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महाराष्ट्र: गणेशोत्सव समन्वय समिति ने गणेश प्रतिमाओं के विकृतीकरण पर आपत्ति जताई, DJ की आवाज और मूर्ति की ऊंचाई पर भी दिए निर्देश

Published: Mon, 07 Sep 2026 08:59 PM (IST)

बृहन्मुंबई सार्वजनिक गणेशोत्सव समन्वय समिति ने गणेश प्रतिमाओं के पारंपरिक स्वरूप में बदलाव और विकृतीकरण पर आपत्ति जताई है, साथ ...और पढ़ें

गणेशोत्सव समन्वय समिति ने गणेश प्रतिमाओं के विकृतीकरण पर जताई आपत्ति (प्रतिकात्मक तस्वीर)

गणेशोत्सव समन्वय समिति ने गणेश प्रतिमाओं के विकृतीकरण पर जताई आपत्ति (प्रतिकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. गणेश प्रतिमाओं के पारंपरिक स्वरूप में बदलाव पर आपत्ति।

  2. डीजे ध्वनि सीमा और मूर्ति ऊंचाई नियमों का पालन।

  3. महाप्रसाद वितरण व विसर्जन पर स्पष्ट नियम की मांग।

राज्य ब्यूरो, मुंबई। गणेशोत्सव से पहले मुंबई के करीब 12 हजार सार्वजनिक गणेश मंडलों का प्रतिनिधित्व करने वाली बृहन्मुंबई सार्वजनिक गणेशोत्सव समन्वय समिति (बीएसजीएसएस) ने कुछ मूर्तियों के स्वरूप पर आपत्ति जताई है।

समिति के अध्यक्ष नरेश दहिभावकर ने कहा कि भगवान गणेश की पारंपरिक धार्मिक पहचान से अलग हटकर मूर्तियां बनाने से बचना चाहिए। उन्होंने मंडलों और मूर्तिकारों से धार्मिक भावनाओं, परंपरा और संस्कृति का सम्मान बनाए रखने की अपील की।

नरेश दहिभावकर ने कहा कि समिति डीजे के इस्तेमाल के खिलाफ नहीं है, लेकिन मंडलों को निर्धारित ध्वनि सीमा का सख्ती से पालन करना होगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय सरकार और नगर निकाय के अधिकार क्षेत्र में आता है। समिति का रुख शुरू से यही रहा है कि कानून का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

उन्होंने बताया कि ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के अनुसार दिन में 55 और रात में 45 डेसीबल की सीमा निर्धारित है। अस्पतालों, स्कूलों और कॉलेजों के आसपास अतिरिक्त प्रतिबंध लागू होते हैं। उनके अनुसार, पिछले पांच-छह वर्षों में मंडलों को लगातार जागरूक करने से मुंबई में स्थिति में सुधार हुआ है।

मूर्ति की ऊंचाई को लेकर दहिभावकर ने कहा कि वर्ष 2008 के आसपास 18 फीट की अधिकतम सीमा तय की गई थी, जिसका करीब चार वर्षों तक ठीक से पालन हुआ। बाद में मंडलों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा से समस्या जटिल हो गई।

उन्होंने कहा कि सरकार और बीएमसी को मूर्ति व मंडप की ऊंचाई, विसर्जन मार्ग, बिजली व्यवस्था, यातायात, सुरक्षा और विसर्जन की तैयारियों को एक साथ ध्यान में रखकर नियम बनाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नियमों में मूर्ति की ऊंचाई मापने का तरीका स्पष्ट होना चाहिए।

बता दें कि कुछ ही दिनों पहले मुंबई में एक गणेश प्रतिमा के गिर जाने से उसके नीचे दबकर दो व्यक्तियों की मृत्यु हो गई थी।

समिति ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के प्रस्तावित नियमों और महाप्रसाद वितरण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पर भी स्पष्टीकरण मांगा है।

समिति का कहना है कि छोटे मंडल महंगे या प्रतिष्ठित ठेकेदार नियुक्त करने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने खाद्य सुरक्षा के उपायों का समर्थन करते हुए कहा कि अधिकारियों को नियम स्पष्ट रूप से बताने चाहिए और आर्थिक कठिनाइयों का भी ध्यान रखना चाहिए।

समिति के अनुसार, कृत्रिम विसर्जन तालाबों की संख्या 2024 में 204 से बढ़कर 2025 में 298 हो गई थी और इस वर्ष 355 से अधिक होने की उम्मीद है। पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के लिए समिति ने विसर्जन की रोटेशन प्रणाली का सुझाव दिया है।


समिति ने प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियों का मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण इस पर टिप्पणी करने से इनकार किया।