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BRICS समिट 2026: शी चिनफिंग के भारत आने पर सस्पेंस बरकरार, चीनी विदेश मंत्रालय बोला- पुख्ता जानकारी नहीं

Published: Thu, 10 Sep 2026 03:08 PM (IST)

भारत में होने वाली ब्रिक्स समिट में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भागीदारी पर सस्पेंस बरकरार है, क्योंकि बीजिंग ने अभी तक उनकी यात्रा की पुष्टि नहीं की है।

शी चिनफिंग के भारत दौरे को लेकर संस्पेंस बरकरार। (फाइल फोटो।)

शी चिनफिंग के भारत दौरे को लेकर संस्पेंस बरकरार। (फाइल फोटो।)

HighLights

  1. शी चिनफिंग की ब्रिक्स समिट में भारत यात्रा पर अनिश्चितता।

  2. चीन विदेश मंत्रालय ने राष्ट्रपति के भारत दौरे की पुष्टि नहीं की।

  3. भारत-चीन संबंध व्यापारिक सुधारों के बावजूद भरोसे की कमी से जूझ रहे।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में होने वाली ब्रिक्स समिट का काउंटडाउन शुरू हो चुका है, लेकिन चीन ने राष्ट्रपति शी चिनफिंग के भारत दौरे को लेकर सस्पेंस बनाए रखा है। बीजिंग ने अभी तक उनकी यात्रा की पुष्टि नहीं की है और इस बारे में भी कोई जानकारी नहीं है कि क्या उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कोई बैठक होगी।

जब राष्ट्रपति के प्लान के बारे में पूछा गया तो चीन के विदेश मंत्रालय ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि उनके पास इन प्लान के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। अगर चिनफिंग सालाना समिट में शामिल होने का फैसला करते हैं तो यह सात सालों में उनकी भारत की पहली यात्रा होगी।

भारत-चीन के रिश्ते

चीन और भारत के बीच हुई 1962 की जंग के बाद से दोनों देशों के रिश्ते सतर्कता भरे रहे हैं। 2020 में गलवान घाटी में हुई सीमा झड़प के बाद ये रिश्ते और खराब हो गए। इस झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद गए थे और चीनी सैनिकों की संख्या का पता नहीं चल पाया था।

फिर भी हाल के वर्षों में संबंध बेहतर हुए हैं। खासकर पिछले साल पीएम मोदी की चीन यात्रा के बाद और ऐसे समय में जब दोनों देश अमेरिका के साथ उतार-चढ़ाव भरे रिश्तों से जूझ रहे हैं। तब से नई दिल्ली ने 2020 की झड़पों के बाद चीनी निवेश पर लगाई गई कुछ पाबंदियों में ढील दी है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, कैपिटल गुड्स और सोलर सेल सेक्टर पर ध्यान दिया गया है।

व्यापारिक संबंध बेहतर बनाने की कोशिश

सरकार कुछ इंडस्ट्रीज में भारतीय और चीनी कंपनियों के बीच जॉइंट वेंचर के लिए तेजी से मंजूरी देने पर भी विचार कर रही है। चीन के विदेश मंत्रालय ने रॉयटर्स को बताया कि राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि दोनों देश पार्टनर हैं, कॉम्पिटिटर नहीं और वे एक-दूसरे के विकास के लिए मौके हैं, न कि खतरा।

सूत्रों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि भारत में चीनी कंपनियों के प्रस्तावित निवेश की बीजिंग की तरफ से ही ज्यादा बारीकी से जांच की जा रही है, खासकर उन सेक्टर में जिनमें एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और हाई-एंड टेक्नोलॉजी शामिल हो सकती है।

इसके बावजूद चीनी कस्टम्स डेटा के अनुसार, पिछले साल दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार 12.4 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 155 अरब डॉलर हो गया, जो 10 साल पहले दर्ज किए गए 71.6 अरब डॉलर के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। इस साल के पहले सात महीनों में व्यापार में एक साल पहले की इसी अवधि की तुलना में 23 प्रतिशत की और बढ़ोतरी हुई।

भरोसे की कमी

जानकारों का कहना है कि दोनों देशों में कारोबारियों को अब भी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें नियमों की वजह से अटके निवेश, वीजा में देरी और औद्योगिक उपकरणों पर लगी पाबंदियां शामिल हैं। ये बातें कूटनीतिक प्रगति और आर्थिक रिश्तों के बीच के अंतर को दिखाती हैं।

उन्होंने कहा कि शी चिनफिंग और पीएम मोदी के बीच संभावित मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों की भविष्य की दिशा तय करने के लिए बहुत अहम होगी। शंघाई की फुदान यूनिवर्सिटी में दक्षिण एशिया मामलों के जानकार और नई दिल्ली में चीनी दूतावास के पूर्व राजनयिक लिन मिनवांग ने रॉयटर्स को बताया, "चीन निश्चित रूप से संबंध बेहतर करना चाहता है, लेकिन हम यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि भारत असल में किस हद तक उन्हें बेहतर करने के लिए तैयार है।"

मिनवांग ने कहा कि किसी बड़ी प्रगति की संभावना कम है। नई दिल्ली के ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन थिंक टैंक के वाइस प्रेसिडेंट हर्ष पंत ने भी कहा कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी बहुत ज्यादा है। उन्होंने रॉयटर्स से कहा, "चीन के पास आर्थिक ताकत है और इसका इस्तेमाल करके एक भरोसेमंद पार्टनर के तौर पर उभरने का अच्छा मौका है, खासकर तब जब दोनों देश अमेरिका की व्यापार नीतियों से प्रभावित हैं।"

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