कोर्ट के मना करने के बावजूद लकड़ी की भट्टी में पक रही थी ब्रेड-रोटी, FDA ने ठाणे की फेमस बेकरी को किया सील
बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद FDA ने ठाणे की एक बेकरी को लकड़ी की भट्टी के इस्तेमाल के आरोप में सील कर दिया है।

ठाणे की फेमस बेकरी सील (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

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डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने ठाणे के कल्याण स्थित फेमस 'प्रिंस बेकरी' पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे सील कर दिया है। FDA ने यह कार्रवाई बेकरी में पारंपरिक लकड़ी की भट्टी (ओवन) का इस्तेमाल कर रोटी और ब्रेड बनाने की शिकायत के बाद की है।
दरअसल, यह कार्रवाई बॉम्बे हाई कोर्ट के पहले के निर्देश के बाद की गई है, जिसमें महाराष्ट्र भर की बेकरियों को कोयले या लकड़ी से चलने वाले ओवन का उपयोग बंद करने और एलपीजी, पाइप वाली गैस या इलेक्ट्रिक ओवन जैसे स्वच्छ विकल्पों पर स्विच करने का आदेश दिया गया था।
कोर्ट ने कोयले और लकड़ी जलाने के प्रतिकूल पर्यावरणीय प्रभावों को ध्यान में रखते हुए यह निर्देश दिया था और इसके परिणामस्वरूप होने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी और तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया था।
शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
बेकरी के कर्मचारियों के अनुसार, यह कार्रवाई एक शिकायत के बाद की गई है जिसमें आरोप लगाया गया था कि बेकरी रोटी बनाने के लिए लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल कर रही थी। FDA ने कार्रवाई करते हुए बेकरी को सील कर दिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई अभी जारी है।
बता दें कि जिस बेकरी को सील किय गया है, वह बड़ी मात्रा में ब्रेड का उत्पादन करती है और अपने उत्पादों को शहर भर की कई दुकानों में आपूर्ति करती है, जिससे मामले का दायरा और बढ़ गया।
ईंधन बदलने से स्वाद पर पड़ेगा असर
बेकरी मालिकों के बीच स्वच्छ ईंधन अपनाने की मांग एक बड़ा विवाद बन गई है, क्योंकि इनमें से कई परिवार पीढ़ियों से पारंपरिक लकड़ी के चूल्हों का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। बेकरी संचालकों का तर्क है कि ईंधन का माध्यम बदलना बेहद खर्चीला है, और गुंबदनुमा चूल्हों (डोम-शेप्ड ओवन) की विशेष बनावट के कारण यह तकनीकी रूप से भी कठिन है।
इसके अलावा, उनका यह भी मानना है कि ईंधन बदलने से उनकी पारंपरिक रोटी के प्रामाणिक स्वाद पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी व्यवसाय को वायु प्रदूषण फैलाने का असीमित अधिकार नहीं दिया जा सकता। कोर्ट के अनुसार, व्यापारिक हितों से ऊपर आम जनता के स्वच्छ पर्यावरण में जीने के मौलिक अधिकार को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।
