माओवादी हिंसा के बीच बीता बचपन, अब रचा इतिहास; गढ़चिरौली में पूर्व नक्सली की बेटी अरविंदा बनी इंजीनियर
पूर्व माओवादी की बेटी अरविंदा बरसगड़े ने गढ़चिरौली में सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा पूरा कर लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी में ट्रेनी के रूप में काम शुरू किया है।

पूर्व नक्सली की बेटी अरविंदा बनीं इंजीनियर
HighLights
अरविंदा ने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा पूरा किया।
अब लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी में ट्रेनी के रूप में कार्यरत।
गढ़चिरौली में विकास और रोजगार का नया प्रतीक बनीं।
डिजिटल डेस्क, नागपुर। महज चार महीने की उम्र में पिता के माओवादी संगठन 'सिरोंचा दलम' में चले जाने के बाद, बेटी अरविंदा बरसगड़े का बचपन गढ़चिरौली में गोलियों और धमाकों की गूंज के बीच बीता। उस समय महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले में उग्रवाद अपने चरम पर था।
उग्रवाद, गोलियों और धमाकों के बीच पली-बढ़ी 20 वर्षीय अरविंदा बरसगड़े आज एक अलग भविष्य को आकार लेते देख रही हैं। सिरोंचा दलम के माओवादी रहे राजबाबू की बेटी अरविंदा ने तमाम मुश्किलों के बावजूद सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा पूरा किया और अब हेदरी स्थित 'लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी' में बतौर ट्रेनी काम कर रही हैं।
दबाव के बाद माओवादी बने पिता
दरअसल, अरविंदा के पिता राजबाबू (उर्फ किरण या समय्या) 2000 के दशक की शुरुआत में नारायणपुर ग्राम पंचायत में चपरासी था। ग्रामीणों द्वारा माओवादियों से अधिक मकान कर वसूलने की शिकायत के बाद, उन पर दबाव और सार्वजनिक अपमान बढ़ा, जिसके चलते 2005 में राजबाबू सिरोंचा दलम में शामिल होने को मजबूर हो गए।
पति के इस कदम का खामियाजा उनकी पत्नी लता को भी भुगतना पड़ा, जिससे उन्हें सिरोंचा में अपनी चपरासी की नौकरी छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने छोटे-मोटे काम करके अपनी इकलौती बेटी अरविंदा का पालन-पोषण किया और भोगपुर के स्कूल में पहली कक्षा में उसका दाखिला कराया।
2010 में किया सरेंडर
साल 2010 में जब राजबाबू ने गढ़चिरौली पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, तब से यह परिवार जिला पुलिस मुख्यालय के पास रहने लगा। इस दौरान इकलौती बेटी अरविंदा अपनी पढ़ाई जारी रखी। हाई स्कूल पास किया।
कोविड महामारी के दौरान आर्ट साइंस से इंटर की पढ़ाई पूरी की। शुरुआत में अधिवक्ता और राजनीतिक कार्यकर्ता कविता मोहार्कर से प्रेरित होकर अरविंदा लॉ की पढ़ाई करना चाहती थीं। लेकिन बाद में उन्होंने गढ़चिरोली के सरकारी पॉलिटेक्निक से 2025 में सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा पूरा किया।
अरविंदा की पढ़ाई में सरेंडर कर चुके माओवादियों के बच्चों की मदद करने वाले पुलिस अधिकारियों का भी विशेष योगदान मिला।
रोजगार की शुरुआत
अरविंदा 1 दिसंबर 2025 को हेदरी स्थित 'एलटी गोंडवाना स्किल हब' में ट्रेनी के रूप में कार्य शुरू किया है, यहां वह पहले पर्यवेक्षक के तौर पर काम कर चुकी हैं। अरविंदा की पहल क्षेत्र में चार दशकों के माओवादी प्रभाव के कमजोर होने के बाद आई निवेश की लहर का हिस्सा है।
माओवादियों के खात्मे से विकास का रास्ता साफ
अरविंदा कहती हैं, "माओवादी हिंसा के खात्मे ने विकास का रास्ता साफ किया है। पहले डर की वजह से निवेशक, मंत्री और अधिकारी दूर रहते थे, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। युवाओं को अब नौकरी के लिए गढ़चिरौली से बाहर नहीं जाना पड़ता, अवसर खुद चलकर यहां आ रहे हैं।"
बी.टेक करने की तैयारी में अरविंदा
अरविंदा अब बीटेक करने की योजना बना रही हैं। उनका सपना आत्मनिर्भर होकर स्थानीय युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण के अवसर पैदा करना है।
गढ़चिरौली के एसपी एम. रमेश, जिन्होंने पूर्व माओवादियों के पुनर्वास की नीति को तेजी से लागू किया है, अरविंदा का उदाहरण देते हुआ कहा, "अब गढ़चिरौली ऐसा जिला बन चुका है जहां माओवाद से प्रभावित बचपन वाली बच्ची भी निर्माण स्थल पर काम कर सकती है और अपने बेहतर करियर, सुरक्षित नौकरी और शांत पारिवारिक जीवन के बारे में सोच सकती है।”
