वर्ल्ड ऑर्डर में बदलाव के रूप में देखा जा रहा ब्रिक्स समिट, विदेशी मीडिया में हो रही खूब चर्चा
नई दिल्ली में हो रहे दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को विदेशी मीडिया विश्व व्यवस्था में बदलाव के रूप में ...और पढ़ें

विदेशी मीडिया ने ब्रिक्स समिट को विश्व व्यवस्था में बदलाव बताया
HighLights
भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन
विदेशी मीडिया ने ब्रिक्स समिट को विश्व व्यवस्था में बदलाव बताया
विदेशी पत्रकारों ने भारतीय आतिथ्य और संस्कृति की भूरी-भूरी प्रशंसा की
आईएएनएस, नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में शनिवार से दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन हो रहा है। इसमें चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत ब्रिक्स के सदस्य देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं।
ऐसे नेताओं के जुटान पर विदेशी मीडिया की नजर होना स्वाभाविक है। इस समिट को वर्ल्ड आर्डर में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी मीडिया में भी ब्रिक्स समिट की खूब चर्चा है। वहां का मीडिया तो इस सम्मेलन को बदलते समीकरण की झलक के रूप में देख रहा है।
अमेरिकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस सम्मेलन में सबसे अहम सवाल यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग में से कौन विकासशील दुनिया की अधिक प्रभावशाली आवाज बनकर उभरेगा।
अखबार यह भी लिखता है कि युद्ध, ऊर्जा की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी टैरिफ और एआइ को लेकर चिंताएं देशों को वाशिंगटन और बीजिंग के साथ अपने संबंधों पर फिर से सोचने के लिए मजबूर कर रही हैं।
वाल स्ट्रीट जर्नल ने कहा कि अमेरिका के साथ भारत और चीन के संबंधों में अनिश्चितता ने इन दोनों परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसी देशों के लिए तनाव कम करने का मौका दिया है।
यह अखबार आगे कहता है कि भारत और चीन के संबंधों में कोई भी प्रगति सीमा विवाद के अनसुलझे रहने, पाकिस्तान के साथ चीन के करीबी रिश्तों और हिंद महासागर में सुरक्षा प्रतिस्पर्धा की वजह से सीमित है। जबकि वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में इस सम्मेलन को भारत के लिए संतुलना बनाने का कठिन काम बताया है।
भारत घर जैसा लगता है, यहां मिला अपनापन
वैश्विक पत्रकारों ने आतिथ्य सत्कार को सराहाब्रिक्स शिखर सम्मेलन को कवर करने पहुंचे विदेशी पत्रकारों ने भारत की मेहमाननवाजी और संस्कृति की भूरी-भूरी प्रशंसा की है। दुनिया के अलग-अलग कोनों से आए इन मीडियाकर्मियों का कहना है कि एक अरब से अधिक की आबादी वाले इस देश में होने के बावजूद उन्हें कभी यह अहसास नहीं हुआ कि वे अपने घर से दूर हैं।
टीवी ब्रिक्स अफ्रीका की मेलिसा हालो ने अपने पहले भारत दौरे को बेहद खूबसूरत अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन से पहले मंदिरों के दर्शन और स्थानीय सैर के दौरान उन्हें अद्भुत शांति का अनुभव हुआ। करोड़ों लोगों की आबादी के बीच भी उन्हें जरा भी अजनबीपन महसूस नहीं हुआ क्योंकि यहां के लोग बेहद मददगार हैं।
वहीं, इसी मीडिया संस्थान के शाद्रक हालो ने भारतीय व्यंजनों की तारीफ करते हुए कहा कि तंदूरी चिकन समेत हर एक बाइट उनके लिए स्वादिष्ट और रंगीन अनुभव रही।
खलीज टाइम्स की वरिष्ठ पत्रकार अलिया मोहम्मद ओबैद अली अल धन्हानी ने भी ब्रिक्स सम्मेलन के शानदार और सुव्यवस्थित आयोजन के साथ-साथ भारतीय आतिथ्य की खुलकर सराहना की।
मलेशियाई पत्रकार यास्मीन नताशा देश की आर्थिक तरक्की और तेजी से फैलते परिवहन तंत्र को देखकर हैरान रह गईं। इसके अलावा, इंडोनेशियाई पत्रकार मेगा मेई वाहिदावती ने दोनों देशों के बीच प्राचीन और गहरे सांस्कृतिक रिश्तों को रेखांकित किया।
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