विजय के फ्लोर टेस्ट के बाद AIADMK में फूट: बागी गुट ने खोला मोर्चा, क्या तमिलनाडु में भी शिवसेना जैसा ही संकट आने वाला है?
चेन्नई में अन्नाद्रमुक के भीतर सियासी संग्राम गहरा गया है, जहां फ्लोर टेस्ट के बाद पलानीस्वामी और बागी गुट के बीच टकराव बढ़ गया है। बागी विधायकों ने प ...और पढ़ें

तमिलनाडु में AIADMK का आंतरिक संकट (फाइल फोटो)
HighLights
फ्लोर टेस्ट के बाद अन्नाद्रमुक में खुली बगावत
पलानीस्वामी ने बागी विधायकों को पार्टी पदों से हटाया
बागी गुट ने पलानीस्वामी के खिलाफ अयोग्यता मांगी
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चेन्नई में अन्नाद्रमुक के भीतर सियासी संग्राम अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी महासचिव एडप्पाडी के पलानीस्वामी और बागी गुट के बीच टकराव गुरुवार को और गहरा गया। पार्टी के दो वरिष्ठ नेता सीवी शनमुगम और एसपी वेलुमणि अपने समर्थक विधायकों और नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकों में जुटे और आगे की रणनीति पर मंथन किया।
दरअसल, तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को हुए फ्लोर टेस्ट के दौरान अन्नाद्रमुक में खुली बगावत देखने को मिली। बागी गुट के 25 विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर सत्तारूढ़ टीवीके सरकार के पक्ष में मतदान किया। इसके बाद पलानीस्वामी ने कड़ा कदम उठाते हुए शनमुगम, वेलुमणि समेत कई नेताओं और विधायकों को पार्टी पदों से हटा दिया।अब सियासी लड़ाई कानूनी मोर्चे तक पहुंच गई है। शनमुगम-वेलुमणि गुट ने विधानसभा अध्यक्ष से पलानीस्वामी और उनके समर्थक 22 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है।
बागी गुट का दावा है कि फ्लोर टेस्ट के दौरान पार्टी व्हिप का पालन 25 विधायकों ने किया, जबकि पलानीस्वामी गुट ने निर्देशों की अनदेखी की।पार्टी सूत्रों के मुताबिक शनमुगम-वेलुमणि खेमे का दावा है कि उनके पास पलानीस्वामी से अधिक विधायकों का समर्थन है। यही वजह है कि यह गुट दोबारा जनरल काउंसिल बैठक बुलाने की मांग भी उठा सकता है।
शनमुगम ने साफ कहा कि जब तक उनके गुट को न्याय नहीं मिलता, तब तक वे पार्टी मुख्यालय नहीं जाएंगे। स्टालिन ने ली हार की जिम्मेदारीइस बीच एमके स्टालिन ने द्रमुक की चुनावी हार की जिम्मेदारी खुद लेते हुए कहा कि उनकी पार्टी हार के बाद भी अपने विधायकों को रिसार्ट में छिपाने वाली राजनीति नहीं करती।
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उन्होंने अन्नाद्रमुक पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी के भीतर की स्थिति देखकर आगे क्या होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।अन्नाद्रमुक मुख्यालय पर कड़ी सुरक्षाइसी बीच, चेन्नई स्थित अन्नाद्रमुक मुख्यालय के बाहर गुरुवार को भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पार्टी में बढ़ते विवाद और दो गुटों के आमने-सामने आने के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क दिखाई दिया। पुलिस को आशंका है कि 2022 की तरह फिर से ¨हसक झड़प हो सकती है। उस समय नेतृत्व विवाद के दौरान पार्टी मुख्यालय में तोड़फोड़ और हंगामा हुआ था। इसी कारण इस बार अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
आगे क्या?
तमिलनाडु विधानसभा में AIADMK में हुई टूट के बाद पार्टी के विधायी नेता ई. पलानीस्वामी बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद स्पीकर जेसीडी प्रभाकर को यह तय करना होगा कि क्या बागी विधायकों ने दसवीं अनुसूची के तहत पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया है।
हालांकि, स्पीकर का कोई भी फैसला अदालत में चुनौती दिए जाने की संभावना है।
इसी बीच, AIADMK और उसके चुनाव चिन्ह “दो पत्तियां” (Two Leaves) पर नियंत्रण को लेकर लड़ाई आखिरकार चुनाव आयोग तक पहुंच सकती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि दलबदल विरोधी कानून के तहत स्पीकर के फैसले चुनाव आयोग पर बाध्यकारी नहीं होते।
शिवसेना मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अगर AIADMK पर नियंत्रण को लेकर कानूनी लड़ाई अदालत तक पहुंचती है, तो उसका आधार 2023 में शिवसेना विभाजन मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का फैसला हो सकता है।
“शिवसेना बनाम शिवसेना” मामले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि सदन में व्हिप और नेता नियुक्त करने का अधिकार केवल विधायक दल को नहीं, बल्कि मूल राजनीतिक पार्टी को होता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि केवल ज्यादा विधायकों के समर्थन के आधार पर स्पीकर किसी गुट को “असली” पार्टी नहीं मान सकते। इसके बजाय स्पीकर को मूल राजनीतिक दल की संरचना और संविधान की जांच करनी होगी।