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'बेंगलुरु को गुरुग्राम की बदहाली से बचने और ग्रेटर नोएडा से सीखने की नसीहत', सुप्रीम कोर्ट की दो टूक

Published: Wed, 23 Sep 2026 05:59 AM (IST)Updated: Wed, 23 Sep 2026 07:02 AM (IST)

सीजेआई सूर्यकांत ने मंगलवार को कहा कि गुरुग्राम में बारिश या प्राकृतिक आपदा के दौरान व्यवस्था इसलिए चरमरा जाती है ...और पढ़ें

सीजेआई बोले- बेहतर योजना से शहर ग्रेटर नोएडा बनते हैं, वरना बारिश में गुरुग्राम सा होता है हाल

सीजेआई बोले- बेहतर योजना से शहर ग्रेटर नोएडा बनते हैं, वरना बारिश में गुरुग्राम सा होता है हाल

HighLights

  1. सीजेआइ बोले— बेहतर योजना से शहर ग्रेटर नोएडा बनते हैं, वरना बारिश में गुरुग्राम सा होता है हाल

  2. सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, प्रीमियम एफएआर के जरिये अवैध निर्माण को नियमित करने की कोशिश न हो

पीटीआई, नई दिल्ली। शहरों का विकास सिर्फ ऊंची इमारतें खड़ी करने से नहीं होता। सड़कों, सीवर, जल निकासी, पार्किंग और सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाएं भी उसी रफ्तार से बढ़नी चाहिए। इसी बात पर सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु के बढ़ते शहरीकरण को लेकर चिंता जताते हुए गुरुग्राम और ग्रेटर नोएडा का उदाहरण दिया।

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने मंगलवार को कहा कि गुरुग्राम में बारिश या प्राकृतिक आपदा के दौरान व्यवस्था इसलिए चरमरा जाती है क्योंकि वहां प्लाट और बहुमंजिली इमारतों का बोझ तो बढ़ता गया, लेकिन उसके अनुरूप ड्रेनेज, सीवेज और दूसरी बुनियादी सुविधाओं पर निवेश नहीं हुआ।

इसके विपरीत उन्होंने ग्रेटर नोएडा का उदाहरण देते हुए कहा कि इसे अगले 30-40 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया गया था।

कोर्ट की यह टिप्पणी कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान आई, जिसमें राज्य सरकार की प्रीमियम फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) योजना को सही ठहराया गया था।

सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता ‘सिटिजंस एक्शन फोरम’ की याचिका पर नोटिस जारी किया। हालांकि, पीठ ने साफ कर दिया कि अतिरिक्त एफएआर का इस्तेमाल किसी अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

प्रीमियम एफएआर योजना के तहत संपत्ति मालिक तय प्रीमियम देकर सामान्य रूप से मंजूर एफएआर से अधिक निर्माण अधिकार खरीद सकते हैं। इसका उद्देश्य शहरों में ऊंचाई की ओर विकास को बढ़ावा देना और शहरी निकायों के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाना है।

एफएआर किसी भूखंड के आकार और उस पर बनाए जा सकने वाले कुल फ्लोर एरिया के बीच का अनुपात होता है। एफएआर बढ़ने का सीधा मतलब है कि एक ही भूखंड पर अधिक निर्माण की अनुमति मिल सकती है।