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अदिति पौडेल 17 साल की उम्र में बनीं जापान की पहली साक्षरता एंबेसडर, पढ़ने की आदत ने बना दी दुनिया में पहचान

Published: Thu, 03 Sep 2026 03:58 PM (IST)

17 वर्षीय अदिति पेडोल को जापान की पहली साक्षरता एंबेसडर बनाया गया है। अब वे युवा एंबेसडरों के साथ मिलकर ...और पढ़ें

Aditi Paudel: Japan's First Literacy Ambassador

Aditi Paudel: Japan's First Literacy Ambassador

HighLights

  1. अदिति बनीं जापान की पहली Literacy Ambassador.

  2. पढ़ने की आदत ने दिया अदिति को नया मुकाम।

एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। पढ़ने-लिखने का जूनून आपको कहां से कहां पहुंचा सकता है इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि 17 वर्षीय अदिति पौडेल को जापान में अपना पहला साक्षरता एंबेसडर यानी कि Literacy Ambassador बनाया है। अदिति जापान में ही हाई स्कूल की सीनियर स्टूडेंट हैं और फाउंडेशन के 'यूथ एम्बेसडर प्रोग्राम' से भी जुड़ी हैं।
यह प्रोग्राम दुनिया भर के युवाओं को एक साथ लाने का काम करता है जिससे ज्यादा से ज्यादा साक्षरता को बढ़ावा दिया जा सके और लोगों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। इस प्रोग्राम में 101 देशों के 16 से 25 साल की उम्र के लगभग 900 युवा शामिल हैं।

इस प्रोग्राम में जापान की पहली साक्षरता एंबेसडर के तौर पर, पौडेल दूसरे युवा एंबेसडरों के साथ मिलकर काम करेंगी और युवाओं को पढ़ने की आदत डालने के लिए प्रोत्साहित करेंगी।

कौन हैं अदिति पेडोल

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अदिति पैडोल का जन्म जापान में हुई हुआ था लेकिन उनका बचपन नेपाल में बीता। इसके बाद वे दोबारा जापान गईं जहां उन्होंने दोबारा जापानी भाषा सीखी। दोनों देशों में रहने और इस दौरान मिल अनुभवों ने भाषाओं, किताबों और शिक्षा में उनकी रुचि को आगे बढ़ाने का काम किया।

प्री-स्कूल में ही देवनागरी लिपि का पढ़ लिया अखबार

बचपन से ही अदिति पौडेल को पढ़ने का बहुत शौक था। अदिति के जब वे प्री-स्कूल में थीं, तब उनके दादाजी ने उन्हें देवनागरी लिपि में छपा एक अख़बार दिया था। उस लिखावट को पढ़ना मुश्किल था, लेकिन वे इसे समझ गईं। इसके चलते उनके आस-पास के लोग हैरान रह गए। वह अनुभव उनके लिए एक अहम याद बन गया और एक पाठक के तौर पर उनका आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद की।

पिता खरीदकर देते थे नियमित रूप से किताबें

जापान लौटने के बाद अदिति की पढ़ने की आदत को देखते हुए उनके पिता उन्हें नियमित रूप से किताबें खरीदकर पढ़ने देते थे। उन्हें खास तौर पर फैंटेसी कहानियान बेहद पसंद थीं, जिनमें एनिड ब्लाइटन की 'द विशिंग-चेयर' सीरीज भी शामिल थी।

क्या है अदिति का उद्देश्य

अदिति पौडेल का उद्देश्य युवाओं को सशक्त बनाना और वैश्विक स्तर पर साक्षरता को बढ़ावा देना है। उनका काम पढ़ने की घटती आदतों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संभावित प्रभाव पर भी केंद्रित है। उनका मानना है कि साक्षरता अवसरों के द्वार खोल सकती है, गहन चिंतन को प्रोत्साहित कर सकती है और दृष्टिकोण को व्यापक बना सकती है।

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