'PM की मंशा पर संदेह गलत', केंद्र ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के कानून का सुप्रीम कोर्ट में किया बचाव
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून का बचाव किया। ...और पढ़ें
-1785434673772_m.webp)
केंद्र ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कानून का सुप्रीम कोर्ट में बचाव किया

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया को विनियमित करने से संबंधी कानून का गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में बचाव किया।
केंद्र ने शीर्ष अदालत से कहा कि यह मान लेना गलत होगा कि चयन प्रक्रिया में संख्या के हिसाब से बहुमत होने के कारण प्रधानमंत्री और अन्य मंत्री गलत मंशा से या लोकतंत्र के खिलाफ काम करेंगे।
तुषार मेहता ने SC के सामने दी दलील
सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष यह दलील दी कि प्रधानमंत्री कार्यालय की गरिमा है और चयन समिति के निर्णय पर संदेह करना निर्वाचित संस्थाओं में जताए गए संवैधानिक विश्वास को कमजोर करना होगा।
मेहता ने जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ से कहा, 'अगर उनके निर्णय पर भरोसा नहीं किया जा सकता और इसे गलत मंशा से लिया गया फैसला माना जाता है तो ऐसा प्रविधान क्यों न हो कि अपनी कैबिनेट चुनते समय भी उन्हें किसी पूर्व जज या बाहरी व्यक्ति से सलाह लेनी चाहिए।'
2023 की संवैधानिक वैधता को चुनौती
शीर्ष अदालत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।
इसमें चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली चयन समिति से चीफ जस्टिस आफ इंडिया (सीजेआइ) को बाहर रखा गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कानून चुनाव आयोग जैसी महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था की स्वायत्ता से जुड़े सवाल खड़े करता है।
मेहता ने कहा कि इस मामले को संविधान के अनुच्छेद 145(3) के तहत एक बड़ी पीठ को भेजा जाना चाहिए, क्योंकि इसमें संवैधानिक व्याख्या से जुड़ा कानून का एक महत्वपूर्ण सवाल शामिल है।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)