'आंखों के सामने देखी मौत', नेपाल बाढ़ के बाद असम लौटे 8 मजदूरों ने बयां किया खौफनाक मंजर
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद फंसे असम के 8 मजदूर सकुशल भारत लौट आए हैं और उन्होंने अपने भयावह अनुभव साझा किए हैं।

नेपाल बाढ़ से लौटे असम के मजदूरों ने सुनाई खौफनाक दास्तान

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डिजिटल डेस्क, दिसपुर। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद वहां फंसे असम के 8 मजदूर सकुशल भारत लौट आए हैं। असम पहुंचे इन मजदूरों को राज्य सरकार और नेपाली अधिकारियों की मदद से सुरक्षित निकाला गया।
हालांकि, इस राहत के बीच भी कई परिवारों की चिंता बनी हुई है क्योंकि असम के 8 अन्य लोग अभी भी नेपाल में लापता हैं, जिनकी तलाश में राहत और बचाव अभियान जारी है।
'बिना खाना-पानी के पहाड़ियों पर काटे दिन'
सुरक्षित वापस लौटने वाले मजदूरों में पंकज बर्मन, गोपाल चंद देबनाथ, गौतम दास, समर बेज़बरुआ, सर्विसन मारक, सनेश्वर नर्ज़री, सिल्वा मारक और एलिप्सन संगमा शामिल हैं। ये सभी नेपाल के अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे।
नलबाड़ी के पंकज बर्मन ने आपदा के भयानक पलों को याद करते हुए बताया कि एक तेज आवाज सुनते ही उन्हें किसी अनहोनी का अहसास हुआ और वे बिना किसी जरूरी सामान के पहाड़ियों की ओर भागे।
प्रोजेक्ट पर काम कर रहे 13 मजदूरों ने बिना खाने और पीने के पानी के दो दिन ऊंची पहाड़ियों पर बिताए। बाद में सेना के हेलीकॉप्टर ने उन्हें देखकर भोजन सामग्री गिराई और फिर काठमांडू के रास्ते भारत भेजने का इंतजाम किया।
होजई निवासी गौतम दास ने अपने खौफनाक अनुभव को साझा करते हुए कहा, मैंने मौत को बहुत करीब से देखा और किसी तरह बचकर वापस आ गया।
लापता लोगों की तलाश जारी
जहां 8 मजदूर हवाई और सड़क मार्ग से होते हुए अपने-अपने जिलों में स्थित घरों के लिए रवाना हो चुके हैं, वहीं राज्य के 8 अन्य लोग अब भी लापता हैं।
इससे पहले मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने नेपाल आपदा के बाद असम के 16 लोगों के लापता होने की बात कही थी और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए थे।
असम सरकार के अधिकारियों के अनुसार, लापता लोगों के रिश्तेदारों ने हेल्पलाइन पर संपर्क किया है। नेपाली अधिकारियों के साथ तलाशी अभियान लगातार चलाया जा रहा है ताकि बाकी लोगों का भी जल्द पता लगाया जा सके।
