होम्योपैथी पर महाराष्ट्र सरकार के फैसले के विरोध में उतरा IMA, देशव्यापी आंदोलन की दी चेतावनी
महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही, जो BHMS-CCMP डॉक्टरों को एलोपैथी दवाएं लिखने की अनुमति देने के सरकार के फैसले के विर ...और पढ़ें

IMA ने दी देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी (फोटो-ANI)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रही। डॉक्टर महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले का विरोध कर रहे हैं, जिसमें BHMS-CCMP यानी होम्योपैथी डिग्री के साथ 1 साल का सर्टिफिकेट कोर्स करने वाले डॉक्टरों को एलोपैथी दवाएं लिखने की इजाजत दी गई है।
इसे लेकर MBBS डॉक्टर विरोध जता रहे हैं। MBBS डॉक्टरों का कहना है कि यह खतरनाक है। डॉक्टरों के विरोध में अब IMA की भी एंट्री हो गई है। IMA ने देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।
डॉक्टरों ने मरीजों के लिए बताया खतरनाक
MBBS डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ 1 साल या थोड़े समय का कोर्स करने के बद होम्योपैथिक डॉक्टरों को एलोपैथी दवाएं लिखने की अनुमति देना मरीजों की सेहत के लिए खतरनाक है। डॉक्टरों का आरोप है कि इससे डबल रजिस्ट्रेशन को बढ़ावा मिलेगा और मेडिकल प्रैक्टिस के स्टैंडर्ड गिरेंगे।
12 हजार डॉक्टर हड़ताल पर, सेवाएं प्रभावित
12 हजार जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर हैं। इसमें JJ अस्पताल और मुंबई के 4 BMC-संचालित मेडिकल कॉलेजों के 2 हजार से ज्यादा डॉक्टर शामिल हैं। हड़ताल के कारण बुधवार को सरकारी अस्पतालो में रूटीन OPD और IPD सेवाएं बंद इलेक्टिव सर्जरी और सेंट्रल लैब की सेवाएं ठप रहीं।
नॉन-क्रिटिकल मरीजों को वापस भेजा गया। प्रदेश भर से ऐसी ही रुकावटों की खबरें बुधवार को सामने आईं।
IMA ने भी दी चेतावनी
नेशनल लेवल की इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) भी इस विरोध में शामिल हो गई है। IMA ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि अगर BHMS-CCMP वाला फैसला वापस नहीं लिया गया तो डॉक्टर और मेडिकल छात्र पूरे देश में हड़ताल करेंगे।
खबरें और भी
महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स ने कहा कि हड़ताल अब अनिश्चितकालीन होगी। इसमें अगली सूचना तक सभी रूटीन क्लिनिकल, एकेडमिक और नॉन-क्रिटिकल इमरजेंसी सेवाएं बंद रहेंगी।
एसोसिएशन ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में ये सारी सेवाएं पूरी तरह रेजिडेंट डॉक्टर ही संभालते हैं, इसलिए उनके काम बंद करने से मरीजों को भारी दिक्कतें होंगी।