टाइगर श्रॉफ मामले में मकोका अदालत ने बढ़ाई सभी आरोपियों की पुलिस हिरासत, लॉरेंस गैंग के कनेक्शन की होगी जांच
टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग मामले में मुंबई की विशेष मकोका अदालत ने सभी 11 आरोपितों की पुलिस हिरासत ...और पढ़ें

टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में मकोका कोर्ट ने आरोपियों की बढ़ाई हिरासत

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राज्य ब्यूरो, मुंबई। अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में मुंबई की विशेष मकोका अदालत ने गुरुवार को सभी 11 आरोपितों को छह नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत दोबारा गिरफ्तार आरोपितों को विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण नवानंदर के समक्ष पेश किया गया।
पुलिस ने हमले के पीछे की गहरी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए 10 दिन की हिरासत मांगी थी।
पुलिस ने मंगलवार को मामले में गिरफ्तार सभी 11 आरोपितों के खिलाफ मकोका के प्रविधान लागू किए थे। जांच एजेंसी को संदेह है कि फायरिंग के पीछे संगठित आपराधिक नेटवर्क की भूमिका हो सकती है। पुलिस आरोपितों से पूछताछ कर हमले की योजना बनाने वालों, हथियार उपलब्ध कराने वालों और साजिश में शामिल अन्य लोगों का पता लगाने में जुटी है।
मुंबई के जुहू इलाके में 18 अक्टूबर को यह घटना हुई थी। पुलिस के अनुसार, टाइगर श्रॉफ एक फुटबॉल मैदान से निकल रहे थे, तभी दो हमलावरों ने उनकी कार पर पांच राउंड गोलियां चलाईं। 36 वर्षीय अभिनेता इस हमले में बाल-बाल बच गए, जबकि उनके कार चालक और वहां मौजूद एक व्लॉगर को चोटें आई थीं।
मामले में गिरफ्तार 11 आरोपितों में से तीन को राजस्थान के कोटा से पकड़ा गया, जबकि अन्य आरोपित दिल्ली और हरियाणा के विभिन्न स्थानों से गिरफ्तार किए गए। फायरिंग के बाद सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट सामने आए थे, जिनमें कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के सदस्यों ने हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था। पुलिस इस पहलू की जांच कर रही है।
जेल में बंद गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई के सहयोगी अनिल पंडित को मामले में वांछित आरोपित बताया गया है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरफ्तार आरोपितों का कथित गिरोह से क्या संबंध है और हमले के पीछे क्या उद्देश्य था।
मकोका के तहत सख्त प्रविधान
मकोका के तहत पुलिस को आरोपपत्र दाखिल करने के लिए अधिकतम 180 दिनों तक का समय मिल सकता है, जबकि सामान्य आपराधिक कानून में यह अवधि 90 दिन है। इस कानून में जमानत की शर्तें भी सख्त हैं। इसके अलावा, पुलिस उपायुक्त स्तर के अधिकारी के समक्ष दर्ज इकबालिया बयान को अदालत में साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जा सकता है।
पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान अब हमले की साजिश और अन्य संभावित आरोपितों की भूमिका का पता लगाने पर जोर रहेगा।
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