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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 11, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अगले कुछ दिन सांस लेना भी होगा मुश्किल, CSE की इस रिपोर्ट में बड़ी चेतावनी

By Ashish PandeyEdited By:
Published: Thu, 11 Nov 2021 11:12 AM (IST)Updated: Thu, 11 Nov 2021 01:24 PM (IST)

CSE की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस सीजन में पहली बार धुंध की एक मोटी चादर अगले सात दिनों तक ...और पढ़ें

दिल्ली NCR में अगले कुछ दिन आपको घने स्मॉग का सामना करना पड़ सकता है
दिल्ली NCR में अगले कुछ दिन आपको घने स्मॉग का सामना करना पड़ सकता है

नई दिल्ली। अगर आप दिल्ली एनसीआर में रहते हैं तो अगले कुछ दिन आपको घने स्मॉग का सामना करना पड़ सकता है। सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरमेंट CSE की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस सीजन में पहली बार धुंध की एक मोटी चादर अगले सात दिनों तक पूरे इंडो गैंजेटिक प्लेन में देखी जाएगी। इस धुंध का प्रमुख कारण दिवाली पर जलाए गए पटाखे और पराली जलाने से निकला धुआं और बदलता मौसम है। इस साल पिछले चार सालों में पराली का धुंआ सबसे कम दर्ज किया जा रहा है।

दिल्ली और एनसीआर में दर्ज किए जाने वाली धुंध में PM 2.5 के अलावा बड़े पैमाने पर ओजोन, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड सहित जहरीली गैसों का घातक मिश्रण दर्ज किया जा रहा है। 2017 के बाद से दिवाली की रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक हवा में पीएम 2.5 का स्तर सबसे अधिक रहा। वहीं हवा में सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड का अनुपात भी काफी अधिक रहा है, जो पटाखों के प्रभाव को दर्शाता है।

सीएसएई के मुताबिक हवा में घने स्मॉग को देखते हुए तुरंत आपातकालीन कदम उठाए जाने की जरूरत है ताकि प्रदूषण को और अधिक बढ़ने से रोका जा सके। वहीं सरकारों को एक दीर्धकालिक पॉलिसी अपनाने की भी जरूरत है।

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दिल्ली की हवा में PM 2.5 का औसत स्तर 250 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक बना हुआ है। 05 नवम्बर को हवा में PM 2.5 का स्तर 501 माइम्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया था। मानकों के तहत हवा में PM 2.5 का स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। 8 नवम्बर तक हवा में PM 2.5 का स्तर घट कर 256 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक आ गया। लेकिन अब भी ये खतरनाक स्तरों के ऊपर बना हुआ है।

इस साल आठ नवम्बर को हवा में पराली के धुएं का स्तर पिछले चार सालों में सबसे कम दर्ज किया गया। इस साल आठ नवम्बर को हवा में इसका स्तर 12 फीसदी रहा। 2020 में हवा में इसका स्तर 17 फीसदी था। वहीं 2019 में 14 फीसदी और 2018 में 16 फीसदी था।

दिल्ली की हवा में स्मॉग का स्तर सबसे अधिक 7 नवम्बर को रहा। ये 48 फीसदी तक पहुंच गया था। ये दिल्ली की हवा में प्रदूषण के स्तर पर नजर रखने वाली संस्था SAFAR के बनने के बाद 2018 में सबसे अधिक था। 5 नवम्बर को दिल्ली की हवा में स्मॉग का स्तर 58 फीसदी पर पहुंच गया था।

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हवा में बढ़ीं खतरनाक गैसें

सीएसई की रिपोर्ट के मुतबाकि प्रदूषण के चलते दिल्ली की हवा में खतरनाक गैसों का स्तर भी लगातार बढ़ रहा है। हवा में ओजोन गैस का स्तर मानकों से अधिक दर्ज किया जा रहा हे। वहीं स्मॉग के चलते हवा में कार्बन मोनो ऑक्साइड का स्तर भी मानकों से अधिक बना हुआ है।

पिछले पांच सालों में सबसे प्रदूषित रही दिवाली की रात

सीएसई की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच सालों में इस साल दिवाली की रात 8 बजे से अगले दिन सुबह 8 बजे तक हवा में प्रदूषण का स्तर काफी अधिक रहा। पिछले पांच सालों में इस दौरान हवा में PM 2.5 का औसत स्तर 747 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा जो 2020 की तुलना में 22 फीसदी तक अधिक है। वहीं दिवाली की रात हवा में PM 2.5 का ये स्तर सामान्य स्तर से 4.5 गुना ज्यादा है।

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