महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल, होम्योपैथ को एलोपैथी दवाएं लिखने की अनुमति पर बढ़ा विवाद
महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टरों ने होम्योपैथ चिकित्सकों को एलोपैथी दवाएं लिखने की अनुमति के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। ...और पढ़ें

मुंबई में रेडिजेंट डॉक्टरों की हड़ताल (प्रतीकात्मक फोटो/जागरण)
HighLights
रेजिडेंट डॉक्टरों ने होम्योपैथ को एलोपैथी दवाएं लिखने के विरोध में हड़ताल की।
मार्ड ने सरकार से बातचीत और पंजीकरण प्रक्रिया स्थगित करने की मांग की।
6 अगस्त से आपातकालीन सेवाएं भी बंद करने की चेतावनी दी गई।
राज्य ब्यूरो, मुंबई। महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (मार्ड) ने राज्य सरकार द्वारा होम्योपैथ चिकित्सकों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (एमएमसी) में पंजीकरण और एलोपैथी दवाएं लिखने की अनुमति दिए जाने के विरोध में बुधवार आधी रात से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द बातचीत शुरू नहीं की तो 24 घंटे बाद आपातकालीन सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी।
होम्योपैथ को एलोपैथी दवाएं लिखने की अनुमति पर विवाद
एमएमसी ने 30 जून को जारी अधिसूचना में कहा था कि छह माह का सर्टिफिकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलाजी (सीसीएमपी) पूरा करने वाले बीएचएमएस चिकित्सक आधुनिक चिकित्सा की दवाएं लिख सकेंगे।
मार्ड का कहना है कि यह मामला अदालत में लंबित है, इसलिए अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक बीएचएमएस-सीसीएमपी पंजीकरण प्रक्रिया तत्काल स्थगित की जानी चाहिए।
सेंट्रल मार्ड के अध्यक्ष अथर्व शिंदे ने कहा कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई संतोषजनक आश्वासन नहीं मिला।
फिलहाल पहले 24 घंटे तक मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन और कैजुअल्टी सेवाएं जारी रहेंगी, जबकि ओपीडी, नियमित चिकित्सा सेवाएं, वैकल्पिक सर्जरी और शैक्षणिक गतिविधियां बंद रहेंगी। यदि समाधान नहीं निकला तो छह अगस्त से आपातकालीन सेवाएं भी पूरी तरह बंद कर दी जाएंगी।
मार्ड के आंदोलन को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), बीएमसी मार्ड, महाराष्ट्र स्टेट रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन, एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न्स, महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ गजेटेड मेडिकल ऑफिसर्स (ग्रुप-ए) और महाराष्ट्र स्टेट मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने समर्थन दिया है।
इस बीच मंगलवार को मुंबई प्रेस क्लब में एलोपैथी और होम्योपैथी विशेषज्ञों के बीच इस मुद्दे पर बहस भी हुई। एलोपैथी पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे डॉ. जयेश लेले ने मरीजों पर संभावित दुष्प्रभाव और जवाबदेही का सवाल उठाया, जबकि होम्योपैथी पक्ष के बाहुबली शाह ने ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी का हवाला देते हुए इस व्यवस्था को आवश्यक बताया।