Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    'हम प्रेशर ग्रुप बने रहेंगे, राजनीति में नहीं जाएंगे', अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के साथ मतभेद से किया इनकार

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 11:19 PM (GMT+05:30)

    अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी 'काकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) एक दबाव समूह बनी रहेगी, राजनीति में नहीं जाएगी। ...और पढ़ें

    सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके(फाइल फोटो)

    सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके(फाइल फोटो)

    HighLights

    1. सीजेपी राजनीतिक पार्टी नहीं, दबाव समूह बनी रहेगी।

    2. अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक से मतभेद नकारे।

    3. भाजपा पर प्रदर्शनों में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया।

    जेएनएन, नई दिल्ली। काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने साफ कर दिया है कि वे "प्रेशर ग्रुप" बने रहेंगे और राजनीति में नहीं जाएंगे। उन्होंने हालिया प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के लिए जहां भाजपा पर आरोप लगाए तो वहीं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ मतभेदों से इनकार किया और कहा कि उनके त्याग को कभी भूला नहीं जा सकता।

    सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में संगठन के भविष्य की दिशा के बारे में पूछे जाने पर कहा कि भले लोकप्रियता बढ़ रही है, लेकिन यह संगठन राजनीतिक पार्टी के रूप में तब्दील नहीं होगा। चुनावों में हिस्सा लेने के बजाय यह एक राजनीतिक दबाव समूह के रूप में कार्य करता रहेगा।

    जब उनसे सीजेपी और वांगचुक के बीच किसी मतभेद के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इन अटकलों को खारिज कर दिया। यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि आंदोलन के समापन के दौरान वांगचुक का नाम नहीं लिया गया था। दीपके ने कहा, "नहीं, ऐसा नहीं है। मेरी उनसे फोन पर बात होती है।" उन्होंने कहा कि वांगचुक सर के त्याग को भूला नहीं जा सकता।

    उन्होंने अपनी जान जोखिम में डाल दी थी और 26 दिन तक भूख हड़ताल पर रहे। उनकी भूख हड़ताल के बिना शिक्षा मंत्री धर्मेंद प्रधान का इस्तीफा संभव नहीं था। दीपके ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से वांगचुक से भूख हड़ताल समाप्त करने का आग्रह किया था। उन्होंने बात मान ली तो राहत मिली।

    खबरें और भी

    दीपके से जब यह पूछा गया कि क्या उन्हें इस बात का दुख हुआ कि वांगचुक ने भाजपा नेताओं जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में अनशन तोड़ी। उन्होंने कहा, "मुझे इससे कोई परेशानी नहीं हुई, लेकिन इस बात को लेकर निराशा हुई थी कि जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को उनसे मिलने की अनुमति दी गई लेकिन मुझे उनसे मिलने की इजाजत नहीं मिली।"

    दीपके ने यह भी आरोप लगाया कि वांगचुक को एक तरह से अपहरण करके लाया गया था। उन्हें वहां ले जाने के बाद न तो विपक्ष के नेताओं और न ही सीजेपी के सदस्यों को उनसे मिलने दिया गया।

    दीपके ने प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को लेकर भाजपा के खिलाफ अपने आरोपों को दोहराया और कहा कि आंदोलन को पटरी से उतारने का प्रयास किया गया था। उन्होंने दावा किया कि छात्रों को निशाना बनाने और प्रर्दशनों में शामिल लोगों को डराने-धमकाने के लिए अपराधियों का इस्तेमाल किया गया था।