प्राथमिक स्तर पर दस स्टूडेंट के लिए 1 शिक्षक उपलब्ध, वर्कफोर्स के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर भी हुआ मजबूत; देखें UDISE+ की रिपोर्ट
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस' (UDISE+) रिपोर्ट जारी की गई है। इसमें बताया गया ...और पढ़ें

UDISE+ Report
HighLights
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने जारी की UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट।
पिछले 4 वर्षों में टीचर्स की उपलब्धता में अभूतपूर्व बदलाव।
एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से इस महीने जारी 'यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस' (UDISE+) 2025-26 रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट्स के मुताबिक एजुकेशन के क्षेत्र में देश तरक्की की राह पर है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 4 वर्षों में प्रति स्टूडेंट्स पर टीचर्स की उपलब्धता में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी देखने को मिली है।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में शिक्षकों की संख्या 2022-23 में 94,83,294 से बढ़कर 2023-24 में 98,07,600, फिर 2024-25 में 1,01,22,420 और 2025-26 में 1,02,73,020 हो गई। यह चार सालों में 8.3% की बढ़ोतरी है, जिसमें शिक्षकों की संख्या एक करोड़ के आंकड़े को पार कर गई। प्राथमिक स्तर पर अब प्रति शिक्षक 10 छात्र है, जो 2022-23 में 11 था।
पढ़ाई जारी रखने वाले स्टूडेंट्स की संख्या भी बढ़ी
टीचर्स की बढ़ती उपलब्धता के चलते पहले जो बच्चे 14 साल की उम्र तक पढ़ाई छोड़ देते थे उन पर टीचर्स का ज्यादा ध्यान गया, इसके चलते स्टूडेंट्स का फॉलो-अप होता रहा। ऐसे में ज्यादातर छात्रों ने 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की और उन्होंने इसे बीच में नहीं छोड़ा।
ज्यादा शिक्षकों के चलते ड्रॉपआउट हुआ बेहतर
रिपोर्ट के अनुसार प्रिपरेटरी लेवल पर यह अनुपात 14 से घटकर 12, मिडिल स्कूल में 18 से 17 और सेकेंडरी लेवल पर 23 से 21 हो गया है। अब चारों लेवल पर अनुपात नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में बताए गए 30:1 के अनुपात के दायरे में है। यह सुधार धीरे-धीरे हुआ है, न कि अचानक: जैसे, प्रिपरेटरी PTR 14 से 13 और फिर 13 हुआ और आखिर में 12 पर स्थिर हो गया। इससे पता चलता है कि यह सुधार लगातार भर्ती करने से हुआ है, न कि एक बार में बड़े पैमाने पर भर्ती करने से।
ड्रॉपआउट और रिटेंशन के आंकड़े एक जैसे ट्रेंड को दिखाते हैं। प्रीपरेटरी लेवल पर ड्रॉपआउट 2022-23 में 8.7% से घटकर 3.7%, फिर 2.3% और अब 2025-26 में 1.8% हो गया है - यानी चार साल में लगभग 7 प्रतिशत अंकों की कमी आई है। इसी दौरान सेकेंडरी लेवल पर ड्रॉपआउट 13.8% से घटकर 7.0% हो गया, यानी लगभग आधा हो गया।
हालांकि इसके इतर मिडिल स्कूल में यह बढ़ता हुआ दिखाई दिया है। तीन साल तक लगातार 8.1% से 5.2% और फिर 3.5% तक गिरने के बाद, इस साल इसका ड्रॉपआउट रेट थोड़ा बढ़कर 3.5% से 3.6% हो गया। यह एकमात्र ऐसा लेवल है जहां चार साल का ट्रेंड जारी रहने के बजाय उलट गया।
क्या रहा रिटेंशन
रिटेंशन के आंकड़े भी भी मिले-जुले रहे हैं। सेकेंडरी रिटेंशन 47.2% से बढ़कर 51.9% हो गया, क्योंकि अब ज्यादातर स्कूल सेकेंडरी एजुकेशन प्रदान कर रहे हैं। मिडिल स्कूल रिटेंशन भी 82.8% से बढ़कर 83.7% हो गया, जो 2022-23 में 75.8% से शुरू हुई बढ़ोतरी को आगे बढ़ाता है। फाउंडेशनल रिटेंशन इस साल 98.9% से घटकर 98.5% हो गया, जबकि इससे पहले लगातार तीन साल तक इसमें बढ़ोतरी हुई थी। प्रीपरेटरी रिटेंशन भी 92.4% से घटकर 91.1% हो गया, लेकिन फाउंडेशनल लेवल के विपरीत इसका चार साल का सफर लगातार ऊपर की ओर नहीं था। 2023-24 में यह गिरकर 85.4% हो गया था, फिर अगले साल सुधरकर 92.4% पर पहुंच गया, यह 2022-23 में अपनी शुरुआती स्थिति (90.9%) से बस थोड़ा ही ऊपर है।
एनरोलमेंट एवं ट्रांजिशन
एनरोलमेंट और ट्रांजिशन के आंकड़े इस तस्वीर को और साफ करते हैं। इस साल सेकेंडरी GER 68.5% से बढ़कर 71.7% हो गया। चार साल के दौरान यह 2023-24 में गिरकर 66.5% हो गया था, लेकिन फिर वापस ऊपर चढ़कर 2022-23 के 67.6% के स्तर को पार कर गया। मिडिल GER चार साल से लगभग एक जैसा ही रहा है, जो 89.5% और 90.3% के बीच घूमता रहा और अब 89.6% पर स्थिर हो गया है। यानी स्कूल छोड़ने के बजाय अगले चरण में जाने वाले छात्रों का अनुपात हर पड़ाव पर बेहतर हुआ है। फाउंडेशनल से प्रिपरेटरी ट्रांजिशन 98.6% से बढ़कर 99.2% हो गया, प्रिपरेटरी से मिडिल 92.2% से बढ़कर 93.8% हो गया, और मिडिल से सेकेंडरी 86.6% से बढ़कर 88.3% हो गया। ये सभी आंकड़े पिछले चार सालों में अपने सबसे ऊंचे स्तर पर हैं।
सिंगल टीचर वाले स्कूलों की संख्या हुए काम
शिक्षकों की संख्या में बढ़ोतरी ने स्कूलों में स्टाफ की व्यवस्था को भी बदल दिया है। सिंगल टीचर स्कूल जहां एक ही व्यक्ति सभी ग्रेड और विषयों को संभालता है- 2025-26 में लगभग 3% घटकर 1,00,843 रह गए। यह गिरावट 2022-23 में 1,18,190 और उसके अगले साल 1,10,971 की संख्या से जारी रही। जीरो-एनरोलमेंट वाले स्कूलों की संख्या और भी तेजी से घटी है। एक ही साल में लगभग 29% की कमी के साथ यह 7,993 से घटकर 5,663 हो गई, हालांकि 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 12,954 हो गई थी, जिसके बाद इसमें तेजी से सुधार हुआ। रिपोर्ट में इन दोनों तरह की गिरावट का कारण UDISE+ डेटा के इस्तेमाल के तरीके को बताया गया है। इससे प्लानर्स को शिक्षकों को उन जगहों पर फिर से तैनात करने में मदद मिलती है जहां एनरोलमेंट के हिसाब से उनकी असल में जरूरत है, बजाय इसके कि छात्रों की संख्या के अनुपात में स्कूलों में जरूरत से ज़्यादा स्टाफ रखा जाए।
बेहतर सुविधाओं वाले क्लासरूम
वर्कफोर्स के साथ-साथ स्कूल का इंफ्रास्ट्रक्चर भी बेहतर हुआ है। कंप्यूटर की सुविधा 2022-23 में 47.7% से बढ़कर 2025-26 में 69.9% हो गई, जिसमें सबसे बड़ी एक साल की बढ़ोतरी 2023-24 में 9.5 प्रतिशत अंक की रही। इंटरनेट की सुविधा भी इसी तरह बढ़ी, जो इसी दौरान 49.7% से बढ़कर 67.4% हो गई। बुनियादी सुविधाएं अब लगभग हर जगह उपलब्ध हैं। 95.0% स्कूलों में बिजली है, जो पहले 91.7% थी; 99.5% में पीने का पानी है। 98.5% में लड़कियों के लिए और 97.2% में लड़कों के लिए शौचालय हैं। 96.9% में हाथ धोने की सुविधा है, जो चार साल पहले 94.1% थी। लाइब्रेरी की सुविधा भी लगातार बढ़ी है, जो 88.3% से बढ़कर 90.5% स्कूलों में उपलब्ध हो गई है।
खेल के मैदान वाले स्कूलों की संख्या घटी
कई क्षेत्रों में अच्छी चीजें देखने को मिलीं तो दो क्षेत्रों में इसमें गिरावट भी दर्ज की गई है। खेल के मैदान जो 81.9% स्कूलों में हैं, असल में पिछले साल के 83.0% से थोड़े कम हुए हैं, जिससे 2022-23 से चली आ रही लगातार बढ़ोतरी रुक गई। रेनवाटर हार्वेस्टिंग की सुविधा सिर्फ 29.9% स्कूलों में है, जबकि 2022-23 में यह 28.0% थी और तब से हर साल इसमें थोड़ी-थोड़ी बढ़ोतरी हुई है। दिव्यांग छात्रों के लिए रैंप और हैंडरेल की सुविधा 51.0% से बढ़कर 58.2% स्कूलों में हो गई है, हालांकि दस में से चार से ज्यादा स्कूलों में अभी भी ये सुविधाएं नहीं हैं।
महिलाओं का दबदबा
रिपोर्ट में महिलाओं का दबदबा देखने को मिला है। भारत के शिक्षकों में अब महिलाओं की हिस्सेदारी 54.9% है, जो चार साल पहले 52.3% और उसके अगले साल 53.3% थी यानी एक करोड़ से ज्यादा लोगों के वर्कफोर्स में ढाई प्रतिशत अंक से ज्यादा की लगातार बढ़ोतरी हुई है।
