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महाराष्ट्र में MPSC परीक्षा धांधली को लेकर सड़कों पर उतरे हजारों छात्र, आयोग अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग

Published: Mon, 07 Sep 2026 08:29 PM (IST)

पुणे में हजारों परीक्षार्थियों ने महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में आक्रोश मार्च निकाला।

एमपीएससी परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का विशाल प्रदर्शन

एमपीएससी परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का विशाल प्रदर्शन

HighLights

  1. हजारों परीक्षार्थियों ने पुणे में एमपीएससी अनियमितताओं के खिलाफ मार्च किया।

  2. आयोग के अध्यक्ष, सचिव के इस्तीफे की मांग की गई।

  3. सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम, सुधार की चेतावनी दी।

राज्य ब्यूरो, मुंबई। महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में आज पुणे में हजारों परीक्षार्थियों ने सड़क पर उतरकर आक्रोश मार्च निकाला।

औषधि निरीक्षक परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों से शुरू हुआ यह विरोध अब आयोग की कार्यप्रणाली, परीक्षा की पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े व्यापक सवालों में बदल गया है।

प्रदर्शनकारियों ने आयोग के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे की मांग करते हुए सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया।

प्रदर्शनकारी ओंकारेश्वर चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च करते हुए पहुंचे। कार्यालय के सामने विद्यार्थियों ने धरना दिया और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के जुटने के कारण पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी।

मार्च में कुछ जनप्रतिनिधि और राजनीतिक कार्यकर्ता भी शामिल हुए। हालांकि, आंदोलन का मुख्य केंद्र परीक्षार्थियों की मांगें ही रहीं।

परीक्षार्थियों का आरोप है कि एमपीएससी की औषधि निरीक्षक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों ने पूरी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी में वर्षों लगाने वाले अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा में निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण है।

यदि प्रश्नपत्र, परीक्षा संचालन या परिणाम से जुड़ी प्रक्रिया पर संदेह हो, तो मेहनत करने वाले उम्मीदवारों के साथ अन्याय होता है। इसी कारण विद्यार्थी केवल एक परीक्षा की जांच नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं।

आंदोलनकारियों ने कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच, संदिग्ध अधिकारियों के फोरेंसिक ऑडिट, परिणाम संबंधी शंकाओं का समाधान और गुट-क परीक्षाओं में पारदर्शिता सहित 12 मांगें रखी हैं।

विद्यार्थियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि दोषियों पर कार्रवाई के साथ प्रभावित अभ्यर्थियों को भी न्याय मिल सके। मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी गई है।

यह प्रदर्शन केवल हालिया परीक्षा विवाद तक सीमित नहीं है। इससे पहले भी परीक्षार्थी एमपीएससी की परीक्षा प्रणाली में बदलाव और नई परीक्षा पद्धति लागू करने की मांग को लेकर आंदोलन कर चुके हैं। अभ्यर्थियों की शिकायत है कि परीक्षा प्रक्रिया में बार-बार उठने वाले सवाल उनकी तैयारी, समय और आर्थिक संसाधनों पर भारी पड़ते हैं।

ऐसे में आयोग से स्पष्ट नियम, समय पर निर्णय और भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था की अपेक्षा बढ़ गई है।