेपिस्ट के रेप और मर्डर के लिए सुनाई गई मौत की सजा को रद कर दिया।

जस्टिस भारती डांगरे और मंजूषा देशपांडे ने कहा, "4 अक्टूबर 2019 के फैसले में एडिशनल सेशंस जज द्वारा दोषी ठहराए जाने और उसके बाद रेस्पॉन्डेंट देबाशीष धारा को मौत की सजा सुनाए जाने के आदेश को रद किया जाता है।" उन्होंने यह भी कहा कि धारा को आजाद किया जाता है।

राज्य सरकार मौत की सजा की पुष्टि के लिए हाई कोर्ट गई थी। एडिशनल सेशंस जज ए डी देव ने धारा को मर्डर, रेप, अप्राकृतिक यौन अपराध और घर में जबरन घुसने समेत कई आरोपों में दोषी पाया था।

क्या है मामला?

धारा पीड़िता के घर के पास एक आभूषण की दुकान में काम करता था और घटना के लगभग दो महीने बाद पश्चिम बंगाल से पकड़ा गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 5 और 6 दिसंबर 2016 की रात को हुई थी। पीड़िता मुंबई के एक उपनगर की चाल में अपने परिवार के साथ रहती थी।

घर के सामने टॉयलेट के ऊपर एक अलग मचाननुमा कमरा था। वह इसका इस्तेमाल पढ़ाई और सोने के लिए करती थी। 5 दिसंबर को पीड़िता रात करीब 10 बजे काम से घर लौटी। रात के खाने के बाद वह हमेशा की तरह अपने कमरे में चली गई।

रात करीब 3 बजे एक पड़ोसी ने माता-पिता का दरवाजा खटखटाया और उन्हें बताया कि पीड़िता के कमरे से धुआं निकल रहा है। कमरा बाहर से बंद था। उन्होंने दरवाजा खोला तो देखा कि हर तरफ धुआं फैला हुआ था और कपड़े व किताबें जल रही थीं।

आग बुझाने के बाद उन्हें अपनी बेटी फर्श पर पड़ी मिली, जिसकी गर्दन पर जींस लिपटी हुई थी। पुलिस उसे अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे ब्रॉट डेड (अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत) घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि पीड़िता के साथ जबरदस्ती यौन संबंध बनाए गए थे और गला घोंटे जाने के कारण उसकी मौत हुई।

अदालत ने क्या कहा?

ट्रायल जज ने कहा कि यह अपराध सबसे दुर्लभ श्रेणी में आता है, क्योंकि आरोपी ने बेहद घिनौनी और भयानक हरकत की थी, जो अत्यधिक मानसिक विकृति को दिखाती है और जिसे इंसान कभी माफ नहीं कर सकते। धारा की ओर से वकील युग चौधरी ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष का मामला परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित था और धारा को शक के आधार पर फसाया गया था।

अभियोजक तनवीर खान ने ट्रायल कोर्ट के फैसले का समर्थन किया। पीड़िता के पिता की ओर से पेश वकील सिद्धार्थ जगुश्ते ने कहा कि परिवार सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देने पर विचार करेगा।

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