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    सपना, समर्पण और मेहनत से बारामती की श्रावणी ने नीट-यूजी में हासिल की पांचवी रैंक

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 11:46 PM (GMT+05:30)

    श्रावणी कुडाले ने नीट-यूजी 2026 में 720 में से 710 अंक प्राप्त कर अखिल भारतीय स्तर पर पांचवीं रैंक हासिल की है। ...और पढ़ें

    महाराष्ट्र के पुणे जिले की रहने वाली श्रावणी कुडाले(फोटो: आईएएनएस)

    महाराष्ट्र के पुणे जिले की रहने वाली श्रावणी कुडाले(फोटो: आईएएनएस)

    HighLights

    1. श्रावणी कुडाले ने नीट-यूजी में अखिल भारतीय रैंक-5 हासिल की।

    2. 720 में से 710 अंक प्राप्त कर बारामती का नाम रोशन किया।

    3. अनुशासित अध्ययन, शिक्षकों का मार्गदर्शन सफलता का आधार बना।

    डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र के पुणे जिले के बारामती तालुका की रहने वाली श्रावणी कुडाले ने अपनी मेहनत, लगन और मजबूत तैयारी के दम पर नीट-यूजी 2026 में शानदार सफलता हासिल की है। श्रावणी ने 720 में से 710 अंक प्राप्त कर आल इंडिया रैंक-5 हासिल की। नीट-यूजी के दोबारा आयोजित किए गए परीक्षा परिणाम 16 जुलाई को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने जारी किए थे।

    ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली श्रावणी ने बताया कि डाक्टर बनने का सपना उन्होंने स्कूल के दिनों से ही देखना शुरू कर दिया था। उन्होंने कहा कि कक्षा नौ से ही उन्होंने नीट की तैयारी शुरू कर दी थी, जिससे उनकी बुनियाद मजबूत हो गई। लगातार प्रयास, शिक्षकों का मार्गदर्शन और अनुशासित अध्ययन उनकी सफलता का आधार बने।

    श्रावणी ने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसी है। उन्होंने मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का लक्ष्य पहले ही तय कर लिया था और उसी दिशा में पूरी मेहनत के साथ आगे बढ़ती रहीं। श्रावणी का सपना अब दिल्ली स्थित एम्स से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करना और आगे विशेषज्ञता हासिल करना है। उन्होंने कहा कि वह चिकित्सा क्षेत्र के माध्यम से देश की सेवा करना चाहती हैं।

    अपनी सफलता का श्रेय श्रावणी ने अनुशासित दिनचर्या, शिक्षकों के मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत को दिया। उन्होंने बताया कि पूरे एक साल तक उन्होंने मोबाइल फोन और इंटरनेट मीडिया से दूरी बनाए रखी, ताकि पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकें। उन्होंने बारामती के एक निजी संस्थान से नीट की व्यवस्थित तैयारी भी की।

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    श्रावणी ने कहा कि स्पष्ट लक्ष्य और लगातार मेहनत के साथ ग्रामीण क्षेत्र में रहकर भी नीट जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की जा सकती है।

    श्रावणी के पिता पेशे से शिक्षक हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें बेटी के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इतनी बड़ी सफलता की कल्पना नहीं की थी। उन्होंने कहा कि बेटी की मेहनत, समर्पण और शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम आज सामने आया है और पूरा परिवार उस पर गर्व महसूस कर रहा है।

    श्रावणी की मां ने भी कहा कि देश के शीर्ष रैंकर्स में शामिल होना आसान नहीं होता, लेकिन बेटी की मेहनत और दृढ़ संकल्प ने उसे यह मुकाम दिलाया।