'आरक्षण हटाओ आंदोलन' के प्रतिनिधियों से मिले जेपी नड्डा, क्या बातचीत हुई?
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' के प्रतिनिधियों से मुलाकात की।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा (File Photo)
HighLights
जेपी नड्डा ने 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' प्रतिनिधियों से की मुलाकात।
आंदोलन की मुख्य मांग: आर्थिक आधार पर हो आरक्षण।
प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात को बताया सकारात्मक कदम।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जातिगत आरक्षण के खिलाफ हुए बड़े प्रदर्शन के बाद, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार को 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। यह संगठन देश में जाति आधारित आरक्षण को खत्म करने और इसमें पूर्ण बदलाव की मांग को लेकर बीते कुछ दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहा है।
इस मुलाकात के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर बताया कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत उन्होंने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों हर्ष दुबे, मृत्युंजय पाठक और रण बहादुर सिंह चौहान से सौहार्द पूर्ण वार्ता हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि इस सिलसिले में जल्द ही एक और बैठक की जाएगी। हालांकि, नड्डा ने इस बैठक के अंदरूनी ब्योरे को साझा नहीं किया है।
प्रतिनिधिमंडल ने इसे बताया सकारात्मक कदम
दूसरी ओर आरक्षण हटाओं आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल हर्ष दुबे ने इस मुलाकात को बातचीत की दिशा में एक अहम कदम बताया है। उन्होंने कहा कि आज समाज के कल्याण के लिए एक सकारात्मक पहल हुई है। हमारी टीम ने माननीय जेपी नड्डा जी से मुलाकात की, जिसमें 21 अगस्त को हुए प्रदर्शन पर संक्षिप्त चर्चा हुई। हम जल्द ही नड्डा जी से दोबारा मिलेंगे और समाज के हित में सकारात्मक और न्यायसंगत दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करेंगे।
हर्ष दुबे ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी भी वर्ग के खिलाफ जाना नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय हित में समान अवसरों, एक न्यायसंगत व्यवस्था और जरूरी सुधारों के लिए लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना है। इस संबंध में आगे के फैसले जल्द ही आधिकारिक रूप से साझा किए जाएंगे।
अगले साल विधानसभा चुनाव के नजरिए से अहम कैसे?
गौर करने वाली बाच यह है कि अगले साल की शुरूआत में ही उत्तर प्रदेश समेत कुछ राज्यों में चुनाव है। जाहिर है कि राजनीतिक दलों की ओर से भी आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दों को धार देने की कोशिश होगी। विपक्षी दल इस पर चुप है लेकिन भाजपा को अहसास है कि चुनावी मौसम में इसे और गरमाया जाएगा।
क्या खत्म हो सकता है आरक्षण?
ऐसे में जेपी नड्डा ने आंदोलन के प्रतिनिधि हर्ष दुबे, रण बहादुर सिंह चौहान व मृत्युंजय पाठक के साथ-साथ टीम के सदस्यों से मुलाकात कर शीघ्र मुलाकात का आश्वासन दिया है। हालांकि औपचारिक रूप से इस बारे में कुछ नहीं बताया गया लेकिन माना जा रहा है कि उन्हें स्पष्ट किया गया कि आरक्षण खत्म नहीं हो सकता है। मोदी सरकार ने भी संविधान द्वारा दिए गए आरक्षण को लेकर प्रतिबद्धता जताई है।
सामान्य वर्ग के लिए आगे क्या?
हां गौर करने वाली बात यह है कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए भी शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण किया गया है। लेकिन उनके लिए और क्या किया जा सकता है यह पूरे विचार विमर्श के बाद ही तय होगा। बताया जाता है कि यूजीसी के इक्विटी कमीशन के बारे में भी प्रतिनिधियों ने अपनी आपत्ति जताई। सरकार पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कह चुकी है कि वह इस पर पुनर्विचार करेगी।
समझिए आंदोलन की मुख्य मांगें क्या हैं?
बता दें कि 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' की मुख्य मांग है कि शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण का आधार सामाजिक या जातिगत पहचान के बजाय पूरी तरह से आर्थिक स्थिति होना चाहिए। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने 'एक परिवार, एक आरक्षण' की नीति लागू करने और यूजीसी (UGC) के 2026 के जाति-इक्विटी निर्देशों को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
जंतर-मंतर का हाल भी जानिए
हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर जातिगत आरक्षण के विरोध में भारी भीड़ इकट्ठा हुई थी, जिसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस और केंद्रीय बलों को तैनात करना पड़ा था।
गौरतलब है कि 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' (RHA) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक बेहद लोकप्रिय पेज है, जिसके 5.6 मिलियन (56 लाख) से अधिक फॉलोअर्स हैं। इस समूह ने ऑनलाइन कैंपेन के साथ-साथ अब आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ जमीनी स्तर पर भी प्रदर्शन तेज कर दिए हैं।
