आम आदमी को लगेगा महंगाई का झटका! बफर स्टॉक का 30% प्याज सड़कर बर्बाद, बढ़ सकती है कीमत
गर्मी के प्याज के बफर स्टॉक का 30% सड़ने से कीमतों में वृद्धि हुई है, जिसके चलते केंद्र ने दिल्ली के लिए 'कांदा एक्सप्रेस' भेजी। खरीफ फसल में देरी से आने वाले महीनों में प्याज की कीमतें बढ़ने की आशंका है।

प्याज की कीमतें बढ़ने का अनुमान। (फोटो- एएनआई।)
HighLights
गर्मी के प्याज का 30% बफर स्टॉक सड़कर बर्बाद हुआ।
500 टन प्याज लेकर 'कांदा एक्सप्रेस' दिल्ली रवाना हुई।
खरीफ प्याज की बुवाई में देरी, अक्टूबर में कमी की आशंका।
डिजिटल डेस्क, नासिक। इस साल खरीदे गए 1.2 लाख टन गर्मी के मौसम वाले प्याज में से लगभग 30% प्याज सड़ने और अंकुरित होने के कारण पहले ही खराब हो चुका है। इस बीच केंद्र के बफर स्टॉक से 500 टन प्याज लेकर स्पेशल ट्रेन कांदा एक्सप्रेस बुधवार दोपहर करीब 3.30 बजे लासलगांव से दिल्ली के लिए रवाना हुई। ऐसे में प्याज को लेकर चिंता बढ़ गई है।
नाफेड (Nafed) के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, "हालात बिगड़ने की मुख्य वजह कटाई के मौसम में बेमौसम बारिश थी, जिससे प्याज की क्वालिटी खराब हुई और उसकी शेल्फ-लाइफ (रखे रहने की क्षमता) कम हो गई और लंबे समय तक स्टोर करना मुश्किल हो गया। आम तौर पर हर साल लगभग 20% प्याज खराब हो जाता है लेकिन इस साल यह आंकड़ा 40% तक पहुंच सकता है।"
प्याज लेकर कांदा एक्सप्रेस दिल्ली के लिए रवाना
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि प्याज ले जाने वाली ट्रेन मंगलवार को रवाना होने वाली थी लेकिन ग्रेडिंग और सॉर्टिंग के काम में देरी की वजह से यह लगभग 24 घंटे देर से निकली। लासलगांव रेलवे स्टेशन के स्टेशन मैनेजर प्रीतिश दुबे ने कहा, "कांदा एक्सप्रेस लगभग 500 टन प्याज लेकर लासलगांव से रवाना हुई है और इसके 24 घंटे के भीतर दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है।"
प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच एक्शन में केंद्र सरकार
कई शहरों में प्याज की खुदरा कीमतें 50-65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने के बाद केंद्र सरकार ने बाजार में दखल देते हुए यह ट्रेन सेवा शुरू की है। रेलवे से ट्रांसपोर्ट के अलावा केंद्र सरकार अपनी खरीद एजेंसियों नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन (NCCF) के जरिए सड़क मार्ग से भी प्याज भेज रही है।
अधिकारियों ने बताया कि नाफेड ने मंगलवार रात ट्रक से दिल्ली के लिए 30 टन प्याज भेजा, जबकि एनसीसीएफ ने बुधवार शाम को 30 टन प्याज की एक और खेप भेजी। सूत्रों ने बताया कि कोलकाता और चेन्नई के लिए भी ऐसी ही प्याज ट्रेन चलाने की योजना बनाई जा रही है। अधिकारी बड़े खपत वाले इलाकों में सप्लाई बेहतर करने और कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने पहले ही घोषणा कर दी है कि कांदा एक्सप्रेस पहल के तहत लाई गई प्याज को दिल्ली में नाफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार के आउटलेट्स के जरिए 35 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी वाली दर पर बेचा जाएगा। मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में रेल से चेन्नई, एर्नाकुलम, मदुरै और गुवाहाटी में भी प्याज भेजी जाएगी।
बफर स्टॉक पर दबाव
केंद्र ने गर्मियों में 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था, लेकिन नाफेड और एनसीसीएफ मिलकर सिर्फ 1.20 लाख टन ही खरीद पाए और ये लक्ष्य से बहुत कम है। इस साल बफर स्टॉक का 90% से ज्यादा हिस्सा अकेले नासिक इलाके से आने का अनुमान है, जहां से आम तौर पर कुल खरीद का 80% से ज्यादा हिस्सा आता है।
नाफेड के अधिकारी ने कहा, "किसानों के स्टोरेज में रखे प्याज तेजी से खत्म हो रहा हैं और खरीद की गई 30% उपज सड़ने या अंकुरित होने से खराब हो गई है, जिससे सप्लाई की स्थिति और मुश्किल हो गई है।"
आम तौर पर किसान सितंबर से स्टोर किया हुआ प्याज बाजार में लाना शुरू करते हैं लेकिन इस साल कई किसानों ने खराब होने से होने वाले नुकसान से बचने के लिए जून और जुलाई में ही अपना स्टॉक बेचना शुरू कर दिया।
कितना प्याज बचा है?
कृषि विभाग के एक अधिकारी ने कहा, "इसके अलावा थोक बाजार में बेहतर दाम मिलने की वजह से भी किसान सरकारी खरीद एजेंसियों के बजाय बाजार की ओर आकर्षित हुए।" कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, भारत में सबसे ज्यादा प्याज पैदा करने वाले इलाके नासिक जिले में लगभग 24 लाख टन प्याज रखने की क्षमता है, लेकिन किसानों के पास उनके अपने गोदामों में कुल स्टॉक का सिर्फ 25% ही बचा है।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि प्याज के लगातार खराब होने और उसकी शेल्फ-लाइफ (रखे रहने की क्षमता) कम होने के कारण नया स्टॉक आने से पहले ही मौजूदा स्टॉक खत्म हो सकता है।
खरीफ की फसल में देरी से सप्लाई में कमी का डर
बुवाई के मौसम में कम बारिश के कारण खरीफ प्याज की फसल में काफी देरी हो रही है, जिससे हालात और बिगड़ रहे हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले में खरीफ प्याज की खेती का औसत रकबा लगभग 30,000 हेक्टेयर है, जबकि अब तक सिर्फ 370 हेक्टेयर में ही खरीफ प्याज की रोपाई हो पाई है। आम तौर पर मौसम के इस चरण तक रोपाई का लगभग आधा काम पूरा हो जाता है, लेकिन मौजूदा प्रगति सिर्फ 1% है।
अब खरीफ़ का नया प्याज बाजार में नवंबर के मध्य तक ही आने की उम्मीद है और नियमित आवक दिसंबर की शुरुआत से होने की संभावना है, इसलिए व्यापारियों को अक्टूबर में सप्लाई में कमी की आशंका है। कृषि अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा स्टॉक इसी रफ्तार से कम होता रहा तो जिले में सितंबर और अक्टूबर के दौरान प्याज की कमी हो सकती है।
सप्लाई के लिए अहम पांच महीने
फिलहाल, बाजार मुख्य रूप से मार्च और अप्रैल में काटी गई गर्मियों की फसल वाले प्याज पर निर्भर हैं। आमतौर पर इन प्याजों की शेल्फ-लाइफ छह से सात महीने होती है और किसान इन्हें साल भर अलग-अलग समय पर बेचने के लिए स्टोर करके रखते हैं।
कृषि विभाग के एक और अधिकारी ने कहा, "खरीफ की फसल आने तक अगले कुछ महीनों में प्याज की कोई खास नई फसल आने की उम्मीद नहीं है। इस दौरान होलसेल और रिटेल मार्केट में सप्लाई के लिए स्टोर किए गए प्याज ही मुख्य स्रोत होते हैं।"
हालांकि, व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि अगर बहुत ज्यादा खराब होने या समय से पहले स्टॉक खत्म होने की वजह से मौजूदा स्टोरेज साइकल में रुकावट आती है तो सप्लाई और कम हो सकती है, जिससे आने वाले महीनों में प्याज की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
