मराठा आरक्षण आंदोलन: अनशन के 11वें दिन बिगड़ी जरांगे की तबीयत, सरकार के साथ बढ़ा तनाव
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे मनोज जरांगे पाटिल की तबीयत 11वें दिन बिगड़ गई, लेकिन उन्होंने आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया।

जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल के 11वें दिन तबीयत बिगड़ी

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राज्य ब्यूरो, मुंबई। मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे मनोज जरांगे पाटिल की तबीयत मंगलवार को बिगड़ गई। अनशन के 11वें दिन उन्हें गंभीर निर्जलीकरण के कारण सुबह करीब 2:30 से 7 बजे के बीच चार बोतल आइवी फ्लूड चढ़ाया गया। इसके बाद भी उन्होंने आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया है।
मनोज जरांगे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मराठा आरक्षण संबंधी उपसमिति के अध्यक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल पर मराठा समुदाय को एक वर्ष से गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने हैदराबाद गजट के आधार पर आरक्षण देने का वादा किया था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया।
उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि दो महीने में आरक्षण देने का आश्वासन पूरा क्यों नहीं हुआ। साथ ही, उन्होंने विखे पाटिल पर मराठा समाज के साथ धोखा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें इसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
12 सितंबर को अंतरवाली सराटी में बड़ी बैठक
जरांगे ने कहा कि न्यायमूर्ति शिंदे समिति का मराठवाड़ा दौरा महज ध्यान भटकाने की कोशिश है। उन्होंने पुणे, ठाणे, नासिक और मुंबई समेत महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से मराठा समाज के लोगों को 12 सितंबर को अंतरवाली सराटी पहुंचने का आह्वान किया। इसी दिन मराठा समुदाय की बड़ी बैठक में आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी।
जरांगे की प्रमुख मांगों में मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण देना, हैदराबाद और सतारा गजट में दर्ज अभिलेखों को लागू करना तथा पात्र मराठा परिवारों को कुणबी जाति प्रमाणपत्र जारी करना शामिल है।
कुणबी पारंपरिक रूप से कृषि से जुड़ा समुदाय है और ओबीसी श्रेणी में आता है। इसके तहत पात्र लोगों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिलता है।
मराठा समुदाय को गुमराह करने का आरोप
दूसरी ओर मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि सरकार ने जरांगे की सभी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिए हैं। उन्होंने कहा कि फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यकाल में मराठा समाज के हित में ऐसे फैसले किए गए, जो पहले कभी नहीं हुए।
विखे पाटिल ने कहा कि सरकार ने जरांगे की सभी मांगों पर एक कदम आगे बढ़ाया है। अब उन्हें भी दो कदम आगे बढ़कर सरकार के सकारात्मक फैसलों को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति शिंदे ने मंगलवार से मराठवाड़ा का दौरा शुरू किया है।
मराठा-ओबीसी आरक्षण विवाद के समाधान की मांग
इस दौरान मराठा समुदाय से जुड़े अभिलेखों की जमीनी स्थिति का जायजा लिया जाएगा। उनके अनुसार, समिति के मार्गदर्शन में 58 लाख अभिलेखों को खोजकर ग्राम पंचायत कार्यालयों में प्रदर्शित किया जा चुका है। प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया तेज करने के लिए शिविर भी लगाए जाएंगे।
इस बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) गुट के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने सरकार से मराठा-ओबीसी आरक्षण विवाद का दो दिन में समाधान निकालने की मांग की। उन्होंने कहा कि आगामी त्योहारों से पहले सामाजिक तनाव बढ़ना उचित नहीं है।
शिंदे ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर की ‘आंतरिक प्रतिस्पर्धा’ के कारण जरांगे को दिए गए आश्वासन लागू नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों ने आरक्षण को लेकर वादे किए थे। अब सरकार को उन आश्वासनों का जवाब देना होगा।
