'हम नए सिरे से टेस्ट करना चाहते हैं', ग्रीन पटाखों को लेकर सरकारी संस्थाओं में मतभेद के बाद SC से बोला केंद्र
ग्रीन पटाखों में बेरियम के इस्तेमाल पर सरकारी संस्थाओं CSIR-NEERI और CPCB के मतभेद के बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम ...और पढ़ें

ग्रीन क्रैकर्स को लेकर फिर से जांच करेगी केंद्र सरकार।
HighLights
केंद्र सरकार ग्रीन पटाखों में बेरियम का फिर से टेस्ट करेगी।
CSIR-NEERI और CPCB के बीच बेरियम पर मतभेद था।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को विशेषज्ञों से सलाह लेने को कहा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अगली पीढ़ी के ग्रीन पटाखों के कमर्शियल प्रोडक्शन को लेकर दो सरकारी संस्थाओं काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च-NEERI (जिसने नए फॉर्मूले को मंजूरी दी) और सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (जिसने आपत्ति जताई) के अलग-अलग रुख के बाद केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह बेरियम के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान का पता लगाने के लिए नए सिरे से टेस्ट करना चाहती है।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच को बताया कि सरकार ने स्टेकहोल्डर्स से बातचीत के बाद नई दिल्ली, भोपाल, कोलकाता और चेन्नई में ये टेस्ट करने का फैसला किया है।
केंद्र ने सरकारी संस्था से क्या कहा था?
केंद्र सरकार ने CSIR-NEERI से कहा था कि वह मैन्युफैक्चरर्स के साथ मिलकर ऐसे ग्रीन/कम-एमिशन वाले पटाखे बनाए जिनसे पार्टिकुलेट मैटर (PM) का उत्सर्जन 50% से ज्यादा कम हो। तमिलनाडु फायरवर्क्स एंड एमोर्सेस मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (Tanfama) ने बेरियम सॉल्ट/नाइट्रेट की कम मात्रा और दूसरे ऑक्सीडाइजर के साथ नई पीढ़ी के पटाखे बनाने का फॉर्मूला तैयार किया।
रिपोर्ट में सीएसआईआर-NEERI ने क्या कहा?
एक रिपोर्ट में CSIR-NEERI ने कहा कि नए फॉर्मूले से PM10 और PM2.5 के उत्सर्जन में 45% से 60% तक की कमी आई है। साथ ही उसने सुझाव दिया कि रोशनी वाले पटाखों (जैसे फ्लावरपॉट, स्पार्कलर्स, चकरी, पेंसिल, ट्विंकलिंग स्टार्स और इनके हाइब्रिड) के फॉर्मूले पर कमर्शियल प्रोडक्शन के लिए विचार किया जाना चाहिए। इसने जुड़े हुए पटाखों (जिन्हें लड़ी कहा जाता है) के निर्माण को भी मंजूरी दी, जिन पर कोर्ट के आदेश से रोक लगी हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जुड़े हुए पटाखों से पीएम उत्सर्जन में लगभग 30% और सॉलिड वेस्ट (ठोस कचरे) के उत्पादन में 32% तक की कमी आई है। सीपीसीबी ने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने बेरियम नाइट्रेट पर रोक लगा रखी है तो पटाखों में इसका इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।
वहीं, सरकार को भेजे अपने संदेश में CPCB ने कहा, "इस कोर्ट ने 23 अक्टूबर 2018 के आदेश के जरिए पटाखों में बेरियम सॉल्ट के इस्तेमाल पर साफ तौर पर रोक लगाई है। इसलिए, बेरियम कंपाउंड वाले किसी भी फॉर्मूले का इस्तेमाल उस आदेश का उल्लंघन है।"
इसने आगे कहा, "PM10 और PM2.5 के स्तर में बताई गई कमी की तुलना (i) बेहतर कम-एमिशन वाले पटाखों और (ii) बिना बेरियम वाले ग्रीन पटाखों से नहीं की गई है, जिससे यह दावा अधूरा और अनिर्णायक हो जाता है।"
जिन याचिकाकर्ताओं की अर्जी पर प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों पर रोक लगाई गई थी, उन्होंने कहा कि कोर्ट ने पिछले कुछ सालों में बेरियम के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए आठ आदेश दिए हैं और पटाखे बनाने में इसके इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह इस बारे में विशेषज्ञों से सुझाव ले, क्योंकि कोर्ट के पास इन मामलों में कोई विशेषज्ञता नहीं है।
